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Thursday, December 31, 2015
Wednesday, December 30, 2015
Sunday, December 27, 2015
डॉ बाबासाहब अंबेडकर
डॉ बाबासाहब अंबेडकर 9 भाषाएँ जानते थे।
1) मराठी (मातृभाषा)
2) हिन्दी
3) संस्कृत
4) गुजराती
5) अंग्रेज़ी
6) पारसी
7) जर्मन
8) फ्रेंच
9) पाली
1) मराठी (मातृभाषा)
2) हिन्दी
3) संस्कृत
4) गुजराती
5) अंग्रेज़ी
6) पारसी
7) जर्मन
8) फ्रेंच
9) पाली
उन्होंने पाली व्याकरण और शब्दकोष (डिक्शनरी) भी लिखी थी, जो महाराष्ट्र सरकार ने "Dr.Babasaheb Ambedkar Writing and
Speeches Vol.16 "में प्रकाशित की हैं।
Speeches Vol.16 "में प्रकाशित की हैं।
🔹 बाबासाहब अंबेडकर जी ने संसद में पेश किए हुए विधेयक
1) महार वेतन बिल
2) हिन्दू कोड बिल
3) जनप्रतिनिधि बिल
4) खोती बिल
5) मंत्रीओं का वेतन बिल
6) मजदूरों के लिए वेतन (सैलरी) बिल
7) रोजगार विनिमय सेवा
8) पेंशन बिल
9) भविष्य निर्वाह निधी (पी.एफ्.)
2) हिन्दू कोड बिल
3) जनप्रतिनिधि बिल
4) खोती बिल
5) मंत्रीओं का वेतन बिल
6) मजदूरों के लिए वेतन (सैलरी) बिल
7) रोजगार विनिमय सेवा
8) पेंशन बिल
9) भविष्य निर्वाह निधी (पी.एफ्.)
🔹 बाबासाहब के सत्याग्रह (आंदोलन)
1) महाड आंदोलन 20/3/1927
2) मोहाली (धुले) आंदोलन 12/2/1939
3) अंबादेवी मंदिर आंदोलन 26/7/1927
4) पुणे कौन्सिल आंदोलन 4/6/1946
5) पर्वती आंदोलन 22/9/1929
6) नागपूर आंदोलन 3/9/1946
7) कालाराम मंदिर आंदोलन 2/3/1930
8) लखनौ आंदोलन 2/3/1947
9) मुखेड का आंदोलन 23/9/1931
2) मोहाली (धुले) आंदोलन 12/2/1939
3) अंबादेवी मंदिर आंदोलन 26/7/1927
4) पुणे कौन्सिल आंदोलन 4/6/1946
5) पर्वती आंदोलन 22/9/1929
6) नागपूर आंदोलन 3/9/1946
7) कालाराम मंदिर आंदोलन 2/3/1930
8) लखनौ आंदोलन 2/3/1947
9) मुखेड का आंदोलन 23/9/1931
🔹बाबासाहब अंबेडकर द्वारा स्थापित सामाजिक संघटन
1) बहिष्कृत हितकारिणी सभा - 20 जुलै 1924
2) समता सैनिक दल - 3 मार्च 1927
2) समता सैनिक दल - 3 मार्च 1927
🔹राजनीतिक संघटन
1) स्वतंत्र मजदूर पार्टी - 16 अगस्त 1936
2) शेड्युल्ड कास्ट फेडरेशन- 19 जुलै 1942
3) रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया- 3 अक्तूबर 1957
1) स्वतंत्र मजदूर पार्टी - 16 अगस्त 1936
2) शेड्युल्ड कास्ट फेडरेशन- 19 जुलै 1942
3) रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया- 3 अक्तूबर 1957
🔹धार्मिक संघटन
1) भारतीय बौद्ध महासभा -
4 मई 1955
1) भारतीय बौद्ध महासभा -
4 मई 1955
🔹शैक्षणिक संघटन
1) डिप्रेस क्लास एज्युकेशन सोसायटी- 14 जून 1928
2) पीपल्स एज्युकेशन सोसायटी- 8 जुलै 1945
3) सिद्धार्थ काॅलेज, मुंबई- 20 जून 1946
4) मिलींद काॅलेज, औरंगाबाद- 1 जून 1950
1) डिप्रेस क्लास एज्युकेशन सोसायटी- 14 जून 1928
2) पीपल्स एज्युकेशन सोसायटी- 8 जुलै 1945
3) सिद्धार्थ काॅलेज, मुंबई- 20 जून 1946
4) मिलींद काॅलेज, औरंगाबाद- 1 जून 1950
🔹अखबार, पत्रिकाएँ
1) मूकनायक- 31 जनवरी 1920
2) बहिष्कृत भारत- 3 अप्रैल 1927
3) समता- 29 जून 1928
4) जनता- 24 नवंबर 1930
5) प्रबुद्ध भारत- 4 फरवरी 1956
1) मूकनायक- 31 जनवरी 1920
2) बहिष्कृत भारत- 3 अप्रैल 1927
3) समता- 29 जून 1928
4) जनता- 24 नवंबर 1930
5) प्रबुद्ध भारत- 4 फरवरी 1956
🔹बाबासाहब अंबेडकर जी ने अपने जिवन में विभिन्न विषयों पर 527 से ज्यादा भाषण दिए।
🔹बाबासाहब अंबेडकर को प्राप्त सम्मान
1) भारतरत्न
2) The Greatest Man in the World (Columbia University)
3) The Universe Maker (Oxford University)
4) The Greatest Indian (CNN IBN & History Tv
2) The Greatest Man in the World (Columbia University)
3) The Universe Maker (Oxford University)
4) The Greatest Indian (CNN IBN & History Tv
🔹बाबासाहब अंबेडकर जी इनकी
निजी किताबें (उनके पास थी)
1) अंग्रेजी साहित्य- 1300 किताबें
2) राजनिती- 3,000 किताबें
3) युद्धशास्त्र- 300 किताबें
4) अर्थशास्त्र- 1100 किताबें
5) इतिहास- 2,600 किताबें
6) धर्म- 2000 किताबें
7) कानून- 5,000 किताबें
8) संस्कृत- 200 किताबें
9) मराठी- 800 किताबें
10) हिन्दी- 500 किताबें
11) तत्वज्ञान (फिलाॅसाफी)- 600 किताबें
12) रिपोर्ट- 1,000
13) संदर्भ साहित्य (रेफरेंस बुक्स)- 400 किताबें
14) पत्र और भाषण- 600
15) जिवनीयाँ (बायोग्राफी)- 1200
16) एनसाक्लोपिडिया ऑफ ब्रिटेनिका- 1 से 29 खंड
17) एनसाक्लोपिडिया ऑफ सोशल सायंस- 1 से 15 खंड
18) कैथाॅलिक एनसाक्लोपिडिया- 1 से 12 खंड
19) एनसाक्लोपिडिया ऑफ एज्युकेशन
20) हिस्टोरियन्स् हिस्ट्री ऑफ दि वर्ल्ड- 1 से 25 खंड
21) दिल्ली में रखी गई किताबें-
बुद्ध धम्म,
पालि साहित्य,
मराठी साहित्य- 2000 किताबें
22) बाकी विषयों की 2305 किताबें
निजी किताबें (उनके पास थी)
1) अंग्रेजी साहित्य- 1300 किताबें
2) राजनिती- 3,000 किताबें
3) युद्धशास्त्र- 300 किताबें
4) अर्थशास्त्र- 1100 किताबें
5) इतिहास- 2,600 किताबें
6) धर्म- 2000 किताबें
7) कानून- 5,000 किताबें
8) संस्कृत- 200 किताबें
9) मराठी- 800 किताबें
10) हिन्दी- 500 किताबें
11) तत्वज्ञान (फिलाॅसाफी)- 600 किताबें
12) रिपोर्ट- 1,000
13) संदर्भ साहित्य (रेफरेंस बुक्स)- 400 किताबें
14) पत्र और भाषण- 600
15) जिवनीयाँ (बायोग्राफी)- 1200
16) एनसाक्लोपिडिया ऑफ ब्रिटेनिका- 1 से 29 खंड
17) एनसाक्लोपिडिया ऑफ सोशल सायंस- 1 से 15 खंड
18) कैथाॅलिक एनसाक्लोपिडिया- 1 से 12 खंड
19) एनसाक्लोपिडिया ऑफ एज्युकेशन
20) हिस्टोरियन्स् हिस्ट्री ऑफ दि वर्ल्ड- 1 से 25 खंड
21) दिल्ली में रखी गई किताबें-
बुद्ध धम्म,
पालि साहित्य,
मराठी साहित्य- 2000 किताबें
22) बाकी विषयों की 2305 किताबें
🔹बाबासाहब जब अमेरिका से भारत लौट आए तब एक बोट दुर्घटना में उनकी सैंकडो किताबें समंदर मे डूबी।
🔹बाबासाहब अंबेडकर जी
1) महान समाजशास्त्री
2) महान अर्थशास्त्री
3) संविधान शिल्पी
4) आधुनिक भारत के मसिहा
5) इतिहास के ज्ञाता और रचियाता
6) मानवंशशास्त्र के ज्ञाता
7) तत्वज्ञानी (फिलाॅसाॅफर)
8) दलितों के और महिला अधिकारों के मसिहा
9) कानून के ज्ञाता (कानून के विशेषज्ञ)
10) मानवाधिकार के संरक्षक
11) महान लेखक
12) पत्रकार
13) संशोधक
14) पाली साहित्य के महान अभ्यासक (अध्ययनकर्ता)
15) बौध्द साहित्य के अध्ययनकर्ता
16) भारत के पहले कानून मंत्री
17) मजदूरों के मसिहा
18) महान राजनितीज्ञ
19) विज्ञानवादी सोच के समर्थक
20) संस्कृत और हिन्दू साहित्य के गहन अध्ययनकर्ता थे।
1) महान समाजशास्त्री
2) महान अर्थशास्त्री
3) संविधान शिल्पी
4) आधुनिक भारत के मसिहा
5) इतिहास के ज्ञाता और रचियाता
6) मानवंशशास्त्र के ज्ञाता
7) तत्वज्ञानी (फिलाॅसाॅफर)
8) दलितों के और महिला अधिकारों के मसिहा
9) कानून के ज्ञाता (कानून के विशेषज्ञ)
10) मानवाधिकार के संरक्षक
11) महान लेखक
12) पत्रकार
13) संशोधक
14) पाली साहित्य के महान अभ्यासक (अध्ययनकर्ता)
15) बौध्द साहित्य के अध्ययनकर्ता
16) भारत के पहले कानून मंत्री
17) मजदूरों के मसिहा
18) महान राजनितीज्ञ
19) विज्ञानवादी सोच के समर्थक
20) संस्कृत और हिन्दू साहित्य के गहन अध्ययनकर्ता थे।
🔹बाबासाहब अंबेडकर की कुछ विशेषताएँ
1) पाणी के लिए आंदोलन करनेवाले विश्व के पहल महापुरुष
2) लंदन विश्वविद्यालय के पुरे लाईब्ररी के किताबों की छानबीन कर उसकी
जानकारी रखनेवाले एकमात्र महामानव
जानकारी रखनेवाले एकमात्र महामानव
3) लंदन विश्वविद्यालय के 200 छात्रों में नंबर 1 का छात्र होने का सम्मान प्राप्त होनेवाले पहले भारतीय
4) विश्व के छह विद्वानों में से एक
5) विश्व में सबसे अधिक पुतले बाबासाहब अंबेडकर जी के हैं।
6) लंदन विश्वविद्यालय मे डी.एस्.सी.
यह उपाधी पानेवाले पहले और आखिरी भारतीय
यह उपाधी पानेवाले पहले और आखिरी भारतीय
7) लंदन विश्वविद्यालय का 8 साल का पाठ्यक्रम 3 सालों मे पूरा
करनेवाले महामानव
करनेवाले महामानव
🔹बाबासाहब अंबेडकर जी के वजह से ही भारत में "रिजर्व बैंक" की स्थापना हुईं।
बाबासाहब अंबेडकर जी ने अपने डाॅक्टर ऑफ सायंस के लिए ' दि प्राॅब्लेम ऑफ रूपी' यह शोध प्रबंध लिखा था। Indian Money & Finance इसके अभ्यास के लिए
ब्रिटिशों ने जो कमिशन चुना था उनको बाबासाहब 🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹
The Battle of Bhima
Koregaon.
ब्रिटिशों ने जो कमिशन चुना था उनको बाबासाहब 🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹
The Battle of Bhima
Koregaon.
पिछली बार जब डायरेक्टर संजय
जायसवाल ने फ़िल्म शूद्रा द राइजिंग बनाया था तब
Sab ने एक होकर उस फ़िल्म को
सिनेमाहालो मल्टीप्लेक्सों में चलने
नहीं दिया जिसकी
वजह से उनको बहुत ज्यादा आर्थिक
नुकशान उठाना पड़ा था। किन्तु उसी
महान अम्बेडकरवादी ने दुबारा
फ़िल्म 500 बनाने का हिम्मत दिखाया है।
जिसमे 1जनवरी 1818 की
सच्ची घटना को दिखाया गया है
जिसमे मात्र 500 जांबाज महार सैनिको ने
देखते ही देखते पेशवाओ
)की 28 हजार
सैनिको के विशाल सेना का संहार कर डाला और
पूरी दुनिया के सामने अपने साहस
और पराक्रम का अदभुत नायाब नमूना पेश किया
और अपने ऊपर सदियो से हुए अत्याचार का
बदला लिया।
इस प्रकार का पराक्रम पूरी दुनिया में
कभी नहीं देखा गया
था।
अगर इस फ़िल्म को भी
मनुवादी दबाने में सफल होते
है जैसे इस कोरे गांव विजय की
घटना को छुपाने में सफल हो गए थे तो लानत
है हमारी एकजुटता पर।
सभी ग्रुप बंद करके अपने अपने
घरो में आराम करो। और अपने निकम्मेपन का
आनंद लो अन्यथा अगर दम है तो इस
फ़िल्म की इतनी
पब्लिसिटी करो की
इसकी सफलता से ं के
होस उडा दे। उन्हें अपनी
एक जुटता का परिचय दो।
ताकी एक डाइरेक्टर उत्साहित
होके हमारे समाज के मुद्दों पर आगे
भी नायाब फिल्में बना सके।
अन्यथा भजन कीर्तन वाले
मनुवादी फिल्मो की क्या
कमी है मार्केट में देखो और
आनंद लो।
इस पोस्ट को इतना शेयर करो इतना शेयर करो
हमारे sc st obc भाई इस मूवी
को देखने जाएँ और जागरुकता लाए
यही हमारी
मनोकामना है
आप भीम वाले हैँ इतना जरुर
करना है आपको
हम लोगोँ को हमारे समाज को जागृत
करना यही हमारा
मीशन है 🙏🙏जय 🌀भीम🙏🙏
जायसवाल ने फ़िल्म शूद्रा द राइजिंग बनाया था तब
Sab ने एक होकर उस फ़िल्म को
सिनेमाहालो मल्टीप्लेक्सों में चलने
नहीं दिया जिसकी
वजह से उनको बहुत ज्यादा आर्थिक
नुकशान उठाना पड़ा था। किन्तु उसी
महान अम्बेडकरवादी ने दुबारा
फ़िल्म 500 बनाने का हिम्मत दिखाया है।
जिसमे 1जनवरी 1818 की
सच्ची घटना को दिखाया गया है
जिसमे मात्र 500 जांबाज महार सैनिको ने
देखते ही देखते पेशवाओ
)की 28 हजार
सैनिको के विशाल सेना का संहार कर डाला और
पूरी दुनिया के सामने अपने साहस
और पराक्रम का अदभुत नायाब नमूना पेश किया
और अपने ऊपर सदियो से हुए अत्याचार का
बदला लिया।
इस प्रकार का पराक्रम पूरी दुनिया में
कभी नहीं देखा गया
था।
अगर इस फ़िल्म को भी
मनुवादी दबाने में सफल होते
है जैसे इस कोरे गांव विजय की
घटना को छुपाने में सफल हो गए थे तो लानत
है हमारी एकजुटता पर।
सभी ग्रुप बंद करके अपने अपने
घरो में आराम करो। और अपने निकम्मेपन का
आनंद लो अन्यथा अगर दम है तो इस
फ़िल्म की इतनी
पब्लिसिटी करो की
इसकी सफलता से ं के
होस उडा दे। उन्हें अपनी
एक जुटता का परिचय दो।
ताकी एक डाइरेक्टर उत्साहित
होके हमारे समाज के मुद्दों पर आगे
भी नायाब फिल्में बना सके।
अन्यथा भजन कीर्तन वाले
मनुवादी फिल्मो की क्या
कमी है मार्केट में देखो और
आनंद लो।
इस पोस्ट को इतना शेयर करो इतना शेयर करो
हमारे sc st obc भाई इस मूवी
को देखने जाएँ और जागरुकता लाए
यही हमारी
मनोकामना है
आप भीम वाले हैँ इतना जरुर
करना है आपको
हम लोगोँ को हमारे समाज को जागृत
करना यही हमारा
मीशन है 🙏🙏जय 🌀भीम🙏🙏
भगवान सिर्फ एक अंधविश्वास है
लोग कहते हैं कि कण कण मे भगवान है, अगर कण कण मे भगवान है तो कण कण मे भ्रष्टाचार क्यों है ?
अगर कण मे कण भगवान है तो लोग जगह जगह अपना मल , मूत्र त्याग कर क्या भगवान को अपवित्र नही बना रहे ?
अगर जर्रे जर्रे मे भगवान है तो क्या लोग टट्टी, पेसाब, भगवान की खोपडी पर कर रहे हैं ?
लोग कहते हैं कि बगैर भगवान की मर्जी के पत्ता भी नही हिलता,
तो क्या भगवान चोरी भी करवाता है?
जब सब कुछ भगवान की मर्जी से होता है तो भगवान बलात्कार भी करवाता होगा ?
डकैती भी डलवाता होगा?
अगर यह सब भगवान ही करवाता है तो कितना निर्दयी है भगवान !
लोग कहते हैं कि भगवान गरीबो, मजलूमों, असहायों की रक्षा करता है ।
तो हिन्दुस्तान की आधे से अधिक आबादी गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने के लिए मजबूर क्यों है ?
भगवान क्यों नही इन्हें अमीर बना देता ?
दुनिया मे हर कहीं असहाय, मजलूम ही प्रताडित हो रहा है , भगवान क्यों नही इनकी मदद करता ?
लोग कहते है कि भगवान दुष्ट, चोर,गुण्डो को सजा देता है।
तो फिर जगह जगह चोरी डकैती, गुण्डागर्दी क्यों हो रही है ?
अगर भगवान इनको रोकने मे सक्षम है तो पुलिस ,सेना, कोर्ट कचहरी क्यों है ?
सच यह है कि भगवान कुछ नही कर सकता ।
आज तो भगवान की खुद शामत आ गयी है ।
आंतकवादी मंदिर, मस्जिद, गुरूद्वारा, चर्च देखकर ब्लास्ट कर रहा है, भगवान अपनी बचत नही कर पा रहा है ।
भगवान की अष्टधातु मूर्तियों को चोर चुरा कर अंतर्राष्ट्रीय बाजार मे बेंच कर करोडो कमा रहा है,
भगवान अपनी रक्षा नही कर पा रहा है ।
कितना बेबस है भगवान !
लोग कहते है कि भगवान दूसरो को पवित्र बनाता है, अपने दर्शन से ।
लेकिन यह भगवान दलितों के छूने से ही छुईमुई के पौधे की तरह खुद सिकुड जाता है ।
दलित के छूने से अपवित्र हो जाता है ।
और फिर गाय, भैंस, बकरी की पाखाना, पिसाब से पवित्र हो जाता है ।
कैसा भगवान है ?
भगवान जब सबसे ताकतवर है तो उसकी सिक्युरिटी मे पुलिस ,, कमाण्डों , सेना क्यों लगायी जाती है ?
