Wednesday, March 18, 2015

फूलों की सुगंध हवा के विपरीत नहीं जाती किंतु शील की सुगंध हवा के विपरीत भी जाती है

नमोबुध्दाय जयभीम ।
# तथागत भगवान बुध्द कहते हैं , फूलों की सुगंध हवा के विपरीत नहीं जाती और न ही चंदन की , न चमेली की और न ही तगर की किंतु शील की सुगंध हवा के विपरीत भी जाती है और सब दिशाओं में फैल भी जाती है ।इसलिए मानव को अपने अंदर शील गुण को समाहित करने का प्रयास करते रहना चाहिए जिससे उसके व्यक्तिव की सुगंध चारों ओर फैल जाये । 
# व्यक्ति धन का दान करता है , भोजन का दान करता है वस्तुओं का दान करता है समय कि दान करता है किंतु मानव कल्याण के लिए सबसे उत्तम धम्म दान होता है और धम्मपद का दान तो महादान होता है ।

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