किसी भी धार्मिक स्थल पर जाइए, वहां गेट पर सबसे ज्यादा लूले,लंगडे,अपाहिज ,कोढी,लाइन लगाये रहते है,
अंधे को आंख देत ,कोढिन को काया वाला भगवान कहां रहता है, क्यों नही इनकी समस्या दूर कर देता है ?
किसी ने कहा है कि _"इंसान को बनाकर भगवान ने सबसे बडी गल्ती की', या भगवान को बनाकर इंसान ने ।"
उत्तर साफ है कि "भगवान को बनाकर इंसान ने सबसे बडी गल्ती की।"
अगर इंसान ने भगवान की कल्पना नही की होती तो इसके नाम पर इतना ज्यादा लुटता, पिटता नही ।
भगवान सिर्फ एक अंधविश्वास है ।
अगर कण मे कण भगवान है तो लोग जगह जगह अपना मल , मूत्र त्याग कर क्या भगवान को अपवित्र नही बना रहे ?
अगर जर्रे जर्रे मे भगवान है तो क्या लोग टट्टी, पेसाब, भगवान की खोपडी पर कर रहे हैं ?
लोग कहते हैं कि बगैर भगवान की मर्जी के पत्ता भी नही हिलता,
तो क्या भगवान चोरी भी करवाता है?
जब सब कुछ भगवान की मर्जी से होता है तो भगवान बलात्कार भी करवाता होगा ?
डकैती भी डलवाता होगा?
अगर यह सब भगवान ही करवाता है तो कितना निर्दयी है भगवान !
लोग कहते हैं कि भगवान गरीबो, मजलूमों, असहायों की रक्षा करता है ।
तो हिन्दुस्तान की आधे से अधिक आबादी गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने के लिए मजबूर क्यों है ?
भगवान क्यों नही इन्हें अमीर बना देता ?
दुनिया मे हर कहीं असहाय, मजलूम ही प्रताडित हो रहा है , भगवान क्यों नही इनकी मदद करता ?
लोग कहते है कि भगवान दुष्ट, चोर,गुण्डो को सजा देता है।
तो फिर जगह जगह चोरी डकैती, गुण्डागर्दी क्यों हो रही है ?
अगर भगवान इनको रोकने मे सक्षम है तो पुलिस ,सेना, कोर्ट कचहरी क्यों है ?
सच यह है कि भगवान कुछ नही कर सकता ।
आज तो भगवान की खुद शामत आ गयी है ।
आंतकवादी मंदिर, मस्जिद, गुरूद्वारा, चर्च देखकर ब्लास्ट कर रहा है, भगवान अपनी बचत नही कर पा रहा है ।
भगवान की अष्टधातु मूर्तियों को चोर चुरा कर अंतर्राष्ट्रीय बाजार मे बेंच कर करोडो कमा रहा है,
भगवान अपनी रक्षा नही कर पा रहा है ।
कितना बेबस है भगवान !
लोग कहते है कि भगवान दूसरो को पवित्र बनाता है, अपने दर्शन से ।
लेकिन यह भगवान दलितों के छूने से ही छुईमुई के पौधे की तरह खुद सिकुड जाता है ।
दलित के छूने से अपवित्र हो जाता है ।
और फिर गाय, भैंस, बकरी की पाखाना, पिसाब से पवित्र हो जाता है ।
कैसा भगवान है ?
भगवान जब सबसे ताकतवर है तो उसकी सिक्युरिटी मे पुलिस ,, कमाण्डों , सेना क्यों लगायी जाती है ?
किसी भी धार्मिक स्थल पर जाइए, वहां गेट पर सबसे ज्यादा लूले,लंगडे,अपाहिज ,कोढी,लाइन लगाये रहते है,
अंधे को आंख देत ,कोढिन को काया वाला भगवान कहां रहता है, क्यों नही इनकी समस्या दूर कर देता है ?
किसी ने कहा है कि _"इंसान को बनाकर भगवान ने सबसे बडी गल्ती की', या भगवान को बनाकर इंसान ने ।"
उत्तर साफ है कि "भगवान को बनाकर इंसान ने सबसे बडी गल्ती की।"
अगर इंसान ने भगवान की कल्पना नही की होती तो इसके नाम पर इतना ज्यादा लुटता, पिटता नही ।
भगवान सिर्फ एक अंधविश्वास है ।
Wednesday, December 23, 2015
हमारे पास...
हमारे पास...
.................
.................
भीड़ है
संगठन नहीं
संगठन नहीं
वोट की शक्ति है
सत्ता नहीं
सत्ता नहीं
विचार हैं
साहित्य नहीं
साहित्य नहीं
ख़बरें है
अखबार नहीं
अखबार नहीं
सुर्खियां हैं
मिडिया नहीं
मिडिया नहीं
साधन है
संसाधन नहीं
संसाधन नहीं
श्रम है
व्यापार नहीं
व्यापार नहीं
कानून है
न्याय नहीं
न्याय नहीं
संविधान है
अधिकार नहीं
अधिकार नहीं
भूख है
भोजन नहीं
भोजन नहीं
कदम हैं
पगडण्डी नहीं
पगडण्डी नहीं
मंजिल है
रास्ते नहीं
रास्ते नहीं
क्योंकि...
............
............
पाखंड है
धम्म नहीं
धम्म नहीं
गांधी है
अम्बेडकर नहीं
अम्बेडकर नहीं
☝एक बनो नेक बनो
Monday, December 21, 2015
एक लडका अपने पिताजी से सवाल करता है
कुछ जान बची....
एक लडका अपने पिताजी से सवाल करता है....
एक लडका अपने पिताजी से सवाल करता है....
लडका:- पापा मुझे स्कुल में पढाया की ईन्सान पहेले आदिमानव था. ये सच है क्या ?
पापा:- हां बेटा , ईन्सान पहेले आदिमानव था.
लडका:- फिर तो वो शरीर पर कपडे नही पहनते होगे.?
पापा:- नही बेटा, ईन्सान के जीवन मे धीरे-धीरे प्रगती हुई. ईन्सान थोडा थोडा समझने लगे तब पहेले पेड के पत्तो के कपडे पहनने लगे फिर जेसे जेसे उसे समझ आने लगा वेसे वो सूधरता गया ओर अनेक शोध करता गया. अभी जो कुछ भी हम देख रहे है, उपयोग कर रहे है, वो सब कुछ ईन्सान ने ही निर्माण किया है.
लडका:- पापा तो फिर' भगवान पहले थे कि ईन्सान.?
पापा:- बेटा भगवान पहले थे' भगवान दुनिया बनाई है...
पापा:- हां बेटा , ईन्सान पहेले आदिमानव था.
लडका:- फिर तो वो शरीर पर कपडे नही पहनते होगे.?
पापा:- नही बेटा, ईन्सान के जीवन मे धीरे-धीरे प्रगती हुई. ईन्सान थोडा थोडा समझने लगे तब पहेले पेड के पत्तो के कपडे पहनने लगे फिर जेसे जेसे उसे समझ आने लगा वेसे वो सूधरता गया ओर अनेक शोध करता गया. अभी जो कुछ भी हम देख रहे है, उपयोग कर रहे है, वो सब कुछ ईन्सान ने ही निर्माण किया है.
लडका:- पापा तो फिर' भगवान पहले थे कि ईन्सान.?
पापा:- बेटा भगवान पहले थे' भगवान दुनिया बनाई है...
लडका:- फिर पापा एसा केसे. वो भगवान की तस्वीर में तो कपडे, दागीने, त्रिशूल, सोना, भाले, गदा, लड्डू , मोदक, एसे बहुत कुछ-कुछ दिखता है.?
वो समय दागीने बनाने वाला सुनार था क्या ?
कपडे की मील थी क्या?
कपडे की सिलाई के लिये दरजी था क्या ?
भाले, त्रिशूल, गधे, तलवार बनाने वाले कारीगर थे क्या ?
लड्डू मोदक बनाने वाले हलवाई थे क्या ?
वो समय दागीने बनाने वाला सुनार था क्या ?
कपडे की मील थी क्या?
कपडे की सिलाई के लिये दरजी था क्या ?
भाले, त्रिशूल, गधे, तलवार बनाने वाले कारीगर थे क्या ?
लड्डू मोदक बनाने वाले हलवाई थे क्या ?
पापा:-पागलो जेसे सवाल पूछ मत , चुप बेठ !
अरे बेटा, वो भगवान है. वो कुछ भी कर सकते है...
अरे बेटा, वो भगवान है. वो कुछ भी कर सकते है...
लडका :- तो भगवान कहाँ है पापा ?
पापा:- अरे भगवान हमारी आजुबाजु ही है.
लडका:- क्या' भगवान हे यहा-?
पापा :- हा बेटा.
लडका:-तो उन्हे कहो ना शेर-हिरन की चामडी के कपडे पहनने से अच्छा प्रगत कपडे पहने....त्रिशूल भाले गदा तलवार से अब कोई नही डरता , उन्हसे कहो रायफल" मशीनगन" ओर आँटोम बोम्ब" पास रखे...
पापा:- अरे भगवान हमारी आजुबाजु ही है.
लडका:- क्या' भगवान हे यहा-?
पापा :- हा बेटा.
लडका:-तो उन्हे कहो ना शेर-हिरन की चामडी के कपडे पहनने से अच्छा प्रगत कपडे पहने....त्रिशूल भाले गदा तलवार से अब कोई नही डरता , उन्हसे कहो रायफल" मशीनगन" ओर आँटोम बोम्ब" पास रखे...
वैसे तो' जिसने दुनिया बनाई है' जिनकी शाप वाणी मे इतनी ताकत है तो उन्हे गदा तलवार की जरूर क्या है पापा ?
वो तो दयालू ओर क्षमाशील है...?
ओर एक पापा, उन्हे कहो अपने देश का भ्रष्टाचार मिटाने ? किसानो की समस्यावो का समाधान करने, उनकी आत्महत्या रोकने को, 2 साल की छोटी लडकी से 60 साल की ओरत पर रोजाना बलात्कार होते है. वो रोकने को कहो ना . मंदिरो में करोडो-अरबो की संपत्ती है वो लोक कल्यान के लिये देने की बुद्धी वो मंदिर प्रशासन वालो को दे वो कहो ना पापा....
वो तो दयालू ओर क्षमाशील है...?
ओर एक पापा, उन्हे कहो अपने देश का भ्रष्टाचार मिटाने ? किसानो की समस्यावो का समाधान करने, उनकी आत्महत्या रोकने को, 2 साल की छोटी लडकी से 60 साल की ओरत पर रोजाना बलात्कार होते है. वो रोकने को कहो ना . मंदिरो में करोडो-अरबो की संपत्ती है वो लोक कल्यान के लिये देने की बुद्धी वो मंदिर प्रशासन वालो को दे वो कहो ना पापा....
पापा:- बेटा मे तेरे हाथ जोड्ता हुं' बस कर तेरे सवाल. मुझे अब तक नही पता. तो मे तुझे क्या जवाब दु..
मझे बच्चपन से जेसा भगवान दिखाया जेसा धर्म शिकाया वेसे ही पूजा ओर पालन करता आया...
मुझे ये सब नही पता बेटा...पर सब पालन करना पडता है बेटा...नही अच्छा लगता है फिर भी चुप बेठना पडना है..
मझे बच्चपन से जेसा भगवान दिखाया जेसा धर्म शिकाया वेसे ही पूजा ओर पालन करता आया...
मुझे ये सब नही पता बेटा...पर सब पालन करना पडता है बेटा...नही अच्छा लगता है फिर भी चुप बेठना पडना है..
लडका:-यानी आज तक आपने अपनी बुद्धी ओर धैर्या का उपयोग नही किया. पर पापा मे वेसा करूगा नही . सत्य-असत्य जान के ही आगे जाउगा .पर मुझे इतना विश्वास जरूर है. ये सृष्टी का निर्माता जेसे हो वेसे हो , पर सबी धर्म शिखाता है वेसे बिलकुल नही...
ये सुन के पापा का सर नीचे झूक गया ओर लडके से नजर चुराने लगा.
ये सुन के पापा का सर नीचे झूक गया ओर लडके से नजर चुराने लगा.
आज कम संख्या मे हो पर , कभी ना कभी आगे की पिढी के लडके ये सवाल जरूर पूछेगे ध्यान रखो. तब सर झुकाने से अच्छा अभी अपनी गलती सुधार ले. सभी करते ईसलिये मत करो, काम के कारन अच्छा लगे तो ही वो चीज करो..
खुद: को सवाल करो...आगे की वैज्ञानिक पिढी तैयार करो...
जय भिम महान..
खुद: को सवाल करो...आगे की वैज्ञानिक पिढी तैयार करो...
जय भिम महान..
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A boy asks his dad
Thursday, December 17, 2015
भारत के मूल निवासी चूंकि जंगल की रक्षा करते थे इसलिए उन्हें रक्षक या राक्षस कहा गया
आर्यों का मूल स्थान सेन्ट्रल एशिया थाआर्य पशु पालन का काम करते थे
आर्य जब भारतीय उप महाद्वीप में आये तो यहाँ घने जंगल थे
आर्यों को गायों के लिए घास के मैदानों की ज़रूरत थी
मैदान तैयार करने के लिए आर्यों नें जंगलों को आग लगानी शुरू करी
इसे आर्य यज्ञ कहते थे
लेकिन भारतीय मूल निवासी जंगल पर आधारित जीवन जीते थे
इसलिए मूलनिवासी जंगल में लगी हुई आग को बुझा देते थे
इसीलिये आर्य कहते थे कि ये राक्षस हमारे यज्ञ में बाधा डालते हैं
भारत के मूल निवासी चूंकि जंगल की रक्षा करते थे इसलिए उन्हें रक्षक या राक्षस कहा गया
आर्यों के धर्मग्रंथों में राक्षसों का वर्णन ध्यान से पढ़िए
उसमें लिखा गया है कि राक्षस काले रंग के होते थे
राक्षसों के घुंघराले बाल होते थे
राक्षसों के सींग होते थे
राक्षसों का यह वर्णन ठीक आदिवासियों का वर्णन है
भारत के मूल निवासी सांवले रंग के थे
घुंघराले काले बालों वाले थे
आज भी छत्तीसगढ़ के आदिवासी सींग लगा कर नाचते हैं
यज्ञ की अग्नि की रक्षा के लिए राजा का बेटा जंगल में जाता है
राजा का बेटा ताड़का राक्षसनी का वध करता है
ताड़का यानी ताड़ी पीने वाले समुदाय की महिला
ताड़कासुर यानी पेड़ से निकली ताड़ी पीने वाले असुर
यानी आदिवासी
यानी राजा का बेटा भारत के आदिवासियों की हत्या करता है
उसे आर्य ग्रन्थ वीरता की गाथा के रूप में दर्ज करते हैं
और उस राजा के बेटे को अपना राष्ट्रीय आदर्श घोषित करते हैं
और आज भी हर साल ताड़कासुर वध का उत्सव मनाते हैं
मैं आपको यह पुरानी कहानी इसलिए सुना रहा हूँ
ताकि आप यह समझ सकें
कि हमारे शासन द्वारा
आदिवासियों की आज जो हत्याएं करी जा रही हैं
आप उसे क्यों स्वीकार कर लेते हैं ?
असल में आदिवासियों को मार कर उनकी ज़मीनों पर कब्जा कर लेना
हमारी परम्परा है
इस परम्परा को हम अपना धर्म मानते हैं
उदहारण के लिए दो महीने पहले ही
छत्तीसगढ़ के पेद्दा गेलूर गाँव में
हमारे सुरक्षा बलों नें चालीस आदिवासी औरतों पर यौन हमला किया है
तीन महिलाओं नें सोनी सोरी के साथ आकर थाने में बलात्कार की रिपोर्ट लिखवाई है
इनमें एक चौदह साल की बच्ची भी है
लेकिन इस घटना के बाद आज किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया है
लेकिन इस सब का भारत के सभ्य, शिष्ट, और महान संस्कृति के वाहकों के मन में ज़रा सा भी रोष नहीं है
सोनी सोरी के गुप्तांगों में पत्थर भरने पुलिस अधिकारी को भारत के राष्ट्रपति नें वीरता पुरस्कार दिया
उडीसा की आरती मांझी के साथ सुरक्षा बलों नें सामूहिक बलात्कार किया और उसे पांच फर्जी मामलों में फंसा कर जेल में डाल दिया
आरती मांझी पाँचों मामलों में निर्दोष पायी गयी
लेकिन आज तक उसके साथ बलात्कार करने वाले किसी सिपाही के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं करी गयी
पन्द्रह साल की आदिवासी लडकी हिडमे के साथ थाने में बलात्कार कर के उसे सात साल तक जेल में रखा गया और फिर इसी साल उसे निर्दोष घोषित कर के घर भेज दिया
आदिवासी महिला लेधा के साथ पुलिस वालों नें एक महीने तक सामूहिक बलात्कार किया
ऐसा करने वाले पुलिस अधिकारी कल्लूरी को भी
भारत के राष्ट्रपति नें वीरता पुरस्कार दिया
आप कह सकते हैं कि मैं क्यों अतीत का रोना रोने बैठ गया हूँ
बेशक हम अपना वर्तमान बेहतर बना सकते हैं
लेकिन उसकी शुरुआत तो कीजिये
पिछली गलती स्वीकार कर लीजिये
सही रास्ते पर चलने के लिए सहमत हो जाइए
भारत में भी शांति और प्रेम का वातावरण बन सकता है
वरना हमारी नफरत और लालच हमें भयानक हालात में पहुंचा ही देगी
और उसके लिए ज़िम्मेदार कोई और नहीं हम खुद ही होंगे
बेशक हम अपना वर्तमान बेहतर बना सकते हैं
लेकिन उसकी शुरुआत तो कीजिये
पिछली गलती स्वीकार कर लीजिये
सही रास्ते पर चलने के लिए सहमत हो जाइए
भारत में भी शांति और प्रेम का वातावरण बन सकता है
वरना हमारी नफरत और लालच हमें भयानक हालात में पहुंचा ही देगी
और उसके लिए ज़िम्मेदार कोई और नहीं हम खुद ही होंगे
( संदर्भ स्रोत - वोल्गा से गंगा - लेखक राहुल संकृत्यायन, वयं रक्षामः - लेखक आचार्य चतुरसेन, सामाजिक विज्ञान की छठवीं ,सातवीं और आठवीं की इतिहास की एनसीआरटी की पाठ्य पुस्तक )
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Native to India as forest guards or monsters so they were used to protect
Tuesday, October 27, 2015
गोभक्त स्वामीजी
एक शाम रेलवे स्टेशन पर एक स्वामीजी के दर्शन हो गए. ऊंचे, गोरे और तगड़े साधु थे. चेहरा लाल. गेरुए रेशमी कपड़े पहने थे. पांवों में खड़ाऊं. हाथ में सुनहरी मूठ की छड़ी. साथ एक छोटे साइज का किशोर संन्यासी था. उसके हाथ में ट्रांजिस्टर था और वह गुरु को रफी के गाने के सुनवा रहा था.
मैंने पूछा- स्वामी जी, कहां जाना हो रहा है?
स्वामीजी बोले – दिल्ली जा रहे हैं, बच्चा!
मैंने कहा- स्वामीजी, मेरी काफी उम्र है, आप मुझे ‘बच्चा’ क्यों कहते हैं?
मैंने कहा- स्वामीजी, मेरी काफी उम्र है, आप मुझे ‘बच्चा’ क्यों कहते हैं?
स्वामीजी हंसे. बोले – बच्चा, तुम संसारी लोग होटल में साठ साल के बूढ़े बैरे को ‘छोकरा’ कहते हो न! उसी तरह हम तुम संसारियों को बच्चा कहते हैं. यह विश्व एक विशाल भोजनालय है जिसमें हम खाने वाले हैं और तुम परोसने वाले हो. इसीलिए हम तुम्हें बच्चा कहते हैं. बुरा मत मानो. संबोधन मात्र है.
स्वामीजी बात से दिलचस्प लगे. मैं उनके पास बैठ गया. वे भी बेंच पर पालथी मारकर बैठ गए. सेवक को गाना बंद करने के लिए कहा.
कहने लगे- बच्चा, धर्मयुद्ध छिड़ गया. गोरक्षा-आंदोलन तीव्र हो गया है. दिल्ली में संसद के सामने सत्याग्रह करेंगे.
मैंने कहा- स्वामीजी, यह आंदोलन किस हेतु चलाया जा रहा है?
स्वामीजी ने कहा- तुम अज्ञानी मालूम होते हो, बच्चा! अरे गौ की रक्षा करना है. गौ हमारी माता है. उसका वध हो रहा है.
स्वामीजी ने कहा- तुम अज्ञानी मालूम होते हो, बच्चा! अरे गौ की रक्षा करना है. गौ हमारी माता है. उसका वध हो रहा है.
मैंने पूछा- वध कौन कर रहा है?
वे बोले- विधर्मी कसाई.
मैंने कहा- उन्हें वध के लिए गौ कौन बेचते हैं? वे आपके सधर्मी गोभक्त ही हैं न?
स्वामीजी ने कहा- सो तो है. पर वे क्या करें? एक तो गाय व्यर्थ खाती है, दूसरे बेचने से पैसे मिल जाते हैं.
मैंने कहा- यानी पैसे के लिए माता का जो वध करा दे, वही सच्चा गो-पूजक हुआ!
स्वामीजी मेरी तरफ देखने लगे. बोले- तर्क तो अच्छा कर लेते हो, बच्चा! पर यह तर्क की नहीं, भावना की बात है. इस समय जो हजारों गोभक्त आंदोलन कर रहे हैं, उनमें शायद ही कोई गौ पालता हो पर आंदोलन कर रहे हैं. यह भावना की बात है.
स्वामीजी से बातचीत का रास्ता खुल चुका था. उनसे जमकर बातें हुईं, जिसमें तत्व मंथन हुआ. जो तत्व प्रेमी हैं, उनके लाभार्थ वार्तालाप नीचे दे रहा हूं.
स्वामीजी और बच्चा की बातचीत
स्वामीजी, आप तो गाय का दूध ही पीते होंगे?
नहीं बच्चा, हम भैंस के दूध का सेवन करते हैं. गाय कम दूध देती है और वह पतला होता है. भैंस के दूध की बढ़िया गाढ़ी मलाई और रबड़ी बनती है.
तो क्या सभी गोभक्त भैंस का दूध पीते हैं?
हां, बच्चा, लगभग सभी.
तब तो भैंस की रक्षा हेतु आंदोलन करना चाहिए. भैंस का दूध पीते हैं, मगर माता गौ को कहते हैं. जिसका दूध पिया जाता है, वही तो माता कहलाएगी.
यानी भैंस को हम माता…नहीं बच्चा, तर्क ठीक है, पर भावना दूसरी है.
स्वामीजी, हर चुनाव के पहले गोभक्ति क्यों जोर पकड़ती है? इस मौसम में कोई खास बात है क्या?
बच्चा, जब चुनाव आता है, तब हमारे नेताओं को गोमाता सपने में दर्शन देती है. कहती है बेटा चुनाव आ रहा है. अब मेरी रक्षा का आंदोलन करो. देश की जनता अभी मूर्ख है. मेरी रक्षा का आंदोलन करके वोट ले लो. बच्चा, कुछ राजनीतिक दलों को गोमाता वोट दिलाती है, जैसे एक दल को बैल वोट दिलाते हैं. तो ये नेता एकदम आंदोलन छेड़ देते हैं और हम साधुओं को उसमें शामिल कर लेते हैं. हमें भी राजनीति में मजा आता है. बच्चा, तुम हमसे ही पूछ रहे हो. तुम तो कुछ बताओ, तुम कहां जा रहे हो?
स्वामीजी मैं ‘मनुष्य-रक्षा आंदोलन’ में जा रहा हूं.
यह क्या होता है, बच्चा?
स्वामीजी, जैसे गाय के बारे में मैं अज्ञानी हूं, वैसे ही मनुष्य के बारे में आप हैं.
पर मनुष्य को कौन मार रहा है?
इस देश के मनुष्य को सूखा मार रहा है, अकाल मार रहा है, महंगाई मार रही है. मनुष्य को मुनाफाखोर मार रहा है, काला-बाजारी मार रहा है. भ्रष्ट शासन-तंत्र मार रहा है. सरकार भी पुलिस की गोली से चाहे जहां मनुष्य को मार रही है. बिहार के लोग भूखे मर रहे हैं.
बिहार? बिहार शहर कहा है बच्चा?
बिहार एक प्रदेश है, राज्य है
Sunday, October 25, 2015
Reason of Poor and unhappiness
महीने का सन्देश सूत्र: गौतम बुद्ध ने सर्वप्रथम साबित किया था की 'आर्थिक विषमता' या असमान मेहनताना ही दुखों का मूल कारन है,आर्थिक विषमता का मतलब है ऐसी व्यस्था जिसमें व्यक्तियों के काम की कीमत अन्यायपूर्ण तरीके से तय हो जिससे कुछ लोग बहुत ज्यादा अमीर हो जाएँ और बहुसंख्यक लोग लोग बहुत गरीब बन जाएँ | इसका सीधा कारण है कुछ अमीर लोगों का समूह जो सरकार के नियंत्रण, ईश्वर का डर और धर्म की इस्तेमाल से जनता का शोषण करता है| जनता जितना ज्यादा धर्म और ईश्वर को चाहेगी उतनी ही गरीब और दुखी होती जाएगी| अगर दुखों से मुक्ति चाहते हो तो ईश्वर की जगह ज्ञान और धर्म की जगह राजनीती और भक्ति की जगह संगर्ष में लगन लगाओ, ताकि तुम भी सरकारी नीतिओं का नियंत्रण कर सको|
Tuesday, September 1, 2015
जमीन खरेदी करताना

महत्त्वाची माहिती…….
1. जमीन खरेदी करताना घ्यावयाची काळजी
2. जमिनीचा सातबारा आपल्या नावे केव्हा होतो
3. व्यावहारिक जगात लागणारे काही महत्वाची जमिनीची क्षेत्रफळाची रुपांतरे
====================================================
1. #जमीन_खरेदी_करताना
1) जमिनीचा सातबारा उतारा पाहणे :
ज्या गावातील जमींन खारेदी करावयाची असेल तेथिल गावच्या तलाठ्या कडून जमिनीचा नवीन सातबारा काढून घ्यावा. त्यावर असलेले फेरफार व आठ अ तपासून पाहावा.
सातबारा पहाताना वर्ग १ नोंद असली तर ती जमीन विक्री करणा-याची स्वतःच्या मालकी वहिवाटीची असून सदर जमीन खरेदी करण्यास विशेष अडचण येत नाही.
परंतु नि.स.प्र.(नियंत्रित सत्ता प्रकार किवा वर्ग २) अशी नोंद असेल तर सदर जमीन कुळ वाहिवाटी मार्फत मिळविलेली असते. अशी जमीन खरेदी करणे पूर्वी संबंधित कुळाला विक्री करण्यासाठी प्रांत अधिकारी यांची परवानगी घेणे अपरिहार्य ठरते. ही परवानगी खरेदी करते वेळी घेणे आवश्यक असते. या करीता ३२ म प्रमाणपत्र वगैरे ब-याच कागदपत्रांची पूर्तता करावी लागते. यासाठी साधारणत: एक महिना कालावधी लागतो. प्रांत अधिकारी यांची परवानगी मिळल्यावर खरेदीखत करता येते.
2. जमिनीचा सातबारा आपल्या नावे केव्हा होतो
3. व्यावहारिक जगात लागणारे काही महत्वाची जमिनीची क्षेत्रफळाची रुपांतरे
====================================================
1. #जमीन_खरेदी_करताना
1) जमिनीचा सातबारा उतारा पाहणे :
ज्या गावातील जमींन खारेदी करावयाची असेल तेथिल गावच्या तलाठ्या कडून जमिनीचा नवीन सातबारा काढून घ्यावा. त्यावर असलेले फेरफार व आठ अ तपासून पाहावा.
सातबारा पहाताना वर्ग १ नोंद असली तर ती जमीन विक्री करणा-याची स्वतःच्या मालकी वहिवाटीची असून सदर जमीन खरेदी करण्यास विशेष अडचण येत नाही.
परंतु नि.स.प्र.(नियंत्रित सत्ता प्रकार किवा वर्ग २) अशी नोंद असेल तर सदर जमीन कुळ वाहिवाटी मार्फत मिळविलेली असते. अशी जमीन खरेदी करणे पूर्वी संबंधित कुळाला विक्री करण्यासाठी प्रांत अधिकारी यांची परवानगी घेणे अपरिहार्य ठरते. ही परवानगी खरेदी करते वेळी घेणे आवश्यक असते. या करीता ३२ म प्रमाणपत्र वगैरे ब-याच कागदपत्रांची पूर्तता करावी लागते. यासाठी साधारणत: एक महिना कालावधी लागतो. प्रांत अधिकारी यांची परवानगी मिळल्यावर खरेदीखत करता येते.
2) कोणतीही जमीन खरेदी करताना खालील गोष्टींचा आढवा घ्यावा.
a) जमिनी पर्यंतचा रस्ता - जमीन बिनशेती असल्यास जमिनी पर्यंतचा रस्ता नकाशामध्ये दाखवीलेला असतो परंतु जमीन बिनशेती नसल्यास व खाजगी रस्ता असल्यास रस्त्यासाठी दाखवीलेली जमीन व संबंधित मालक यांची हरकत नसल्याची खात्री करावी.
b) आरक्षीत जमिनी - शासनाने सदर सदर जमिनी मध्ये कोणत्याही करणासाठीचे आरक्षण उदा. हिरवा पट्टा पिवळा पट्टा इं. नसल्याची खात्री करावी.
c) वाहिवाटदार - सातबारावरील मुळ मालक व प्रत्यक्ष जमिनीचा वहिवाटदार वेगवेगळे असू शकतात याची खात्री कारावी.
d) सातबारावरील नावे - सातबारावरील नावे ही विक्री करन-या व्यक्तीचिंच आहे का ते पहावे. त्यावर मयत व्यक्ती किवा जुना मालक इतर वारसांची नावे असल्यास ती काढून घेणे आवश्यक असते.
e) कर्जप्रकरण, नयालयीन खटला व भाडेपट्टा - जमिनीवर कोणत्याही बॅंक किवा संस्था यांच्या कर्जाचा बोजा नसल्याची खात्री करावी. तसेंच न्यायालायीन खटला चालू असल्यास संदर्भ तपासून पहावे.कोणतीही जमीन खरेदी करताना प्रथम वकिलाचा सल्ला घेणे आवश्यक आहे.
f) जमिनीची हद्द - जमिनीची हद्द नकाशा प्रमाणे मोजून तपासून घ्यावी.व लगतच्या जमीन मालकांची हरकत नसल्याची खात्री करावी.
g) इतर अधिकारांची नोंद - सातबारावर इतर अधिकारमध्ये नावे असतील तर आवश्यक ती माहिती करूं घेणे. किवा बक्षीसपत्राने मिळलेल्या जमिनींची विशेष काळजी घ्यावी.
h)बिनशेती करणे - शेतघर सोडून कोणत्याही कारणासाठी बांधकाम करावयाचे असल्यास बांधकामाच्या प्रकारा प्रमाणे बिनशेती करणे आवश्यक असते शहरात असल्यास तूं प्लानिंग प्रमाणे करवी.
i) संपादित जमिनी - सदर जमिनीमधून नियोजित महामार्ग, रेल्वे मार्ग, तलाव इ. नसल्याची खात्री करावी. याची सातबारावर नोंद पहावी. तसेच जमिनियाच्या बाजून रस्ता, नदी, महामार्ग, असेळ तर त्यापासूनचे योग्य अंतर सोडून पुरेशी जमीन असल्यास खरेदी करावी.
j) खरेदीखत - तालुक्यातील दुय्यम निबंधक कार्यालयामध्ये आवश्यक त्या कागदपत्रांची पूर्तता करून व आवश्यक शुल्क भरून खरेदीखत करावे.
योग्य कालावधी नंतर खरेदी केलेल्या जमिनिचा नकाशा व आपल्या नावे सातबारा खात्री करावी
a) जमिनी पर्यंतचा रस्ता - जमीन बिनशेती असल्यास जमिनी पर्यंतचा रस्ता नकाशामध्ये दाखवीलेला असतो परंतु जमीन बिनशेती नसल्यास व खाजगी रस्ता असल्यास रस्त्यासाठी दाखवीलेली जमीन व संबंधित मालक यांची हरकत नसल्याची खात्री करावी.
b) आरक्षीत जमिनी - शासनाने सदर सदर जमिनी मध्ये कोणत्याही करणासाठीचे आरक्षण उदा. हिरवा पट्टा पिवळा पट्टा इं. नसल्याची खात्री करावी.
c) वाहिवाटदार - सातबारावरील मुळ मालक व प्रत्यक्ष जमिनीचा वहिवाटदार वेगवेगळे असू शकतात याची खात्री कारावी.
d) सातबारावरील नावे - सातबारावरील नावे ही विक्री करन-या व्यक्तीचिंच आहे का ते पहावे. त्यावर मयत व्यक्ती किवा जुना मालक इतर वारसांची नावे असल्यास ती काढून घेणे आवश्यक असते.
e) कर्जप्रकरण, नयालयीन खटला व भाडेपट्टा - जमिनीवर कोणत्याही बॅंक किवा संस्था यांच्या कर्जाचा बोजा नसल्याची खात्री करावी. तसेंच न्यायालायीन खटला चालू असल्यास संदर्भ तपासून पहावे.कोणतीही जमीन खरेदी करताना प्रथम वकिलाचा सल्ला घेणे आवश्यक आहे.
f) जमिनीची हद्द - जमिनीची हद्द नकाशा प्रमाणे मोजून तपासून घ्यावी.व लगतच्या जमीन मालकांची हरकत नसल्याची खात्री करावी.
g) इतर अधिकारांची नोंद - सातबारावर इतर अधिकारमध्ये नावे असतील तर आवश्यक ती माहिती करूं घेणे. किवा बक्षीसपत्राने मिळलेल्या जमिनींची विशेष काळजी घ्यावी.
h)बिनशेती करणे - शेतघर सोडून कोणत्याही कारणासाठी बांधकाम करावयाचे असल्यास बांधकामाच्या प्रकारा प्रमाणे बिनशेती करणे आवश्यक असते शहरात असल्यास तूं प्लानिंग प्रमाणे करवी.
i) संपादित जमिनी - सदर जमिनीमधून नियोजित महामार्ग, रेल्वे मार्ग, तलाव इ. नसल्याची खात्री करावी. याची सातबारावर नोंद पहावी. तसेच जमिनियाच्या बाजून रस्ता, नदी, महामार्ग, असेळ तर त्यापासूनचे योग्य अंतर सोडून पुरेशी जमीन असल्यास खरेदी करावी.
j) खरेदीखत - तालुक्यातील दुय्यम निबंधक कार्यालयामध्ये आवश्यक त्या कागदपत्रांची पूर्तता करून व आवश्यक शुल्क भरून खरेदीखत करावे.
योग्य कालावधी नंतर खरेदी केलेल्या जमिनिचा नकाशा व आपल्या नावे सातबारा खात्री करावी
3) वेळोवेळी बदलणारे शासन नियम पडताळून पहावेत.
4) जमीन खरेदी देतांना:
जमिन मालकाने आर्थिक व्यवहार पूर्ण झाल्याशिवाय खरेदीखत करू नये. खरेदीखत करताना दिलेली जमीन व सातबारा यांची खात्री करावी.
जमिन मालकाने आर्थिक व्यवहार पूर्ण झाल्याशिवाय खरेदीखत करू नये. खरेदीखत करताना दिलेली जमीन व सातबारा यांची खात्री करावी.
====================================================
2.जमिनीचा सातबारा आपल्या नावे केव्हा होतो ?
2.जमिनीचा सातबारा आपल्या नावे केव्हा होतो ?
खरेदीखत जमीन विक्री केल्यानंतर होते. खरेदीखत झाल्यानंतर काही दिवसातच दुय्यम निबंधक कार्यालयातून अविवरण पत्रक
तहसीलदार कार्यालयात पाठविले जातात. त्यानंतर संबधित तलाठी कार्यालयात हे विवरण पत्रक पाठविले जातात.
त्यानंतर तलाठी सातबारावारील सर्वांना नोटीसा काढतात. नोटीस सही करून अल्यानंतर सातबारावरील जुनी नावे कमी होऊन
नवीन मालकाची नावे नोंदाविली जातात.
वर्ग २ च्या विक्रीची परवानगी
सातबारावर जमिनिचा प्रकार यामध्ये वर्ग १ असा उल्लेख असेल तर प्रांत अधिकारी यांची परवानगीची आवश्यकता नसते,.
परंतु वर्ग २ असे असल्यास परवानगीची आवश्यकता असते. कारण अशा जमिनी भोगवटदाराला केवळ कसण्याचा
अधिकार असतो विकण्याचा नसतो. सदर भोगवटदार हा या जमिनिचा कुळ म्हणून असतो हि जमीन कुळकायदयाने
मिळालेली असते थोडक्यात या जमिनी म्हणजे सरकारी मालमत्ता असतात.
अशा जमिनीच्या विक्रीच्या परवानगी साठी प्रांत ऑफिंस मध्ये खालीअल कागदपत्रांची पुर्तता करावी लागते.
१. जमिनीचा नवीन सातबारा
२. जमिनीवरील सर्व फेरफार
३. आठ अ
४. जमीनीचा नकाशा
५. अर्ज
अर्जासोबत सर्व कागदपत्रांच्या झेरॉक्स प्रती जोडून प्रांत ऑफिस मध्ये दाखल करावेत. सर्व कागदपत्रांची
छाननी करून एका महिन्यात प्रांत ऑफिसरच्या पर्वांगीची प्रत मिळते. मिळालेल्या परवनगी मध्ये फक्त सहा महिन्याचा
कलावधी असतो. सहा महिन्यात जमीन विक्री करावी लागते अथवा सहा महिन्यांनी हि परवानगी संपते.
बिनशेती (Non Agricultur)
कोणत्याहि जमिनी मध्ये घर बांधावयाचे झाल्यास ती जमीन प्रथम बिनशेती करावी लागते. शेत जमीन किवा इतर
कोणत्याही प्रकारच्य जमिनीमध्ये घर बांधता येंत नाही.
जर शेत घर बांधावयाचे असल्यास स्वतः शेतकरी असावे लागते. त्याचप्रमाणे आपल्या शेत जमिनी असाव्या लागतात
आणि ती शेती करावी लागते. आणि तसे पुरावे असावे लागतात.
जमीन बिनशेती करायची असल्यास पुढील कागदपत्रांची आवश्यकता असते.
१ जमिनीचा सातबारा
२ जमिनिचा नकाशा
३ टाउन प्लानिंगची परवानगी
४ अर्ज
सदर अर्जासोबत सर्व कागदपत्रे जोडून संबधित प्रांत अधिकारी कीवा तहसीलदार यांच्या कार्यालयात सदर करावे लागतात.
जमिनीच्या नकाशामध्ये लागून रस्ते असल्यास अडचण येंत नाही पण तसे नसेल तर घरापर्यंत जण्याकरीता रस्ता दाखवावा
लगतो. म्हणजेच सदर जमनीपर्यंत जाण्यासाठी रस्त्यासाठी जमीन विकत घ्यवी लागते.
तहसीलदार कार्यालयात पाठविले जातात. त्यानंतर संबधित तलाठी कार्यालयात हे विवरण पत्रक पाठविले जातात.
त्यानंतर तलाठी सातबारावारील सर्वांना नोटीसा काढतात. नोटीस सही करून अल्यानंतर सातबारावरील जुनी नावे कमी होऊन
नवीन मालकाची नावे नोंदाविली जातात.
वर्ग २ च्या विक्रीची परवानगी
सातबारावर जमिनिचा प्रकार यामध्ये वर्ग १ असा उल्लेख असेल तर प्रांत अधिकारी यांची परवानगीची आवश्यकता नसते,.
परंतु वर्ग २ असे असल्यास परवानगीची आवश्यकता असते. कारण अशा जमिनी भोगवटदाराला केवळ कसण्याचा
अधिकार असतो विकण्याचा नसतो. सदर भोगवटदार हा या जमिनिचा कुळ म्हणून असतो हि जमीन कुळकायदयाने
मिळालेली असते थोडक्यात या जमिनी म्हणजे सरकारी मालमत्ता असतात.
अशा जमिनीच्या विक्रीच्या परवानगी साठी प्रांत ऑफिंस मध्ये खालीअल कागदपत्रांची पुर्तता करावी लागते.
१. जमिनीचा नवीन सातबारा
२. जमिनीवरील सर्व फेरफार
३. आठ अ
४. जमीनीचा नकाशा
५. अर्ज
अर्जासोबत सर्व कागदपत्रांच्या झेरॉक्स प्रती जोडून प्रांत ऑफिस मध्ये दाखल करावेत. सर्व कागदपत्रांची
छाननी करून एका महिन्यात प्रांत ऑफिसरच्या पर्वांगीची प्रत मिळते. मिळालेल्या परवनगी मध्ये फक्त सहा महिन्याचा
कलावधी असतो. सहा महिन्यात जमीन विक्री करावी लागते अथवा सहा महिन्यांनी हि परवानगी संपते.
बिनशेती (Non Agricultur)
कोणत्याहि जमिनी मध्ये घर बांधावयाचे झाल्यास ती जमीन प्रथम बिनशेती करावी लागते. शेत जमीन किवा इतर
कोणत्याही प्रकारच्य जमिनीमध्ये घर बांधता येंत नाही.
जर शेत घर बांधावयाचे असल्यास स्वतः शेतकरी असावे लागते. त्याचप्रमाणे आपल्या शेत जमिनी असाव्या लागतात
आणि ती शेती करावी लागते. आणि तसे पुरावे असावे लागतात.
जमीन बिनशेती करायची असल्यास पुढील कागदपत्रांची आवश्यकता असते.
१ जमिनीचा सातबारा
२ जमिनिचा नकाशा
३ टाउन प्लानिंगची परवानगी
४ अर्ज
सदर अर्जासोबत सर्व कागदपत्रे जोडून संबधित प्रांत अधिकारी कीवा तहसीलदार यांच्या कार्यालयात सदर करावे लागतात.
जमिनीच्या नकाशामध्ये लागून रस्ते असल्यास अडचण येंत नाही पण तसे नसेल तर घरापर्यंत जण्याकरीता रस्ता दाखवावा
लगतो. म्हणजेच सदर जमनीपर्यंत जाण्यासाठी रस्त्यासाठी जमीन विकत घ्यवी लागते.
खरेदीखत कसे करावे;
खरेदीखत म्हणजे जमिनीचा व्यवहार पूर्ण केल्याच पुरावा असतो.
खरेदिखत करण्यापूर्वी जमीन खरेदी करणार्याने जमीन मालकाला ठरलेल्या व्यवहाराप्रमाणे सर्व रक्कम पूर्ण करायची असते.
जर सर्व रक्कम पूर्ण झाली नसेल तर खरेदीखत करू नये. कारण एकदा खरेदीखत झाले की नंतर जमीन मालक हा त्या
जमिनीवरचा मालकी हक्क काढून घेत असतो. आणि खरेदीखत सहजासहजी रद्द होत नाही. रद्द करण्याचा अधिकार फक्त
सर्वोच्च न्यायालयाला असतो. पण तसे मोठे पुरावे असावे लागतात. खरेदीखताची नोंदणी संबंधित दुय्यम निबंधक कर्यालयात
झाल्यानंतर काही दिवसातच सातबारा नवीन मालकाच्या नावे होतो.
खरेदीखत करण्यासाठी ज्या गावातील जमीन असेल त्या संबधित दुय्यम निबंधक कार्याकायात जाऊन बाजारभावे आणि आपपसातील
ठरलेल्या रक्कमेवर मुल्यांकन करून मुद्रांकशुल्क काढून घ्यावे.
जमिनीचे मुल्यांकन हे जमिनीच्या प्रकाराप्रमाणे ठरलेले असते. आणि त्याचे सर्व दरपत्रक (रेडीरेकनर) त्या त्या तालुक्याच्या
दुय्यम निबंधक अधिकारी यांच्या कार्यालयात उपलब्ध असतात. आणि मुल्यांकन काढून देण्याचे काम हे दुय्यम निबंधाकाचेच असते.
यामध्ये जमिनीची सरकारी किंमत आणि प्रत्यक्ष जमीन मालक व खरेदीदार यांच्यातील ठरलेल्या व्यवहारावर जी रक्कम जास्त
असते त्यावर मुल्यांकन करून जास्त मुद्रांकशुल्क गृहीत धरला जातो.
खरेदीखत म्हणजे जमिनीचा व्यवहार पूर्ण केल्याच पुरावा असतो.
खरेदिखत करण्यापूर्वी जमीन खरेदी करणार्याने जमीन मालकाला ठरलेल्या व्यवहाराप्रमाणे सर्व रक्कम पूर्ण करायची असते.
जर सर्व रक्कम पूर्ण झाली नसेल तर खरेदीखत करू नये. कारण एकदा खरेदीखत झाले की नंतर जमीन मालक हा त्या
जमिनीवरचा मालकी हक्क काढून घेत असतो. आणि खरेदीखत सहजासहजी रद्द होत नाही. रद्द करण्याचा अधिकार फक्त
सर्वोच्च न्यायालयाला असतो. पण तसे मोठे पुरावे असावे लागतात. खरेदीखताची नोंदणी संबंधित दुय्यम निबंधक कर्यालयात
झाल्यानंतर काही दिवसातच सातबारा नवीन मालकाच्या नावे होतो.
खरेदीखत करण्यासाठी ज्या गावातील जमीन असेल त्या संबधित दुय्यम निबंधक कार्याकायात जाऊन बाजारभावे आणि आपपसातील
ठरलेल्या रक्कमेवर मुल्यांकन करून मुद्रांकशुल्क काढून घ्यावे.
जमिनीचे मुल्यांकन हे जमिनीच्या प्रकाराप्रमाणे ठरलेले असते. आणि त्याचे सर्व दरपत्रक (रेडीरेकनर) त्या त्या तालुक्याच्या
दुय्यम निबंधक अधिकारी यांच्या कार्यालयात उपलब्ध असतात. आणि मुल्यांकन काढून देण्याचे काम हे दुय्यम निबंधाकाचेच असते.
यामध्ये जमिनीची सरकारी किंमत आणि प्रत्यक्ष जमीन मालक व खरेदीदार यांच्यातील ठरलेल्या व्यवहारावर जी रक्कम जास्त
असते त्यावर मुल्यांकन करून जास्त मुद्रांकशुल्क गृहीत धरला जातो.
मुद्रांकशुल्क काढून झाल्यावर दु.नि. हे खरेदीखत दस्तऐवजासाठी लागणारे नोंदणीशुल्क व कागदपत्रे व इतर कार्यालयीन खर्चाची माहिती देतात.
हि सर्व माहिती घेऊन दु. नि. यांनी ठरवून दिलेल्या मुद्रांकशुल्कावर आवश्यक ती माहिती लिहून उदा. सर्वे नं. जमिनीचे क्षेत्र,
जमिनीचा प्रकार, जमीन मालकांची नावे, जमीन खरेदी करण-याचे प्रयोजन त्याचप्रमाणे जमीन विकण्याचे प्रयोजन नमूद करावे लागते.
तसेच लागणारी सर्व कागदपत्रे जोडून खरेदीखत तयार करावे. यासोबत संगणकावर डाटाएंट्री करण्यसाठी लागणारा input भरून
दुय्यम निबंधक कार्यालयात दस्त नोंदणीसाठी सदर करावा.
हि सर्व माहिती घेऊन दु. नि. यांनी ठरवून दिलेल्या मुद्रांकशुल्कावर आवश्यक ती माहिती लिहून उदा. सर्वे नं. जमिनीचे क्षेत्र,
जमिनीचा प्रकार, जमीन मालकांची नावे, जमीन खरेदी करण-याचे प्रयोजन त्याचप्रमाणे जमीन विकण्याचे प्रयोजन नमूद करावे लागते.
तसेच लागणारी सर्व कागदपत्रे जोडून खरेदीखत तयार करावे. यासोबत संगणकावर डाटाएंट्री करण्यसाठी लागणारा input भरून
दुय्यम निबंधक कार्यालयात दस्त नोंदणीसाठी सदर करावा.
खरेदीखतासाठी लागणारी कागदपत्रे --
१) सातबारा
२) मुद्रांकशुल्क
३) आवश्यक असल्यास फेरफार
४) आठ अ
५) मुद्रांक शुल्काची पावती
६) दोन ओळखीच्या व्यक्ती, त्यांचे फोटो प्रुफ
७) आवश्यक असल्यास प्रतिज्ञापत्र
८) N A order ची प्रत
९) विक्री परवानगीची प्रत
====================================================
3. व्यावहारिक जगात लागणारे काही महत्वाची #जमिनीची_क्षेत्रफळाची रुपांतरे ;
१) सातबारा
२) मुद्रांकशुल्क
३) आवश्यक असल्यास फेरफार
४) आठ अ
५) मुद्रांक शुल्काची पावती
६) दोन ओळखीच्या व्यक्ती, त्यांचे फोटो प्रुफ
७) आवश्यक असल्यास प्रतिज्ञापत्र
८) N A order ची प्रत
९) विक्री परवानगीची प्रत
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3. व्यावहारिक जगात लागणारे काही महत्वाची #जमिनीची_क्षेत्रफळाची रुपांतरे ;
१ हेक्टर = १०००० चौ. मी .
१ एकर = ४० गुंठे
१ गुंठा = [३३ फुट x ३३ फुट ] = १०८९ चौ फुट
१ हेक्टर= २.४७ एकर = २.४७ x ४० = ९८.८ गुंठे
१ आर = १ गुंठा
१ हेक्टर = १०० आर
१ एकर = ४० गुंठे x [३३ x ३३] = ४३५६० चौ फुट
१ चौ. मी . = १०.७६ चौ फुट
७/१२ वाचन करते वेळी पोट खराबी हे वाक्य असत—त्याचा अर्थ पिक लागवडी साठी योग्य नसलेले क्षेत्र —परंतु ते मालकी हक्कात मात्र येत!!!!!
नमुना नंबर ८ म्हणजे एकूण जमिनीचा दाखला या मध्ये अर्जदाराच्या नावावर असलेली त्या विभागातील [तलाठी सज्जा] मधील जमिनीचे एकूण क्षेत्र याची यादी असते!!!!
जमिनी ची ओळख हि त्याच्या तलाठी यांनी प्रमाणित केलेली आणि जागेशी सुसंगत असलेल्या चतुर्सिमा ठरवितात!!!!
१ एकर = ४० गुंठे
१ गुंठा = [३३ फुट x ३३ फुट ] = १०८९ चौ फुट
१ हेक्टर= २.४७ एकर = २.४७ x ४० = ९८.८ गुंठे
१ आर = १ गुंठा
१ हेक्टर = १०० आर
१ एकर = ४० गुंठे x [३३ x ३३] = ४३५६० चौ फुट
१ चौ. मी . = १०.७६ चौ फुट
७/१२ वाचन करते वेळी पोट खराबी हे वाक्य असत—त्याचा अर्थ पिक लागवडी साठी योग्य नसलेले क्षेत्र —परंतु ते मालकी हक्कात मात्र येत!!!!!
नमुना नंबर ८ म्हणजे एकूण जमिनीचा दाखला या मध्ये अर्जदाराच्या नावावर असलेली त्या विभागातील [तलाठी सज्जा] मधील जमिनीचे एकूण क्षेत्र याची यादी असते!!!!
जमिनी ची ओळख हि त्याच्या तलाठी यांनी प्रमाणित केलेली आणि जागेशी सुसंगत असलेल्या चतुर्सिमा ठरवितात!!!!
Wednesday, July 22, 2015
असे मी फसलो
दगडात भावना नसतानाही
त्याला देव समजून बसलो !!
स्मशानात नव्हते काही
तेथे भूत समजून बसलो !!
कान फुंकुणी मारी मंतर
त्याला डॉक्टर समजून बसलो !!
केस सोडून झूले बाई
तिला देवी समजून बसलो !!
देव कोपेल माझ्यावर म्हणून
भटजीच्या हातून पूजा शांती करून बसलो !!
होते नव्हते सारे काही
त्याच्या चरणी ठेऊन बसलो !!
होते सारे काही तरीही
देव्हारयात आणखी मागत बसलो !!
या अंधश्रध्दे मुळे असे मी फसलो !!
असे मी फसलो
त्याला देव समजून बसलो !!
स्मशानात नव्हते काही
तेथे भूत समजून बसलो !!
कान फुंकुणी मारी मंतर
त्याला डॉक्टर समजून बसलो !!
केस सोडून झूले बाई
तिला देवी समजून बसलो !!
देव कोपेल माझ्यावर म्हणून
भटजीच्या हातून पूजा शांती करून बसलो !!
होते नव्हते सारे काही
त्याच्या चरणी ठेऊन बसलो !!
होते सारे काही तरीही
देव्हारयात आणखी मागत बसलो !!
या अंधश्रध्दे मुळे असे मी फसलो !!
असे मी फसलो
Sunday, July 12, 2015
समझदार लोग जानते थे की ब्राह्मणवाद खतरनाक है पर राजदंड और राजभय के चलते सब ख़ामोशी से इस जहर को पीते रहते थे| इसे एक व्यंग कथा से समझते हैं
बात बहुत पुरानी है एक राजा था वह बहुत ही अंधविश्वासी और धार्मिक था उसने अपने पुरोहितों से कहा की मुझे देवताओं की पोशाक पहननी है उन्होंने राजा से कहा की देवताओं के पोशाक के लिए एक विशेष पूजा करवानी होगी तब हमें उनकी पोषक मिलेगी !
पूजा कई दिनों चली अंततः वह दिन आया जब उन्हें पोशाक हासिल होनी थी पुरोहितों ने राजा से कहा महाराज पोशाक इस बंद संदूक के अंदर आ चुकी है आप खोल कर इसे पहन लीजिये लेकिन इसके साथ शर्त यह है की पोशाक उसी को दिखेगी जो अपने पिता की वैध संतान होगा !
राजा ने बड़ी उत्सुकता से दरबार के सामने बक्सा खोला ही था की पुरोहित बोल पड़े वाह क्या लिबास हैं लेकिन राजा ने बक्से में देखा तो वो खाली था अब राजा को अपने वैध होने पर संदेह हो गया उसने दरबार के सामने अपनी इज्जत बचाने के लिए पुरोहितों का समर्थन किया कहा वाह जैसा सोचा था ये वस्त्र तो उससे भी बढ़ कर है महामंत्री को भी बक्सा खाली दिखा लेकिन उसे भी हरामी थोड़े ही बनना था उसने भी राजा की बात को दोहरा दिया !
अब बारी थी उन वस्त्रों को पहनने की पुरोहितों के कहने पर राजा ने अपने सारे वस्त्र उतार दिए और देवताओं का वस्त्र धारण किया जो असल में कुछ था ही नहीं अब राजा पूरे दरबार में निवस्त्र खड़ा था और पूरा दरबार उसके उन वस्त्रों की तारीफों के पुल बांध रहा था जो असल में कुछ था ही नहीं !
अब पुरोहितों ने कहा महाराज पूरा नगर आपके वस्त्रों को देखने की उत्सुकता में खड़ा है एक बार उन्हें भी इन वस्त्रो के दिव्य दर्शन करवा दीजिये
अब राजा हाथी पर सवार होकर नगर भ्रमण को निकले पूरे नगर वासियों ने भी पुरोहितों की शर्त सुन रखी थी उन्हें भी वस्त्र वैसे ही दिखा जैसे राजा और मंत्रियों को दिखा था महान राजा की जय जय कार से पूरा शहर गूंज उठा !
एक बच्चा जो अपने पिता के कंधो पर सवार होकर यह तमाशा देखने आया था उसने बड़े मासूमियत से अपने पिता से कहा राजा तो नंगे है आप तो कह रहे थे वे देवताओ के वस्त्र पहन कर आएंगे ?
इतना सुनते ही उस व्यक्ति ने उस बच्चे को कंधे से उतार दिया और उसकी माँ की तरफ घूर कर देखा और कहा अभी घर चल…….
देवताओं के उन वस्त्रों के रूप में हमारी मान्यताये धर्म और संस्कृति हैं और उस बच्चे के रूप में हम सभी नास्तिक लोग ….
Wednesday, June 24, 2015
प्रसुती - सिजेरिअन योग्य की अयोग्य -

प्रसुती - सिजेरिअन योग्य की अयोग्य -
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काळजीपोटी निर्णयाची घाई न केलेलीच बरी!
सिझेरिअन’ हा शब्द आता सर्रास कानावर येतो.
कुणी प्रसूत झाली असं कळलं की, लोक हमखास प्रश्न विचारतात, सिझर की नॉर्मल?
कुणी प्रसूत झाली असं कळलं की, लोक हमखास प्रश्न विचारतात, सिझर की नॉर्मल?
सिझर हेच उत्तर सर्रास कानावर येतं. पुढे पालूपदही जोडलं जातं की, आता तर काय सिझर नॉर्मल झालेत!
पण खरंच हे सिङोरिअन करणं म्हणजे गरोदर स्त्रीच्या पोटावर आणि गर्भाशयावर छेद घेऊन बाळ बाहेर काढण्याची शस्त्रक्रिया इतकी सर्रास करण्यासारखी गोष्ट आहे का?
या शस्त्रक्रियेचा प्रचार साधारण: 6क्-7क् वर्षापूर्वी प्रतिजैविकांचा शोध लागल्यानंतर झाला. आज मात्र इतक्या मोठय़ा प्रमाणात आणि बेजबाबदारपणो ही शस्त्रक्रिया जगभर केली जात आहे.
खरंतर गरोदरपण आणि प्रसूती या स्त्रीच्या आयुष्यात घडणा:या नैसर्गिक घटना आहेत. गरोदरपण आणि प्रसूती हे काही आजार नाहीत. शुक्राणू आणि स्त्रीबीज यांच्या समन्वयापासून ते अडीच-तीन किलोचा पूर्ण वाढ झालेला हाडामासाचा जीव तयार होण्याची ही प्रक्रिया आणि त्या बाळाचा योनीमार्गातून बाहेर पडण्याचा पहिला प्रवास या दोन्ही गोष्टी अतिशय गुंतागुंतीच्या आणि किचकट प्रक्रिया असल्या तरी परमेश्वराने त्या अतिशय सहज आणि सोप्या करून ठेवल्या आहेत.
त्यामुळेच, शंभर गरोदर स्त्रियांपैकी पंचाण्णव स्त्रियांची प्रसूती ही नैसर्गिकरीत्या, कोणत्याही अडथळ्याशिवाय आणि कोणाच्याही मदतीशिवाय होत असते. फक्त 5 टक्के स्त्रियांची प्रसूती ही अवघड असते; या पाचपैकी 4 टक्के स्त्रियांना प्रशिक्षित परिचारिका अथवा तज्ज्ञ डॉक्टरांच्या मदतीची गरज भासते. फक्त 1 टक्का स्त्रियांची प्रसूती नैसर्गिकरीत्या होणं अशक्य असतं. अशा स्त्रियांचा आणि त्यांच्या पोटातील बाळाचा जीव वाचविण्यासाठी सिङोरिअन शस्त्रक्रियेची गरज भासते. प्रत्यक्षात आज काय परिस्थिती आहे? आज मोठय़ा शहरांमध्ये 50 टक्यांपेक्षा जास्त प्रसुती सिङोरिअन शस्त्रक्रियेद्वारा केल्या जातात. तालुक्याचा ठिकाणी हे प्रमाण थोडं कमी, म्हणजे 30 ते 40 टक्के आहे. पण दोन्ही ठिकाणी इतक्या झपाटय़ाने ही टक्केवारी वाढते आहे की काही वर्षानंतर नैसर्गिक प्रसूती ही वर्तमान पत्रतील चार कलमी ठळक बातमी ठरावी किंवा वैद्यकीय विद्याथ्र्याना शिकविण्यासाठी तयार केलेला दुर्मीळ व्हिडीओ म्हणून त्याचा विचार व्हावा.
अगदी साधी गोष्ट आहे. सिङोरिअन शस्त्रक्रियेचे बिल नैसर्गिक प्रसूतीच्या बिलापेक्षा किमान पाच ते दहा पटींनी जास्त असते. आज पैसा कुणाला नको आहे? नैसर्गिक प्रसूतीसाठी डॉक्टर आणि पेशंट दोघांना वाट पहावी लागते; स्त्रीला कळा सोसाव्या लागतात; डॉक्टरांना डोक्यावर बर्फ आणि तोंडात साखर ठेऊन प्रसूतीच्या प्रत्येक टप्प्याचे निरीक्षण करावे लागते, ते नोंदवून ठेवावे लागते. एवढे करूनही आई किंवा बाळाच्या बाबतीत जर चुकून काही अपघात झालाच, तर डॉक्टरला मारहाण, हॉस्पिटलवर दगडफेक, वर्तमानपत्रत बदनामीकारक बातमी, वर्षानुवर्षे ग्राहक कोर्टात आणि फौजदारी कोर्टात चालणारे खटले हे शुक्लकाष्ठ मागे लागते.
या उलट सिझर करणं अतिशय सोपं. बधिरीकरण (भूल) शास्त्रत झालेल्या प्रगतीमुळे, महागडय़ा परंतु परिणामकारक प्रतिजैविकांमुळे, भूलतज्ज्ञ डॉक्टरांच्या उपस्थितीमुळे, रक्तपेढय़ांच्या जाळ्यामुळे सिङोरिअन शस्त्रक्रिया पूर्वीपेक्षा खूप सोपी आणि निर्धोक झाली आहे. या शस्त्रक्रियेमुळे रुग्ण दगावण्याची शक्यता नगण्य, म्हणजे लाखात एक इतके कमी झाले आहे.
त्यामुळे ना डॉक्टरांची रिस्क घेण्याची तयारी आहे ना, पालकांची!
अगदी साधी गोष्ट आहे. सिङोरिअन शस्त्रक्रियेचे बिल नैसर्गिक प्रसूतीच्या बिलापेक्षा किमान पाच ते दहा पटींनी जास्त असते. आज पैसा कुणाला नको आहे? नैसर्गिक प्रसूतीसाठी डॉक्टर आणि पेशंट दोघांना वाट पहावी लागते; स्त्रीला कळा सोसाव्या लागतात; डॉक्टरांना डोक्यावर बर्फ आणि तोंडात साखर ठेऊन प्रसूतीच्या प्रत्येक टप्प्याचे निरीक्षण करावे लागते, ते नोंदवून ठेवावे लागते. एवढे करूनही आई किंवा बाळाच्या बाबतीत जर चुकून काही अपघात झालाच, तर डॉक्टरला मारहाण, हॉस्पिटलवर दगडफेक, वर्तमानपत्रत बदनामीकारक बातमी, वर्षानुवर्षे ग्राहक कोर्टात आणि फौजदारी कोर्टात चालणारे खटले हे शुक्लकाष्ठ मागे लागते.
या उलट सिझर करणं अतिशय सोपं. बधिरीकरण (भूल) शास्त्रत झालेल्या प्रगतीमुळे, महागडय़ा परंतु परिणामकारक प्रतिजैविकांमुळे, भूलतज्ज्ञ डॉक्टरांच्या उपस्थितीमुळे, रक्तपेढय़ांच्या जाळ्यामुळे सिङोरिअन शस्त्रक्रिया पूर्वीपेक्षा खूप सोपी आणि निर्धोक झाली आहे. या शस्त्रक्रियेमुळे रुग्ण दगावण्याची शक्यता नगण्य, म्हणजे लाखात एक इतके कमी झाले आहे.
त्यामुळे ना डॉक्टरांची रिस्क घेण्याची तयारी आहे ना, पालकांची!
मात्र नैसर्गिक प्रसूतीचे रूपांतर सिङोरिअनमध्ये करण्याचा डॉक्टरांचा निर्णय 9क् टक्के वेळा चुकीच्या गृहितकावर आधारलेला असतो. बाळाच्या आणि आईच्या जिवाची भीती घातली, की आधीच धास्तावलेले नातेवाइक लगेचच ऑपरेशनला परवानगी देतील, अशी डॉक्टरांना खात्री असते. कळांनी अर्धमेली झालेली पेशंट नातेवाइक ऐनवेळी कोठे घेऊन जाणार? आणि अशी ऐनवेळी आलेली पेशंट प्रसूतीसाठी घेण्याची पद्धत आजकाल शहरात काय, पण खेडय़ातसुद्धा नाही.
प्रसूतीसाठी सिङोरिअनचे वाढते प्रमाण रोखण्यासाठी काय उपाय योजना करता येतील, याविषयी आज जगभर विविध पातळ्यांवर चर्चा सुरू आहे. तथापि, नैसर्गिक प्रसूतीचे सिझरमध्ये रूपांतर करण्याचा निर्णय हा पूर्णपणो संबंधित स्त्रीच्या बाळंतपणात काळजी घेणा:या डॉक्टरांचा आणि ऐनवेळी घेतला जाणारा निर्णय असल्याने आणि हा निर्णय आई आणि बाळाचे प्राण वाचविण्यासाठी घेतला जात असल्याने कोणत्याही पातळीवर या निर्णयाला आव्हान देणं अशक्य आहे. शासकीय आणि खाजगी रुग्णालयातील प्रत्येक सिझरचे ऑडिट करण्याचा प्रस्तावही मध्यंतरी विचाराधीन होता; पण संबंधित डॉक्टरांच्याच विरोधाने तो बारगळला.
नैसर्गिक प्रसूतीची वाट पाहणारे, सिङोरिअनचा पर्याय टाळण्याचा प्रामाणिक प्रयत्न करणारे डॉक्टर्स आज खूप कमी आहेत हे वास्तव आहेत.
प्रसूतीसाठी सिङोरिअनचे वाढते प्रमाण रोखण्यासाठी काय उपाय योजना करता येतील, याविषयी आज जगभर विविध पातळ्यांवर चर्चा सुरू आहे. तथापि, नैसर्गिक प्रसूतीचे सिझरमध्ये रूपांतर करण्याचा निर्णय हा पूर्णपणो संबंधित स्त्रीच्या बाळंतपणात काळजी घेणा:या डॉक्टरांचा आणि ऐनवेळी घेतला जाणारा निर्णय असल्याने आणि हा निर्णय आई आणि बाळाचे प्राण वाचविण्यासाठी घेतला जात असल्याने कोणत्याही पातळीवर या निर्णयाला आव्हान देणं अशक्य आहे. शासकीय आणि खाजगी रुग्णालयातील प्रत्येक सिझरचे ऑडिट करण्याचा प्रस्तावही मध्यंतरी विचाराधीन होता; पण संबंधित डॉक्टरांच्याच विरोधाने तो बारगळला.
नैसर्गिक प्रसूतीची वाट पाहणारे, सिङोरिअनचा पर्याय टाळण्याचा प्रामाणिक प्रयत्न करणारे डॉक्टर्स आज खूप कमी आहेत हे वास्तव आहेत.
वाट पाहणो, ही प्रसूतीशास्त्रतील एक सुंदर कला आहे. इंग्रजीत तिला Masterly Inactivityअसं नाव आहे. जरूर ती सर्व काळजी घेऊन, जरूर ती सर्व निरीक्षणं नोंदवून आणि जरूर त्या सर्व तपासण्या करून, नंतर निसर्गाला आपलं काम करू देण्यासाठी शांतपणे वाट पहायची. ही कला आत्मसात करणं वाटतं तितकं सोपं जरी नसलं तरी फार अवघड आणि अशक्यही नाही. अतिशय अवघड परिस्थितीत, सर्व अडथळ्यांवर मात करून, नैसर्गिक प्रसूती करण्यात जो आनंद आणि समाधान डॉक्टर आणि पेशंटला मिळतं ते सिङोरिअन चोपून मिळणारा पैसा आणि समाधानापेक्षा खुप उच्च प्रतीचं असतं, हे मी गेल्या पस्तीस वर्षात खूपदा अनुभवलेलं आहे.
सिङोरिअन करण्याआधी किती वाट पहावी, याबाबतचा इ.स. 1500सालातील एक किस्सा शेवटी सांगतो. ही घटना स्वित्झर्रलडमधील आहे. त्या काळी सिङोरिअन शस्त्रक्रिया जिवंत स्त्रीवर करण्यास कायद्याने बंदी होती. गरोदर स्त्रीचा अकस्मात इतर काही कारणाने अपघाती मृत्यू ओढवला, तर बाळाला वाचविण्यासाठी मयत स्त्रीचे पोट कापून बाळ बाहेर काढले जाई. जेकॉब न्यूफर नावाच्या इसमाने आपल्या पत्नीचे सिङोरिअन ऑपरेशन करण्याची परवानगी स्थानिक प्रशासनाकडे मागितली. सदर स्त्री सहा दिवस प्रसूतीच्या कळा देत होती आणि तेरा परिचारिकांनी तिची प्रसूती करण्याचा अयशस्वी प्रयत्न केला होता. सहा दिवस वाट पाहूनही प्रसूती होईना, म्हणून अखेर सिङोरिअन ऑपरेशनची परवानगी प्रचंड वादावादीनंतर देण्यात आली. ऑपरेशननंतर बाळबाळंतीण सुखरूप असल्याची दुर्मीळ घटना घडली. त्या स्त्रीने नंतर पाच मुलांना नैसर्गिकरीत्या जन्म दिला. त्यातील एक जुळे होते. सिङोरिअनने जन्माला आलेली मुलगी पुढे 77 वर्षे जगली आणि भरपूर म्हातारी होऊन मेली.
तुम्ही न्यूपरइतकी वाट पाहू नका; पण थोडी तरी वाट पहायला काय हरकत आहे?
तुम्ही न्यूपरइतकी वाट पाहू नका; पण थोडी तरी वाट पहायला काय हरकत आहे?
सिझर करण्यासाठी सांगितली जाणारी ४ कारणं.
१.बाळाच्या गळ्याला नाळेचे वेढे आहेत.
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सिझर करायला हवं ‘‘बाळाच्या गळ्यात नाळेचे वेढे आहेत’’ असं डॉक्टर अनेकदा सांगतात. आणि सिझर करायला चटकन राजी होतात. पण हे खरं नव्हे. पोटातील बाळाला प्राणवायूचा आणि अन्नद्रव्यांचा पुरवठा नाळेवाटे होत असतो. गर्भातील बाळाची फुफ्फुसे तयार झालेली नसतात (जन्मल्यावर बाळ पहिल्यांदा श्वास घेते, तेव्हाच फुफ्फुसाचे कार्य सुरू होते). त्यामुळे नाळेचे हजार वेढे जरी बाळाच्या मानेभोवती पडले, तरी नाळेतून होणारा रक्तपुरवठा कायम असल्याने बाळाला काहीही त्रस होण्याचा प्रश्नच नसतो. वस्तुत: गर्भाशयातील पाण्याच्या डोहात मनसोक्त फिरत असताना बाळाच्या मानेभोवती नाळेचे वेढे पडणं, ही पूर्णपणो नैसर्गिक क्रिया आहे. नैसर्गिक प्रसूती होताना हे वेढे प्रसूतीसमयी जवळ असलेल्या डॉक्टर अथवा परिचारिकेला नेहमीच दिसत असतात आणि बाळाला त्यामुळे कधीही काहीही त्रस होत नाही.
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सिझर करायला हवं ‘‘बाळाच्या गळ्यात नाळेचे वेढे आहेत’’ असं डॉक्टर अनेकदा सांगतात. आणि सिझर करायला चटकन राजी होतात. पण हे खरं नव्हे. पोटातील बाळाला प्राणवायूचा आणि अन्नद्रव्यांचा पुरवठा नाळेवाटे होत असतो. गर्भातील बाळाची फुफ्फुसे तयार झालेली नसतात (जन्मल्यावर बाळ पहिल्यांदा श्वास घेते, तेव्हाच फुफ्फुसाचे कार्य सुरू होते). त्यामुळे नाळेचे हजार वेढे जरी बाळाच्या मानेभोवती पडले, तरी नाळेतून होणारा रक्तपुरवठा कायम असल्याने बाळाला काहीही त्रस होण्याचा प्रश्नच नसतो. वस्तुत: गर्भाशयातील पाण्याच्या डोहात मनसोक्त फिरत असताना बाळाच्या मानेभोवती नाळेचे वेढे पडणं, ही पूर्णपणो नैसर्गिक क्रिया आहे. नैसर्गिक प्रसूती होताना हे वेढे प्रसूतीसमयी जवळ असलेल्या डॉक्टर अथवा परिचारिकेला नेहमीच दिसत असतात आणि बाळाला त्यामुळे कधीही काहीही त्रस होत नाही.
२.गर्भाशयातील पाणी कमी झालंय.
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गर्भाशयातील पाणी कमी होतंय आणि बाळ कोरडं पडतंय हे सिझरचं दुसरं कारण. हे कारण सुद्धा पहिल्या कारणाइतकंच तकलादू आहे. गरोदरपणातील नऊ महिन्यांपैकी पहिल्या सात महिन्यात बाळाची वाढ कमी आणि पाण्याची वाढ जास्त असते. या उलट सातव्या महिन्यानंतर गर्भाशयात बाळ वेगाने वाढू लागतं आणि पाणी त्याप्रमाणात कमी होऊ लागतं. याचाच साधा अर्थ असा की, गर्भाशयातील पाणी कमी होण्याची प्रक्रिया प्रसूतीच्या दोन महिने अगोदर सुरू झालेली असते. बरेचदा, प्रसूतीच्या कळा सुरू होण्यापूर्वी पाणमूठ फुटून गर्भाशयातील बरंच पाणी निघून जातं आणि त्यानंतर 24 तासात नैसर्गिक कळा सुरू होतात. काही वेळा, दिवस उलटून गेल्यावर कळा सुरू करण्यापूर्वी पाणमूठ फोडणं हा पूर्वापार चालत आलेला उपाय आहे. यात अनैसर्गिक असं काहीही नाही. बाळ कोरडं पडेल, हे डॉक्टरांच्या अचाट कल्पनाशक्तीचे उदाहरण आहे. या व्यतिरिक्त त्या विधानाला काहीही अर्थ नाही.
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गर्भाशयातील पाणी कमी होतंय आणि बाळ कोरडं पडतंय हे सिझरचं दुसरं कारण. हे कारण सुद्धा पहिल्या कारणाइतकंच तकलादू आहे. गरोदरपणातील नऊ महिन्यांपैकी पहिल्या सात महिन्यात बाळाची वाढ कमी आणि पाण्याची वाढ जास्त असते. या उलट सातव्या महिन्यानंतर गर्भाशयात बाळ वेगाने वाढू लागतं आणि पाणी त्याप्रमाणात कमी होऊ लागतं. याचाच साधा अर्थ असा की, गर्भाशयातील पाणी कमी होण्याची प्रक्रिया प्रसूतीच्या दोन महिने अगोदर सुरू झालेली असते. बरेचदा, प्रसूतीच्या कळा सुरू होण्यापूर्वी पाणमूठ फुटून गर्भाशयातील बरंच पाणी निघून जातं आणि त्यानंतर 24 तासात नैसर्गिक कळा सुरू होतात. काही वेळा, दिवस उलटून गेल्यावर कळा सुरू करण्यापूर्वी पाणमूठ फोडणं हा पूर्वापार चालत आलेला उपाय आहे. यात अनैसर्गिक असं काहीही नाही. बाळ कोरडं पडेल, हे डॉक्टरांच्या अचाट कल्पनाशक्तीचे उदाहरण आहे. या व्यतिरिक्त त्या विधानाला काहीही अर्थ नाही.
३.बाळानं पोटात शी केली.
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प्रसूतीची प्रत्येक कळ बाळाला गर्भाशयातून खाली ढकलण्यासाठी आणि गर्भाशयाचे तोंड उघडण्यासाठी असते. बाळाच्या पोटावर या क्रियेने दाब पडला, की बाळाला शी होणं ही अशीच नैसर्गिक क्रिया आहे. उलट अशी शी होणो, हे बाळाचे गुदद्वार आणि आतडी पूर्णपणो विकसित आणि नॉर्मल असल्याचे लक्षण आहे. ही विष्ठा जंतु विरहित असते. त्यामुळे बाळाने अशी शी गिळली, तरीही त्याला या शी पासून काहीही धोका नसतो. बाळाच्या जन्मानंतर लगेचच सक्शन मशिनने ही शी बाहेर काढून टाकण्याची पूर्वापार पद्धत आहे. पण बाळानं पोटात शी केली हे कारण सांगून हल्ली सर्रास सिझर केलं जातं.
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प्रसूतीची प्रत्येक कळ बाळाला गर्भाशयातून खाली ढकलण्यासाठी आणि गर्भाशयाचे तोंड उघडण्यासाठी असते. बाळाच्या पोटावर या क्रियेने दाब पडला, की बाळाला शी होणं ही अशीच नैसर्गिक क्रिया आहे. उलट अशी शी होणो, हे बाळाचे गुदद्वार आणि आतडी पूर्णपणो विकसित आणि नॉर्मल असल्याचे लक्षण आहे. ही विष्ठा जंतु विरहित असते. त्यामुळे बाळाने अशी शी गिळली, तरीही त्याला या शी पासून काहीही धोका नसतो. बाळाच्या जन्मानंतर लगेचच सक्शन मशिनने ही शी बाहेर काढून टाकण्याची पूर्वापार पद्धत आहे. पण बाळानं पोटात शी केली हे कारण सांगून हल्ली सर्रास सिझर केलं जातं.
४.बाळाचे ठोके अनियमित झाले आहेत.
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गर्भाशयाच्या प्रत्येक आकुंचनाबरोबर बाळाचा रक्तपुरवठा कमी होत असतो; बाळाचे ठोके अनियमित होत असतात. दोन कळांमधील काळात हा रक्तपुरवठा आणि ठोके पूर्ववत होतात. ही क्रिया बाळाचा जन्म होईस्तोवर चालू असते. कळा सहन करण्याची बाळाची ताकद अमर्यादित असते, हे सत्य प्रसूती प्रक्रियेस मदत करताना मी हजारो वेळा अनुभवलेले आहे. दोन दोन अथवा तीन तीन दिवस घरी कळा देऊन नंतर माङयाकडे येऊन नैसर्गिक प्रसूती झालेल्या बाळाची तब्येत आणि रडणं खणखणीत असतं. त्यामुळे बाळाचे ठोके अनियमित झालेत असं सांगणं हेदेखील एक फसवं कारण आहे.
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गर्भाशयाच्या प्रत्येक आकुंचनाबरोबर बाळाचा रक्तपुरवठा कमी होत असतो; बाळाचे ठोके अनियमित होत असतात. दोन कळांमधील काळात हा रक्तपुरवठा आणि ठोके पूर्ववत होतात. ही क्रिया बाळाचा जन्म होईस्तोवर चालू असते. कळा सहन करण्याची बाळाची ताकद अमर्यादित असते, हे सत्य प्रसूती प्रक्रियेस मदत करताना मी हजारो वेळा अनुभवलेले आहे. दोन दोन अथवा तीन तीन दिवस घरी कळा देऊन नंतर माङयाकडे येऊन नैसर्गिक प्रसूती झालेल्या बाळाची तब्येत आणि रडणं खणखणीत असतं. त्यामुळे बाळाचे ठोके अनियमित झालेत असं सांगणं हेदेखील एक फसवं कारण आहे.
डॉ. अशोक माईणकर
(लेखक सासवड, ता. पुरंदर, जि. पुणे येथे स्त्रीरोग आणि प्रसूतीशास्त्र तज्ज्ञ आहेत. या क्षेत्रत कामाचा त्यांना 35 वर्षाहून अधिक अनुभव आहे.)
(लेखक सासवड, ता. पुरंदर, जि. पुणे येथे स्त्रीरोग आणि प्रसूतीशास्त्र तज्ज्ञ आहेत. या क्षेत्रत कामाचा त्यांना 35 वर्षाहून अधिक अनुभव आहे.)
Tuesday, June 23, 2015
"शिका, संघर्ष करा, संघटित व्हा!"
"शिका, संघर्ष करा, संघटित व्हा!"
बाबासाहेबांनी आम्हाला जी यंत्रणा शिकवली ती आम्ही या साठ वर्षांत अजूनही शिकलेलो नाही. कुठल्याही विहारात जा किंवा एखादा बैनर फलक पहा, किंवा अगदी एखाद्या शिक्षण संस्थेतही पहा बाबासाहेबांचा एक संदेश मोठ्या दिमाखाने झळकत असतो. "शिका, संघटित व्हा आणि संघर्ष करा." मागे एकदा आमच्या इथल्या चैतन्य विहारात याबद्दल मी बोलत असताना मला अनेक वयस्क माणसांनी विरोध केला मात्र जेव्हा त्यांना विनंती करून विनयपूर्वक मुद्दा पटवून दिला तेव्हा तो त्यांना पटला. मात्र इतकी वर्षे ते हाच उपरोक्त संदेश प्रमाण मानून जगत होती, कदाचित त्यामुळेही आजची ही विदारक अवस्था समाजाने आपल्यावर ओढावून घेतलेली असावी.
Educate, Agitate and Organise असा तो मूळ इंग्रजी संदेश आहे. अर्थात शिका, संघर्ष करा आणि संघटित व्हा. आपण हा क्रम चुकवत आलो आहोत, आणि हा क्रम चुकवण ही साधी गोष्ट नसून भयंकर प्रमाद आहे असे मी मानतो. बाबासाहेबांनी प्रत्येक लढ्यात किंवा त्यांच्या भाषणात लिखाणात एक मैकेनिज्म तयार करून दिलाय. एक यंत्रणा निर्माण करण्याचे तंत्र निर्माण करून दिलेय. आमची पिढी पैंथरला प्रमाण मानून लढा उभा करण्याचा प्रयत्न करते तेव्हा त्याच्या उद्दिष्टपूर्तीची शंका माझ्या मनात निर्माण होत राहते. का नाही आपण बाबासाहेबांनी केलेल्या सत्याग्रहांवर आधारीत एखादा लढा उभा करण्याचा प्रयत्न करत? दगड फेकून क्रांती होते ही त्यांची शिकवण नाही म्हणूनच की काय चवदार तळ्याच्या सत्याग्रहावेळी सत्याग्रहींवर जो हल्ला झाला त्याला प्रतिउत्तरात लाठ्याकाठ्यांचा हल्ला न करता अगदी शांतपणे मात्र अत्यंत विचारपूर्वकपणे बाबासाहेबांनी त्याच भूमीत नऊ महिन्यांनी त्या विषमतेचा समूळ धिक्कार केला आणि तोही असा की हल्लेखोरांसोबत हल्लेखोरांचे टेक्नोक्रैट जे आहेत त्यांचेही दात घशात घातले जातील.
नेहमी वाटत आले आहे की रीडिंग बाबासाब इज वन थिंग अँड लर्निंग बाबासाब इज वन थिंग. त्यामुळेच शिका संघर्ष करा संघटित व्हा याचा क्रम आपण चुकीचा लावला.
नेहमी वाटत आले आहे की रीडिंग बाबासाब इज वन थिंग अँड लर्निंग बाबासाब इज वन थिंग. त्यामुळेच शिका संघर्ष करा संघटित व्हा याचा क्रम आपण चुकीचा लावला.
बाबासाहेब म्हणतात Educate - शिका, म्हणून आम्ही नुसत्या डिग्र्या घेत सुटण्याला अर्थ नाही. शिका म्हणजे औपचारिक शिक्षणासोबतच परिवर्तनाचा लढाही शिका. सीमेवरती लढाईला कुणीही सामान्य नागरिक जाऊ शकतो का? नाही. कारण त्या लढाईचे तंत्रशुद्ध शिक्षण घेणे गरजेचे आहे. कुणीही हृदयाची शस्त्रक्रिया करू शकत नाही त्याला अथक शिक्षणाची आवश्यकता आहे. मग केवळ आपण बौद्ध किंवा मागासवर्गीय किंवा तत्सम कुटुंबात जन्माला आलो, त्रिसरण पंचशील आणि जयभीम म्हणत वाढलो म्हणून आम्ही आंबेडकरी झालो का? किंवा आंबेडकरी लढाई लढण्यासाठी पात्र झालो का? तर माझ्यामते नाही. कारण अजूनही आम्ही बाबासाहेबांचा विचार नेमकेपणाने आत्मसात केलेला नाही. तो आत्मसात करणे आणि येणाऱ्या पिढ्यांकडे ट्रांसफर करणे म्हणजे बाबासाहेबांच्या संदेशाच्या दृष्टीने "शिका" आहे असे मला वाटते.
मग येते Agitate - संघर्ष करा. आता हा संघर्ष कशासाठी? या देशात स्वातंत्र्य समता बंधुता न्याय आणि लोकशाहीमूलक समाज आणि राज्यव्यवस्था निर्माण करण्यासाठी संघर्ष करणे. परिवर्तनासाठी किंवा त्यांच्याच भाषेत प्रतिक्रांतिशी मुकाबला करणारी क्रांति निर्माण करण्यासाठीचा संघर्ष. संघर्ष करा या संदेशात उपरोक्त सर्व अंतर्भूत होईल यात दुमत असण्याचे कारण नाही. पण मग हा संघर्ष नेमका करायचा कसा?
यासाठी बाबासाहेबांच्या संदेशातील अंतिम शब्द महत्वाचा आहे. "संघटित व्हा". मला वाटत बाबासाहेबांच्या संदेशातील "संघर्ष करा" हा संदेश "संघटित होण्यासाठी संघर्ष करा" या अर्थाने आहे.
यासाठी बाबासाहेबांच्या संदेशातील अंतिम शब्द महत्वाचा आहे. "संघटित व्हा". मला वाटत बाबासाहेबांच्या संदेशातील "संघर्ष करा" हा संदेश "संघटित होण्यासाठी संघर्ष करा" या अर्थाने आहे.
Orgnise - संघटित व्हा. संघटित कुणी व्हायचे आहे? बौद्ध समाजाने? आंबेडकरी समाजाने? की आणखी कुणी? संघटित व्हायचे आहे या देशातील त्या ८५% जनतेने जी आजवर शोषित वंचित, प्रगतीच्या दृष्टीने मागास राहिली आहे. त्यात केवळ SC च नाही तर या देशातील OBC, SC, ST, NT, VJ या सर्वांनी संघटित होऊन जे १५% लोक आजवर सत्ता, शास्त्र, शस्त्र आणि संपत्ती याच्या जोरावर राज्य करत आलेत, अन्याय करत आलेले आहेत त्या ब्राम्हणवादी, भांडवलवादी, विषमतावादी लोकांविरुद्ध संघर्ष करायचा आहे. म्हणजे लाठ्याकाठ्यांचा संघर्ष नाही तर या संघटित शक्तीने या देशात स्वातंत्र्य समता बंधुता आणि न्यायप्रणव समाजव्यवस्था निर्माण करणे आणि या देशाची राजसत्ता काबिज करणे हे होय. जोपर्यंत या देशाचा शोषित वंचित घटक देशाच्या सत्तेत येत नाही तोपर्यंत या देशात लोकशाही टिकणे आणि वाढणे अशक्य आहे.
म्हणूनच शिका संघटित व्हा संघर्ष करा असा संदेश नसून शिका संघर्ष करा आणि संघटित व्हा असा बाबसाहेबांचा संदेश आहे. ज्या दिवशी या देशातील ८५% जनता संघटित होईल त्यादिवशी तिला कुठलाही वेगळा संघर्ष करायची गरज नाही. पण संघर्ष करावा लागणार आहे तो ही ८५% जनता संघटित करण्यासाठी. त्यासाठी तरुणांनी पुढे येणे गरजेचे आहे, विचारधारा समजून घेणे गरजेचे आहे आणि ती कृतीत उतरवून ती यंत्रणा निर्माण करणे गरजेचे आहे जिचा बाबासाहेब आग्रह धरतात.
एखाद्या संघटनेतील कार्यकर्ते स्वतःची सद्सद्विवेक बुद्धी वापरून योग्य काय अयोग्य काय हे समजून घेत नसतील आणि जे अयोग्य आहे त्याविरोधात ठाम भूमिका घ्यायला अक्षम असतील तर अशी संघटना ही लोकशाहीला मारक आणि हुकुमशाहीला पूरक ठरत असते. आंबेडकरवादी विचारांचा दावा करणाऱ्या संघटना आणि राजकीय पक्ष यांच्यामध्ये हा सद्सद्विवेकबुद्धीने विचार करणारा कार्यकर्ता नसल्याने ह्या संघटना अथवा पक्ष सतत अपयशी ठरत आलेले आहेत. हा सद्सद्विवेकबुद्धीचा कार्यकर्ता निर्माण करणे ही पहिली गरज आहे. कुणीतरी ढकलत जातेय आणि आपण ढकलले जातोय अशी परिस्थिती आहे.
म्हणूनच १९५४ साली गोखले इंस्टिट्यूट पुणे येथे लोकशाही आणि लोकशाहीच्या यशस्वितेच्या सात अटी सांगताना शेवटचे दोन अटी बाबासाहेब सांगतात,
६) नितीमान समाजाची गरज.
७) सार्वजनिक विवेकबुध्दी हे लोकशाहीचे आश्रयस्थान.
आज हुकुमशाही वृत्ती बळावू पाहणाऱ्या शक्तींना आवर घालण्यासाठी स्वतःची सद्सद्विवेक बुद्धी वापरणारा नीतिमान समाज निर्माण करण्याची गरज आहे. अन्यथा या देशातील ८५% शोषित वंचित समाजाची असंघटितता आणि उदासीनता ही लोकशाहीला मारक आणि हुकुमशाहीला पूरक ठरणारी आहे. बाबासाहेबांचा विचार समजून तो कृतीत आणण्याची नितांत आवश्यकता आज आहे.
६) नितीमान समाजाची गरज.
७) सार्वजनिक विवेकबुध्दी हे लोकशाहीचे आश्रयस्थान.
आज हुकुमशाही वृत्ती बळावू पाहणाऱ्या शक्तींना आवर घालण्यासाठी स्वतःची सद्सद्विवेक बुद्धी वापरणारा नीतिमान समाज निर्माण करण्याची गरज आहे. अन्यथा या देशातील ८५% शोषित वंचित समाजाची असंघटितता आणि उदासीनता ही लोकशाहीला मारक आणि हुकुमशाहीला पूरक ठरणारी आहे. बाबासाहेबांचा विचार समजून तो कृतीत आणण्याची नितांत आवश्यकता आज आहे.
जयभीम, नमो बुद्धाय.
-- डॉ. आशिष तांबे
टिटवाळा, ठाणे.
२३.०६.१५
-- डॉ. आशिष तांबे
टिटवाळा, ठाणे.
२३.०६.१५
Friday, June 19, 2015
कैसे डॉ आंबेडकर ने संविधान को बौद्ध धम्म पर आधारित किया है
बहुजन नायक श्री पार्शव नाथ मौर्या जी के भाषण के विडिओ, विषय “कैसे डॉ आंबेडकर ने संविधान को बौद्ध धम्म पर आधारित किया है”
parsnath morya PART 1 https://www.youtube.com/watch?v=rGz2lIcTupQ
parsnath morya PART 2 https://www.youtube.com/watch?v=GLyEZa3rmEg
parsnath morya PART 3 https://www.youtube.com/watch?v=h_vjiqjfcw0
parsnath morya PART 4 https://www.youtube.com/watch?v=ahdqpuf107E
parsnath morya PART 5 https://www.youtube.com/watch?v=dB8WkxnFyJc
parsnath morya PART 6 https://www.youtube.com/watch?v=YYcYR_VAtag
Wednesday, June 3, 2015
Review of डाॅ.बाबासाहब अंबेडकर फिल्म
जब्बार पटेल ने डाॅ.बाबासाहब अंबेडकर यह फिल्म बनाकर बहुजन समाज को की गुमराह करने की कोशिश
महाराष्ट्र सरकार और केंद्र सरकार ने जब्बार पटेल को पकडकर सन 2000 मे एक फिल्म बनाई थी जिसका नाम डाॅ.बाबासाहब अंबेडकर था। इस फिल्म में बाबासाहब का किरदार दक्षिण भारत के अभिनेता ममूटी इन्होंने निभाया था। बहोत से लोगों ने इस फिल्म की बहोत प्रशंसा की थी लेकिन हमे यह नही पता था की जब्बार पटेल ने बाबासाहब अंबेडकर जी इनके चरित्र को तोड मरोडकर दिखाया था। तो आईए जानते हैं की आखिर जब्बार पटेल ने बहुजन समाज को गुमराह करने के लिए फिल्म में बाबासाहब अंबेडकर जी इनको कैसे दिखाया था।
ध्यान मे रखिए इस फिल्म के डायरेक्टर जब्बार पटेल यह 'राष्ट्र सेवा दल' की पार्श्वभूमि से आए हुए हैं। जब्बार पटेल जवानी मे 'राष्ट्रसेवा दल' मे काम करते थे।
1) फिल्म में देखिए:- बाबासाहब अंबेडकर जी की फिल्म में अमेरिका में विद्यार्जन के समय जो दृश्य हैं उसमें वेटर बनने का दृश्य हैं, वहाँ एक निग्रो आदमी के साथ संवाद दिखाया गया हैं। वह निग्रो भी वहाँ वेटर का काम कर रहा था। वह निग्रो बाबासाहब अंबेडकर जी को कहता हैं की, " कुछ भी क्यों न हो तुम लोगों को पढ़ने का तो अधिकार हैं मुझे तो पढ़ने का भी अधिकार नही हैं।"
यह संवाद लिखनेवालें ने ऐसा संवाद दिखाकर यह संदेश देने की कोशिश की, की " अन्याय केवल भारतीय अछूतों के साथ ही नही होता अन्याय धरती पर हर जगह होता है।" अन्याय भारत के अछूतों के साथ ही नही दुनिया में और जगह अन्याय होता हैं। निग्रो के साथ अमेरिका में जो अन्याय होता हैं उसकी तुलना में अछूतों के साथ भारत में जो अन्याय ब्राह्मण करते हैं वह तो कुछ भी नही हैं अमेरिका में तो ज्यादा अन्याय होता हैं। ऐसा दृश्य दिखाकर स्क्रिप्ट लिखनेवालों ने यह संदेश देने की कोशिश की, की ब्राह्मण उतने ज्यादा अन्यायकारी नहीं हैं जितना की उन्हें अन्यायी और अत्याचारी समझा जाता हैं।
2) एक सीन मे बाबासाहब अंबेडकर लायब्रेरी से बाहर आ रहे हैं तो उस वक्त एक अंग्रेज व्यक्ति एक निग्रो को सडक सड़क पर पीट रहा हैं और बाबासाहब अंबेडकर जी चूपचाप देख रहे हैं यह सीन बहोत देर तक चल रहा हैं। उस निग्रो को एक अंग्रेज मार रहा हैं, उसे गालियाँ दे रहा हैं, उसके उपर अन्याय कर रहा हैं और बाबासाहब अंबेडकर जी वहा चूपचाप खड़े हैं क्या यही बाबासाहब अंबेडकर जी इनकी छवी थी। बाबासाहब अंबेडकर जी तो अन्याय बर्दाश्त नही करते थे बल्कि अन्याय के खिलाफ आवाज उठाते थे। यह दृश्य दिखाकर बाबासाहब अंबेडकर जी इनकी छवी खराब करने की कोशिश की हैं।
3) महाड के चवदार तालाब के सत्याग्रह का दृश्य फिल्म में दिखाया गया हैं। उस दृश्य में एक बात बताई गई हैं की वहाँ चितले नाम का कोई ब्राह्मण हैं। उस वक्त मनुस्मृति जलाने का प्रस्ताव वह ब्राह्मण करता हैं। उस दृश्य में चितले कहता हैं, " वैसे तो जन्म से मैं ब्राह्मण हूँ, फिर भी मैं मनुस्मृति का घोर निंदक हूँ।" यानी उस फिल्म में मनुस्मृति जलाने का श्रेय चितले नामक ब्राह्मण व्यक्ति को दिया गया हैं।
4) महाड के ब्राह्मण लोगों ने महाड के चवदार तालाब के बारे में बम्बई कोर्ट में केस दायर किया था, मगर फिल्म बनाने वाले ने फिल्म में यह डायलाॅग लिखा की, 'महाड के सवर्ण ने कोर्ट मे दावा दाखिल किया हैं'। यानी फिल्म में ब्राह्मणों को बचाने के लिए 'ब्राह्मण शब्द की बजाय 'सवर्ण' शब्द का ईस्तेमाल किया गया। आप एक बात पर गौर किजीए अगर श्रेय लेना हो तो चितले को ब्राह्मण बताया गया और जिन्होंने सत्याग्रह के खिलाफ केस दायर किया वे ब्राह्मण होकर भी उनके लिए सवर्ण शब्द का ईस्तेमाल किया गया।
5) एक दृश्य में बाबासाहब अंबेडकर जी पढ़ रहे हैं वहाँ लाला लाजपत राय बाबासाहब अंबेडकर जी को आकर कहते हैं कि आप आजादी के आन्दोलन में शामिल हो जाओ, उनके जो प्रोफेसर हैं वह भी उनको यही कहते हैं, बाबासाहब अंबेडकर जी इससे इनकार करते हुए कहते हैं कि, मैं आजादी के इस आंदोलन ने शामिल नहीं हो सकता क्योंकि मैं यहाँ पढ़ने आया हूँ। यह बात सत्य हैं लेकिन यह दृश्य दिखाने का मतलब कुछ और था। वह यह हैं की बाबासाहब अंबेडकर जी स्वतंत्रता के आंदोलन में शामिल नही थे।
6) पूना पैक्ट का एक दृश्य फिल्म में दिखाया गया हैं उस दृश्य में गांधी और बाबासाहब अंबेडकर जी का जो संवाद दिखाया गया हैं उस संवाद में बाबासाहब अंबेडकर जी को गांधी को बापू बोलते हुए दिखाया गया हैं जबकि बाबासाहब अंबेडकर जी ने गांधी को कभी बापू नही कहाँ उन्होंने सदैव गांधी को "मिस्टर गांधी" या गांधीजी कहाँ।
याद रखिए बाबासाहब अंबेडकर जी इन्होंने 1955 में बी.बी.सी.वर्ल्ड को एक मुलाकात दी थी उस मुलाकात के दौरान बी.बी.सी. पत्रकार ने बाबासाहब अंबेडकर जी को एक सवाल पुछा था वह सवाल यह था:-
बी.बी.सी. पत्रकार:- क्या आपको लगता हैं की गांधी का बरताव एक दुष्ट राजनेताओं जैसा था?
बाबासाहब अंबेडकर:- हाँ! किसी दुष्ट राजनेता जैसा ही!! वे कभी महात्मा नही थे। मैं उनको महात्मा कहने के खिलाफ हूँ। मैंने अपने पुरे जिवन में उन्हें कभी महात्मा नही कहा। वह उपाधी उन्हें शोभा नही देती। नैतिकता से भी वे महात्मा कहने के लायक नही हैं।
बाबासाहब अंबेडकर जी खुद कहते हैं की मैंने गांधी को कभी महात्मा कहाँ नही तो फिर फिल्म में बाबासाहब अंबेडकर जी इनको गांधी को महात्मा कहते हुए क्यों दिखाया गया? इसके पिछे भी एक साजिश हैं।
7) बाबासाहब अंबेडकर जी 24 सितम्बर 1932 को पूना पैक्ट पर हस्ताक्षर करते हैं और उसके बाद फिल्म में यह दृश्य दिखाया गया की बाबासाहब अंबेडकर जी 25 सितम्बर को बम्बई मे एकांत में बैठे हैं, कमरा अंधेरे से ढँका हुआ हैं, उसमें अकेले ही चिंता में बैठे हैं। मगर वास्तव मे बाबासाहब अंबेडकर जी 25 सितम्बर को बम्बई मे बैठे हुए नहीं थे बल्कि 24 सितम्बर को पुना पैक्ट पर हस्ताक्षर कर 25 सितम्बर को बम्बई के चैम्बर ऑफ काॅमर्स में पुना पैक्ट के विरोध में भाषण करते हैं। अगर यह बात और भाषण फिल्म में होता तो असलियत सामने आ जाती।
8) बाबासाहब अंबेडकर जी इनको एक दृश्य में कुछ अंग्रेज छात्राओं के साथ मटन खाते हुए दिखाया गया हैं उसके पिछे भी बड़ी साजिश की गई हैं। वह साजिश यह हैं की बौद्ध धम्म में किसी भी पशु या प्राणी की हत्या करना गलत माना जाता हैं। यह दृश्य दिखाकर यह बताया गया की बौद्ध धम्म में यह सब होने के बावजूद बाबासाहब अंबेडकर जी मटन क्यो खाते हैं? उसी दृश्य में एक अंग्रेज छात्र उसे मटन न मिलने की वजह से वो बाबासाहब अंबेडकर जी इनको भारतीय लोग बाएँ हाथ का कैसे ईस्तेमाल करते हैं यह बताते हुए दिखाया गया हैं। इसका मतलब की बाबासाहब अंबेडकर जी इनके साथ भारतीय ब्राह्मणों ने ही नहीं बल्कि अंग्रेज छात्रों ने भी बदसलुखी की थी और उसी अंग्रेजों के मंत्रिमंडल में और उन्हीं अंग्रेजों के बाबासाहब अंबेडकर जी समर्थक थे ऐसा अप्रत्यक्ष रूप से दिखाया गया।
9) फिल्म में माता रमाई के परिनिर्वाण का एक दृश्य दिखाया गया हैं। पार्थिव शरिर के पास बैठे हुए बाबासाहब अंबेडकर जी जब यह देखते हैं की रमाबाई को हरे रंग की साड़ी पहनाई गई हैं तब वे अपने लोगों से कहते हैं की, " उसकी आखिरी इच्छा तो सफेद साड़ी पहनने की थी, आगे डायलाॅग लिखने वाले ने लिखा की, ' परंपरा तो हरी साड़ी पहनने की हैं' तो बाबासाहब अंबेडकर जी इनको सिर हिलाते हुए दिखाया गया। फिल्म बनानेवालों का एक ही उद्देश था की, बाबासाहब अंबेडकर जी प्रथा और परंपरा के आगे झुकते थे और बाबासाहब अंबेडकर जी ने प्रथा परंपरा विरोध में जो आंदोलन चलाया वह महज एक ढोंग था।
10) बाबासाहब अंबेडकर जी इनको संविधान सभा में पहुँचाने का श्रेय गांधी को देने का प्रयास फिल्म के किया गया हैं।
11) बाबासाहब अंबेडकर जी इन्होंने 14 अक्तूबर 1956 को नागपूर में भदन्त चंद्रमणी के हाथों बौद्ध धम्म क दिक्षा ली थी और खुद अपने हाथों अपने लाखों अनुयायी को बौद्ध धम्म की दिक्षा दी थी। उस वक्त बाबासाहब अंबेडकर जी इन्होंने अपने अनुयायियों को 22 प्रतिज्ञाएँ दी थी। फिल्म में 14 अक्तूबर 1956 का दृश्य तो दिखाया गया किन्तु बाबासाहब अंबेडकर जी इन्होंने जो 22 प्रतिज्ञाएँ दी थी वर पुरी नही दिखाई खासकर पहली 9 प्रतिज्ञाएँ जो हिन्दू धर्म के खिलाफ थी।
जब्बार पटेल की 'डाॅ.बाबासाहब अंबेडकर' यह हिन्दी फिल्म सिर्फ एक मनोरंजन हैं। इसमें ऐसा कुछ खास नही जिससे हमे कुछ सिखने को मिले और इसमे खास बात तो यह हैं की इस फिल्म में बाबासाहब अंबेडकर जी के जिवन के सच्चे पहलू और संघर्ष नही दिखाया गया। उल्टा बाबासाहब अंबेडकर जी इनको खलनायक साबित करने की कोशिश की गई थी।
Wednesday, May 20, 2015
ग्रामपंचायतींच्या अखत्यारीत येणारे विषय व काही महत्वाची जमिनीची क्षेत्रफळाची रुपांतरे
कृपा करुन हा पोस्ट काळजीपुर्वक अाणि जरुर वाचा तुमच्यासाठी काही माहीती महत्वाची असेल १००%
व्यावहारिक जगात लागणारे काही महत्वाची जमिनीची क्षेत्रफळाची रुपांतरे ;
१ हेक्टर = १०००० चौ. मी .
१ एकर = ४० गुंठे
१ गुंठा = [३३ फुट x ३३ फुट ] = १०८९ चौ फुट
१ हेक्टर= २.४७ एकर = २.४७ x ४० = ९८.८ गुंठे
१ आर = १ गुंठा
१ हेक्टर = १०० आर
१ एकर = ४० गुंठे x [३३ x ३३] = ४३५६० चौ फुट
१ चौ. मी . = १०.७६ चौ फुट
१ हेक्टर = १०००० चौ. मी .
१ एकर = ४० गुंठे
१ गुंठा = [३३ फुट x ३३ फुट ] = १०८९ चौ फुट
१ हेक्टर= २.४७ एकर = २.४७ x ४० = ९८.८ गुंठे
१ आर = १ गुंठा
१ हेक्टर = १०० आर
१ एकर = ४० गुंठे x [३३ x ३३] = ४३५६० चौ फुट
१ चौ. मी . = १०.७६ चौ फुट
७/१२ वाचन करते वेळी पोट खराबी हे वाक्य असत—त्याचा अर्थ पिक लागवडी साठी योग्य नसलेले क्षेत्र —परंतु ते मालकी हक्कात मात्र येत!!!!!
नमुना नंबर ८ म्हणजे एकूण जमिनीचा दाखला या मध्ये अर्जदाराच्या नावावर असलेली त्या विभागातील [तलाठी सज्जा] मधील जमिनीचे एकूण क्षेत्र याची यादी असते!!!!
जमिनी ची ओळख हि त्याच्या तलाठी यांनी प्रमाणित केलेली आणि जागेशी सुसंगत असलेल्या चतुर्सिमा ठरवितात!!!!
कृपया पोस्ट वाचावी अत्यंत महत्वाचे आहे. ग्रामपंचायत
एक स्वराज्य संस्था जिथे स्थानिक निर्णय घेण्याचे स्वातंत्र्य असते (घटनेच्या चौकटीत राहून) तसेच स्वयंपूर्तीसाठी विविध योजना तयार करून राबविण्याची संपूर्ण अधिकार असलेली घटनात्मक संस्था. ग्रामपंचायत म्हणजेच राज्य शासनाचे विविध कार्य राबविणारे एक केंद्र, ग्रामस्थ आणि शासन ह्यांच्यामधी दुवा.
नमुना नंबर ८ म्हणजे एकूण जमिनीचा दाखला या मध्ये अर्जदाराच्या नावावर असलेली त्या विभागातील [तलाठी सज्जा] मधील जमिनीचे एकूण क्षेत्र याची यादी असते!!!!
जमिनी ची ओळख हि त्याच्या तलाठी यांनी प्रमाणित केलेली आणि जागेशी सुसंगत असलेल्या चतुर्सिमा ठरवितात!!!!
कृपया पोस्ट वाचावी अत्यंत महत्वाचे आहे. ग्रामपंचायत
एक स्वराज्य संस्था जिथे स्थानिक निर्णय घेण्याचे स्वातंत्र्य असते (घटनेच्या चौकटीत राहून) तसेच स्वयंपूर्तीसाठी विविध योजना तयार करून राबविण्याची संपूर्ण अधिकार असलेली घटनात्मक संस्था. ग्रामपंचायत म्हणजेच राज्य शासनाचे विविध कार्य राबविणारे एक केंद्र, ग्रामस्थ आणि शासन ह्यांच्यामधी दुवा.
ग्रामपंचायतींच्या अखत्यारीत येणारे विषय :
१. भूविकास
२. जमीन सुधारणांची अंमलबजावणी
३. जमिनीचे एकत्रीकरण
४. मृदुसंधारण
५. लघु पाट बंधारे
६. सामाजिक वनीकरण
७. घर बांधणी
८. खादी ग्रामोद्योग
९. कुटिरोद्योग
१०. रस्ते, नाले, पूल
११. पिण्याचे पाणी
१२. दळण वळणाची इतर साधने
१३. ग्रामीण विद्युतीकरण
१४. अपारंपरिक उर्जा साधने
१५. दारिद्रय निर्मुलन
१६. प्राथमिक आणि माध्यमिक शिक्षण
१७. बाजार आणि जत्रा
१८. रुग्णालये आणि कुटुंब कल्याण
१९. महिला आणि बालविकास
२०. प्रौढ शिक्षण
२१. सांस्कृतिक कार्यक्रम
२२. सार्वजनिक वितरण
२३. उत्पादनाच्या बाबी
२. जमीन सुधारणांची अंमलबजावणी
३. जमिनीचे एकत्रीकरण
४. मृदुसंधारण
५. लघु पाट बंधारे
६. सामाजिक वनीकरण
७. घर बांधणी
८. खादी ग्रामोद्योग
९. कुटिरोद्योग
१०. रस्ते, नाले, पूल
११. पिण्याचे पाणी
१२. दळण वळणाची इतर साधने
१३. ग्रामीण विद्युतीकरण
१४. अपारंपरिक उर्जा साधने
१५. दारिद्रय निर्मुलन
१६. प्राथमिक आणि माध्यमिक शिक्षण
१७. बाजार आणि जत्रा
१८. रुग्णालये आणि कुटुंब कल्याण
१९. महिला आणि बालविकास
२०. प्रौढ शिक्षण
२१. सांस्कृतिक कार्यक्रम
२२. सार्वजनिक वितरण
२३. उत्पादनाच्या बाबी
✅ग्रामपंचायतींची कार्ये:
१. कृषी – जमीन सुधारणा, धान्य कोठारांची निर्मिती, कंपोष्ट खात निर्मिती, सुधारित बियाणांचा वापर, सुधारित शेती प्रोत्साहन
२. पशु संवर्धन – पशुधनाची काळजी, संकरीत गुराच्या पैदाशीसाठी प्रयत्न करणे, दुग्धोत्पादन वाढविणे, जनावरांच्या पिण्याच्या पाण्याची सोय करणे
३. समाजकल्याण – दारूबंदीस प्रोत्साहन, जुगार आणि अस्पृश्यता नष्ट करणे, महिला/बालकल्याणाच्या योजना लाभार्थींपर्यंत पोहोचविणे.
४. शिक्षण – प्राथमिक तसेच माध्यमिक शिक्षणाची सोय करणे, गावाचा शैक्षणिक विकास
५. आरोग्य – सार्वजनिक विहीर, गटारे आणि परिसर स्वच्छ राखणे, शासकीय योजना राबविणे, शुद्ध जल पुरवठा
६. रस्ते बांधणी – रस्ते, पूल, साकव यांची बांधकामे करणे, सार्वजनिक बाग, क्रीडांगणे, सचिवालय बंधने
७. ग्रामोद्योग आणि सहकार – स्वयं रोजगाराच्या संधी उपलब्ध करणे, कार्यकारी संस्था/पतपेढ्या स्थापणे
८. प्रशासन - महसुलाची कागदपत्रे अद्ययावत करणे, सार्वजनिक मालमत्तेची नोंद ठेवणे, घरांची नोंद ठेवणे, जन्म, मृत्यू आणि विवाहाची नोंद ठेवणे, बक्षिसांची नोंद, अतिक्रमणे हटविणे
आपणास आवश्यक असलेली माहिती कोणत्या नोंदवहीत असते याबाबत ही माहिती.
२. पशु संवर्धन – पशुधनाची काळजी, संकरीत गुराच्या पैदाशीसाठी प्रयत्न करणे, दुग्धोत्पादन वाढविणे, जनावरांच्या पिण्याच्या पाण्याची सोय करणे
३. समाजकल्याण – दारूबंदीस प्रोत्साहन, जुगार आणि अस्पृश्यता नष्ट करणे, महिला/बालकल्याणाच्या योजना लाभार्थींपर्यंत पोहोचविणे.
४. शिक्षण – प्राथमिक तसेच माध्यमिक शिक्षणाची सोय करणे, गावाचा शैक्षणिक विकास
५. आरोग्य – सार्वजनिक विहीर, गटारे आणि परिसर स्वच्छ राखणे, शासकीय योजना राबविणे, शुद्ध जल पुरवठा
६. रस्ते बांधणी – रस्ते, पूल, साकव यांची बांधकामे करणे, सार्वजनिक बाग, क्रीडांगणे, सचिवालय बंधने
७. ग्रामोद्योग आणि सहकार – स्वयं रोजगाराच्या संधी उपलब्ध करणे, कार्यकारी संस्था/पतपेढ्या स्थापणे
८. प्रशासन - महसुलाची कागदपत्रे अद्ययावत करणे, सार्वजनिक मालमत्तेची नोंद ठेवणे, घरांची नोंद ठेवणे, जन्म, मृत्यू आणि विवाहाची नोंद ठेवणे, बक्षिसांची नोंद, अतिक्रमणे हटविणे
आपणास आवश्यक असलेली माहिती कोणत्या नोंदवहीत असते याबाबत ही माहिती.
* गाव नमुना नंबर - 1 - या नोंदवहीमध्ये भूमी अभिलेख खात्याकडून आकारबंध केलेला असतो, ज्यामध्ये जमिनीचे गट नंबर, सर्व्हे नंबर दर्शविलेले असतात व जमिनीचा आकार (ऍसेसमेंट) बाबतती माहिती असते.
* गाव नमुना नंबर - 1अ - या नोंदवहीमध्ये वन जमिनीची माहिती मिळते. गावातील वन विभागातील गट कोणते हे समजते. तशी नोंद या वहीत असते.
* गाव नमुना नंबर - 1ब - या नोंदवहीमध्ये सरकारच्या मालकीच्या जमिनीची माहिती मिळते.
* गाव नमुना नंबर - 1क - या नोंदवहीमध्ये कुळ कायदा, पुनर्वसन कायदा, सिलिंग कायद्यानुसार भोगवटादार यांना दिलेल्या जमिनी याबाबतची माहिती असते. सातबाराच्या उताऱ्यामध्ये नवीन शर्त असल्यास जमीन कोणत्या ना कोणत्या तरी पुनर्वसन कायद्याखाली किंवा वतनाखाली मिळालेली जमीन आहे असे ठरविता येते.
* गाव नमुना नंबर - 1ड - या नोंदवहीमध्ये कुळवहिवाट कायदा अथवा सिलिंग कायद्यानुसार अतिरिक्त जमिनी, त्यांचे सर्व्हे नंबर व गट नंबर याबाबतची माहिती मिळते.
* गाव नमुना नंबर - 1इ - या नोंदवहीमध्ये गावातील जमिनींवरील अतिक्रमण व त्याबाबतची कार्यवाही ही माहिती मिळते.
* गाव नमुना नंबर - 2 - या नोंदवहीमध्ये गावातील सर्व बिनशेती (अकृषिक) जमिनींची माहिती मिळते.
* गाव नमुना नंबर - 3 - या नोंदवहीत दुमला जमिनींची नोंद मिळते. म्हणजेच देवस्थाना साठीची नोंद पाहता येते.
* गाव नमुना नंबर - 4 - या नोंदवहीमध्ये गावातील जमिनीचा महसूल, वसुली, विलंब शुल्क याबाबतची माहिती मिळते.
* गाव नमुना नंबर - 5 - या नोंदवहीत गावाचे एकूण क्षेत्रफळ, गावाचा महसूल, जिल्हा परिषदेचे कर याबाबतची माहिती मिळते.
* गाव नमुना नंबर - 6 - (हक्काचे पत्रक किंवा फेरफार) या नोंदवहीमध्ये जमिनीच्या व्यवहारांची माहिती, तसेच खरेदीची रक्कम, तारीख व कोणत्या नोंदणी कार्यालयात दस्त झाला याची माहिती मिळते.
* गाव नमुना नंबर - 6अ - या नोंदवहीमध्ये फेरफारास (म्युटेशन) हरकत घेतली असल्यास त्याची तक्रार व चौकशी अधिकाऱ्यांचा निर्णय याबाबतची माहिती मिळते.
* गाव नमुना नंबर - 6क - या नोंदवहीमध्ये वारस नोंदीची माहिती मिळते.
* गाव नमुना नंबर - 6ड - या नोंदवहीमध्ये जमिनीचे पोटहिस्से, तसेच वाटणी किंवा भूमी संपादन याबाबतची माहिती मिळते.
* गाव नमुना नंबर - 7 - (7/12 उतारा) या नोंदवहीमध्ये जमीन मालकाचे नाव, क्षेत्र, सर्व्हे नंबर, हिस्सा नंबर, गट नंबर, पोट खराबा, आकार, इतर बाबतीची माहिती मिळते.
* गाव नमुना नंबर - 7अ - या नोंदवहीमध्ये कुळ वहिवाटीबाबतची माहिती मिळते. उदा. कुळाचे नाव, आकारलेला कर व खंड याबाबतची माहिती मिळते.
* गाव नमुना नंबर - 8अ - या नोंद
वहीत जमिनीची नोंद, सर्व्हे नंबर, आपल्या नावावरील क्षेत्र व इतर माहिती मिळते.
वहीत जमिनीची नोंद, सर्व्हे नंबर, आपल्या नावावरील क्षेत्र व इतर माहिती मिळते.
* गाव नमुना नंबर - 8ब, क व ड - या नोंदवहीमध्ये गावातील जमिनीच्या महसूल वसुलीची माहिती मिळते.
* गाव नमुना नंबर - 9अ - या नोंदवहीत शासनाला दिलेल्या पावत्यांची माहिती मिळते.
* गाव नमुना नंबर - 10 - या नोंदवहीमध्ये गावातील जमिनीच्या जमा झालेल्या महसुलाची माहिती मिळते.
* गाव नमुना नंबर - 11 - या नोंदवहीत प्रत्येक गटामध्ये सर्व्हे नंबर, पीकपाणी व झाडांची माहिती मिळते.
* गाव नमुना नंबर - 12 व 15 - या नोंदवहीमध्ये पिकाखालील क्षेत्र, पडीक क्षेत्र, पाण्याची व्यवस्था व इतर बाबतीची माहिती मिळते.
* गाव नमुना नंबर - 13 - या नोंदवहीमध्ये गावाची लोकसंख्या व गावातील जनावरे याबाबतची माहिती मिळते.
* गाव नमुना नंबर - 14 - या नोंदवहीमध्ये गावाच्या पाणीपुरवठ्याबाबतची माहिती, तसेच वापरली जाणारी साधने याबाबतची माहिती मिळते.
* गाव नमुना नंबर - 16 - या नोंदवहीमध्ये माहिती पुस्तके, शासकीय आदेश व नवीन नियमावली याबाबतची माहिती मिळते.
* गाव नमुना नंबर - 17 - या नोंदवहीमध्ये महसूल आकारणी याबाबतची माहिती मिळते.
* गाव नमुना नंबर - 18 - या नोंदवहीमध्ये सर्कल ऑफिस, मंडल अधिकारी यांच्या पत्रव्यवहाराची माहिती असते.
* गाव नमुना नंबर - 19 - या नोंदवहीमध्ये सरकारी मालमत्तेबाबतची माहिती मिळते.
* गाव नमुना नंबर - 20 - पोस्ट तिकिटांची नोंद याबाबतची माहिती मिळते.
* गाव नमुना नंबर - 21 - या नोंदवहीमध्ये सर्कल यांनी केलेल्या कामाची दैनंदिन नोंद याबाबतची माहिती मिळते.
अशा प्रकारे तलाठी कार्यालयात सामान्य नागरिकांना गाव कामगार तलाठी यांच्याकडून वरील माहिती विचारणा केल्यास मिळू शकते. आपणास आपल्या मिळकतीबाबत व गावाच्या मिळकतीबाबत माहिती मिळाल्यामुळे मिळकतीच्या मालकी व वहिवाटीसंबंधीचे वाद कमी होण्यास व मिटण्यास मदत होऊ शकते असे वाटते
आय पी सी (IPC) १८६०
आय पी सी (IPC) १८६०
कलम १४- शासकीय सेवक
कलम २१ -लोकसेवक
कलम २२- जंगम मालमत्ता
कलम २३ -गैर्लभ किंवा गैर्हानी
कलम २४ -अपप्रमनिक्पने
कलम २५ -कपतिपनने
कलम २६- समजण्यास कारण
कलम २८- बनवतीकर्ण किंवा नकलीकरन
कलम २९- दस्त्ताइवज
कलम २९ (अ) -वीदूत नोंदी
कलम ३० -मुल्य वान रोखा
कलम ३३ -कृती अकृती
कलम ३४- सामाईक इरादा
कलम ३९ -आपखुशीने कींवा इचापुर्वक
कलम ४० -अपराध
कलम ४१- वी शे श कायदा
कलम ४२ -थानीक कायदा
कलम ४४ -श ती / हानी
कलम ५२ -सद्भावनेने / शुद्ध हेतूने
कलम ५२ (अ) -आसरा देणे
कलम २१ -लोकसेवक
कलम २२- जंगम मालमत्ता
कलम २३ -गैर्लभ किंवा गैर्हानी
कलम २४ -अपप्रमनिक्पने
कलम २५ -कपतिपनने
कलम २६- समजण्यास कारण
कलम २८- बनवतीकर्ण किंवा नकलीकरन
कलम २९- दस्त्ताइवज
कलम २९ (अ) -वीदूत नोंदी
कलम ३० -मुल्य वान रोखा
कलम ३३ -कृती अकृती
कलम ३४- सामाईक इरादा
कलम ३९ -आपखुशीने कींवा इचापुर्वक
कलम ४० -अपराध
कलम ४१- वी शे श कायदा
कलम ४२ -थानीक कायदा
कलम ४४ -श ती / हानी
कलम ५२ -सद्भावनेने / शुद्ध हेतूने
कलम ५२ (अ) -आसरा देणे
आपवाद
कलम ७६ -कायदेशीर बांधील असलेल्या व्यक्तीने आथवा तथ्ये विषयक चुक्भूलीमुळे केलेली कृती अपराध होत नाही
कलम ८२ -सात वर्ष वयाखालील बालकाने केलेली कृती
कलम ८३ -सात वर्षावरील व बारा वर्षाखालील अपरिपक्व समजशक्ती आसलेल्या बालकाने केलेली कृती
कलम ९६- खासगीरीत्या बचाव करण्याच्या ओघात केलेली गोष्ट
कलम ९७ -शरीराचा व मालमत्तेचा खासगीरीत्या बचाव करण्याचा हक्क
कलम १०० -शरीराचा खासगीरीत्या बचाव करण्याचा हक्क हा मृतु घडून आणण्या इतपत केंवा व्यापक आसतो
कलम १०१ -आसा हक्क मृतुहून अन्य अपाय करण्या इतपत केंवा व्यापक आसतो
कलम १०२-शरीराचा खासगीरीत्या बचाव करण्याचा हक्क सुरु होणे व चालू राहणे
कलम ७६ -कायदेशीर बांधील असलेल्या व्यक्तीने आथवा तथ्ये विषयक चुक्भूलीमुळे केलेली कृती अपराध होत नाही
कलम ८२ -सात वर्ष वयाखालील बालकाने केलेली कृती
कलम ८३ -सात वर्षावरील व बारा वर्षाखालील अपरिपक्व समजशक्ती आसलेल्या बालकाने केलेली कृती
कलम ९६- खासगीरीत्या बचाव करण्याच्या ओघात केलेली गोष्ट
कलम ९७ -शरीराचा व मालमत्तेचा खासगीरीत्या बचाव करण्याचा हक्क
कलम १०० -शरीराचा खासगीरीत्या बचाव करण्याचा हक्क हा मृतु घडून आणण्या इतपत केंवा व्यापक आसतो
कलम १०१ -आसा हक्क मृतुहून अन्य अपाय करण्या इतपत केंवा व्यापक आसतो
कलम १०२-शरीराचा खासगीरीत्या बचाव करण्याचा हक्क सुरु होणे व चालू राहणे
अप्प्रेर्णा वीषयी
कलम १०७- एखा द्या गोष्टीचे अप्प्रेरन
कलम १०८- अप्प्रेरक
कलम १०९- अपप्रेरणामुळे परीणामतः
कलम ११४- अपराध घडला तेंव्हा अपप्रेरक हजार आसने
कलम १०७- एखा द्या गोष्टीचे अप्प्रेरन
कलम १०८- अप्प्रेरक
कलम १०९- अपप्रेरणामुळे परीणामतः
कलम ११४- अपराध घडला तेंव्हा अपप्रेरक हजार आसने
सार्वजनीक प्रशान्त्तेच्या वीरोधी अपराधा वीषयी
कलम १४१- बेकायदेशीर जमाव
कलम १४२- बेकायदेशीर जमावाचा घटक आसने
कलम १४३- शीक शा
कलम १४४- प्राणघातक हत्त्यारासः बेकायदेशीर जमावात सामील होणे
कलम १४५- बेकायदेशीर जमावाला पांगण्याचा आदेश झाल्याचे माहीत असूनही सामील होणे
कलम १४६- दंगा करणे
कलम १४७- दंगा करण्याबद्दल शिक्षा
कलम १४९- वीधी नी युक्त जबाबदारी
कलम १५१- पाच कींवा आधीक व्यक्तींना पंग्न्याचा आदेश मिळाल्यानंतर जाणीवपूर्वक थांबून राहणे
कलम १५३(अ) -धर्म,वंश,जन्म्थन,नीवास भाषा इ. कारणावरून नीरनीराळया गटामध्ये शत्त्रुतव वाढवणे
कलम १५९- दंगल
कलम १६०- दंगल करण्याबद्दल शिक्षा
कलम १४१- बेकायदेशीर जमाव
कलम १४२- बेकायदेशीर जमावाचा घटक आसने
कलम १४३- शीक शा
कलम १४४- प्राणघातक हत्त्यारासः बेकायदेशीर जमावात सामील होणे
कलम १४५- बेकायदेशीर जमावाला पांगण्याचा आदेश झाल्याचे माहीत असूनही सामील होणे
कलम १४६- दंगा करणे
कलम १४७- दंगा करण्याबद्दल शिक्षा
कलम १४९- वीधी नी युक्त जबाबदारी
कलम १५१- पाच कींवा आधीक व्यक्तींना पंग्न्याचा आदेश मिळाल्यानंतर जाणीवपूर्वक थांबून राहणे
कलम १५३(अ) -धर्म,वंश,जन्म्थन,नीवास भाषा इ. कारणावरून नीरनीराळया गटामध्ये शत्त्रुतव वाढवणे
कलम १५९- दंगल
कलम १६०- दंगल करण्याबद्दल शिक्षा
लोक्सेवाकांकडून कींवा त्यासबंधी घडणाऱ्या अप्राधावीशइ
कलम १७०- लोक्सेव्काची बतावणी करून तोत्यागीरी करणे
कलम १७१-लोकसेवक वापरतो तशी वर्दी कींवा ओळख चींह कपट करण्याच्या उद्देशाने वापरणे, परीधान करणे
कलम १७०- लोक्सेव्काची बतावणी करून तोत्यागीरी करणे
कलम १७१-लोकसेवक वापरतो तशी वर्दी कींवा ओळख चींह कपट करण्याच्या उद्देशाने वापरणे, परीधान करणे
लोक्सेव्कांच्या कायदेशीर प्रधीकाराच्या अव्मानावीश इ
कलम १७२- समन्सची बजावणी कींवा इतर कार्येवाही टाळण्यासाठी फरारी होणे
कलम १८१- लोकसेवक यांच्या समोर श्प्तेव्र खोटे कथन करणे
कलम १८८- लोक्सेव्काने जारी केलेल्या आदेशाची अव्दन्या करणे
कलम १७२- समन्सची बजावणी कींवा इतर कार्येवाही टाळण्यासाठी फरारी होणे
कलम १८१- लोकसेवक यांच्या समोर श्प्तेव्र खोटे कथन करणे
कलम १८८- लोक्सेव्काने जारी केलेल्या आदेशाची अव्दन्या करणे
खोटा पुरावा आणी सार्वजनीक न्यायाच्या वीरोधी अपराध
कलम २०१- अपराध्याला वाचवण्यासाठी अपराधाचा पुरावा नाहीसा करणे कींवा खोटी माहीती देणे
कलम २२३- लोक्से
व्काने हयग इने बंदीवासातून कींवा ह्वाल्तीतून पळून जाऊ देणे
कलम २०१- अपराध्याला वाचवण्यासाठी अपराधाचा पुरावा नाहीसा करणे कींवा खोटी माहीती देणे
कलम २२३- लोक्से
व्काने हयग इने बंदीवासातून कींवा ह्वाल्तीतून पळून जाऊ देणे
सार्वजनीक आरोग्य,सुरक्षीतता सोय सभ्यता व नीतीमत्ता याना बाधक अशा अप्रधान्वीशइ
कलम २७९- सार्वजनीक रस्त्यावर बेकायदेशीरपणे वाहन चालवणे
कलम २९२- अश्लील पुस्तके इ. वी करी करण
े
ध्म्स्बंधीच्या अप्रधान्वी श इ
कलम २९५- कोणत्याही वर्गाच्या धर्माचा अपमान करण्याच्या उद्देशाने उपासना स्थानांचे नुकसान करणे कींवा ते अप्वीत्र करणे
कलम २९५(अ)- कोणत्याही वर्गाच्या धर्माचा कींवा धार्मीक श्रद्धांचा अपमान करून धार्मीक भावनांवर अत्याचार करण्याच्या उद्देशाने कृती करणे
कलम २९८- धार्मीक भावना दुखवण्याच्या उद्देशाने जाणीवपूर्वक शब्द उच्चारणे
कलम २७९- सार्वजनीक रस्त्यावर बेकायदेशीरपणे वाहन चालवणे
कलम २९२- अश्लील पुस्तके इ. वी करी करण
े
ध्म्स्बंधीच्या अप्रधान्वी श इ
कलम २९५- कोणत्याही वर्गाच्या धर्माचा अपमान करण्याच्या उद्देशाने उपासना स्थानांचे नुकसान करणे कींवा ते अप्वीत्र करणे
कलम २९५(अ)- कोणत्याही वर्गाच्या धर्माचा कींवा धार्मीक श्रद्धांचा अपमान करून धार्मीक भावनांवर अत्याचार करण्याच्या उद्देशाने कृती करणे
कलम २९८- धार्मीक भावना दुखवण्याच्या उद्देशाने जाणीवपूर्वक शब्द उच्चारणे
मानवी शरीरास व जीवीतास बाधक होणार्या अप्रधावी श इ
कलम २९९- सदोष मनुष्यवध
कलम ३००- खून
कलम ३०२- खुणा बद्दल शी क्षा
कलम ३०४- सदोष मनुष्यवधा बद्दल शी क्षा
कलम ३०४(अ)- ह्य्ग्यीने मृतू स कारण
कलम ३०४(ब)- हुंडा बळी
कलम ३०६- आत्म्हत्तेला अपप्रेरणा देणे
कलम ३०७- खुनाचा प्रयत्न करणे
कलम ३२३- इच्छापुर्वक दुखापत पोहच्व्ण्याब्द्दल शिक्षा
कलम ३२४- घातक ह्त्त्याराने कींवा साधनांनी इच्छापुर्वक दुखापत पोहच्व णे
कलम ३२५- इच्छापुर्वक जबर दुखापत पोहच्व्ण्याब्द्दल शिक्षा
कलम ३२६- घातक ह्त्त्याराने कींवा साधनांनी इच्छापुर्वक जबर दुखापत पोहच्व णे
कलम ३२६(अ)- असीड इ चा वापर करून इच्छापुर्वक जबर दुखापत पोहचवणे
कलम ३२६(ब)- इच्छापुर्वक असीड फेकणे अथवा फेकण्याचा प्रयत्न करणे
कलम ३२८- अपराध करण्याच्या उद्देशाने वीष इ सहायाने दुखापत करणे
कलम ३३०- कबुली जबाब जबरीने घेण्यासाठी , गेलेला माल परत घेण्यासाठी इच्छापुर्वक दुखापत करणे
कलम ३३२- लोक्सेव्काला त्याच्या कर्तव्यापासून धाकाने प्रारुत्त करण्यासाठी इच्छापुर्वक दुखापत करणे
कलम ३३६- इतरांचे जीवीत कींवा व्यक्तीगत सुर्शीतता धोक्यात आणणारी कृती
कलम ३३७- इतरांचे जीवीत कींवा व्यक्तीगत सुर्शीतता धोक्यात आणणार्या कृतीने दुखापत पोचवणे
कलम ३३८- इतरांचे जीवीत कींवा व्यक्तीगत सुर्शीतता धोक्यात आणणार्या कृतीने जबर दुखापत पोचवणे
कलम ३३९- गैर नीरोध / आन्यायाने प्रतीबंध
करणे
कलम ३४०- गैर प्रीरोध/ आन्यायाने कैदेत ठेवणे
कलम ३४१- गैर नीरोधाबद्दल शिक्षा
कलम ३४२- गैर परीरोधाबद्दल शिक्षा
कलम ३४९- बलप्रयोग
कलम ३५०- फौजदारी पात्र बलप्रयोग
कलम ३५१- हल्ला / हाम्ला
कलम ३५२- फौजदारी पात्र बलप्रयोगाबद्दल शिक्षा
कलम ३५३- लोकसेवकाला त्याच्या कर्तव्यापासून धाकाने प्रारुत्त करण्यासाठी फौजदारी पात्र बलप्रयोग करणे
कलम ३५४- स्त्री चा विनयभंग करण्याच्या उद्देशाने तीच्यावर हमला कींवा फौजदारी पात्र बलप्रयोग करणे
कलम ३५४(अ)- लैंगीक छ ळ व च छ लाब्द्द्ल शिक्षा
कलम ३५४(ब)- शीरीला वी वस्र करण्याच्याउद्देशाने तीच्यावर हमला कींवा फौजदारी पात्र बलप्रयोग करणे
कलम ३५४(क)- चोरून अश्लील चित्रण करणे
कलम ३५४(ड)- चोरून पाठलाग करणे
कलम ३५९- अप्ण्य्न /मनुश चोरून नेणे
कलम ३६२- अपहरण /प्ल्वुन नेणे
कलम ३६३- अप्ण्य्नाब्द्दल शिक्षा
कलम ३७०- व्यक्तींचा अप्व्यापार करणे
कलम ३७५- बलात्कार
कलम ३७६- बलात्काराबद्दल
कलम ३७७- अनैसर्गिक शिक्षा सम्भोग
कलम ३७८ चोरी
कलम ३७९- चोरीबद्दल शिक्षा
कलम ३८०- राहते घर वगैरे ठीकाणी चोरी कलम ३८३- ब्लाद्ग्रह्न /जुल्माने घेणे
कलम ३८४ - ब्लाद्ग्रह्नाब्द्दल शिक्षा
कलम ३९०- जबरी चोरी
कलम ३९१- दरोडा
कलम ३९२- जबरी चोरीबद्दल शिक्षा
कलम ३९३- जबरी चोरी करण्याचा प्रयतन करणे
कलम ३९५- दरोड्याबद्दल शिक्षा
कलम ३९९- दरोडा घालण्याचा प्रयतन करणे
कलम ४०५- फौज्दारीपात्र न्यास्भंग / विश्वासघात
कलम ४०६- न्यास्भनगाब्द्दल शिक्षा
कलम ४०९- लोक्सेवाकाने ,सावकार ,ए जंत यांनी आन्यायाने वी सवासघात करणे
कलम ४१०- चोरीची मालमत्ता
कलम ४११- अप्रमानीकपणे चोरीची मालमत्ता स्वीकारणे
कलम ४१५- ठक्वणूक
कलम ४१७- ठक्वणूक करण्याबद्दल शीक शा
कलम ४२०- ठक्वणूक करणे आणी मालमत्ता देण्यास नकार देणे
कलम ४२५- अप्कीर्या
कलम ४२६- अप्किर्य बद्दल शीक शा
कलम ४३५- शंभर रुपये पर्यंतच्या कींवा शेतमालाचा १० रु की मतीच्या नुकसान करण्याच्या उद्देशाने स्पोटक पदार्थ अथवा वीस्तव याद्यारे आगळीक करणे
कलम ४४१- फौजदारी पात्र अतीक्रमण कींवा अन्यायाची आगळीक
कलम ४४२-गृह अतीक्रमण कींवा घरा वीषयी आगळीक
कलम ४४३- चोरटे गृह अतीक्रमण
कलम ४४४- रात्रीच्या वेळी चोरटे गृह अतीक्रमण करणे
कलम ४४५- घरफोडी
कलम ४४७- फौजदारी पात्र अती क्रमनाबद्दल शी कशा
कलम ४४८- घर अती क्रमनाबद्दल शी कशा
कलम ४५२- दुखापत ,हमला ,गैर्नीरोध ,करण्याची प्रुव तयारी करून नंतर गृह अतीक्रमण करणे
कलम ४५४- कारावासाच्या शी क्षेस पात्र असलेला अपराध करण्यासाठी चोरटे गृह अतीक्रमण कींवा घरफोडी करणे
कलम ४५७- कारावासाच्या शी क्षेस पात्र असलेला अपराध करण्यासाठी रात्री
च्या वेळी चोरटे गृह अतीक्रमण कींवा घरफोडी करणे
कलम ४६३- बनावटी करण
कलम ४६५- बनावटी कर नाबद्दल शिक्षा
कलम ४६८- फसवणूक करण्यासाठी बना वटी करण करणे
कलम ४९८(अ)- ए खांद्या सी रीच्या पतीने कींवा नातेवाईकाने तीला क्रूर वागणूक देणे
कलम ५०४- शांतता भंग घडवुन आणण्याच्या उद्देशाने अपमान करणे
कलम ५०६- फौज्दारीपात्र धाक्दप्त्शा बद्दल शी कशा
कलम ५०९- विनयभंग करण्याच्या उद्देशाने हावभाव कींवा शब्दोचार करणे
कलम ५११- आजीवन कारावासाच्या कींवा अन्य कारावासाच्या शी क्षेस पात्र असलेले अपराध करण्याचा प्रयत्न करण्याबद्दल शिक्षा.
कलम २९९- सदोष मनुष्यवध
कलम ३००- खून
कलम ३०२- खुणा बद्दल शी क्षा
कलम ३०४- सदोष मनुष्यवधा बद्दल शी क्षा
कलम ३०४(अ)- ह्य्ग्यीने मृतू स कारण
कलम ३०४(ब)- हुंडा बळी
कलम ३०६- आत्म्हत्तेला अपप्रेरणा देणे
कलम ३०७- खुनाचा प्रयत्न करणे
कलम ३२३- इच्छापुर्वक दुखापत पोहच्व्ण्याब्द्दल शिक्षा
कलम ३२४- घातक ह्त्त्याराने कींवा साधनांनी इच्छापुर्वक दुखापत पोहच्व णे
कलम ३२५- इच्छापुर्वक जबर दुखापत पोहच्व्ण्याब्द्दल शिक्षा
कलम ३२६- घातक ह्त्त्याराने कींवा साधनांनी इच्छापुर्वक जबर दुखापत पोहच्व णे
कलम ३२६(अ)- असीड इ चा वापर करून इच्छापुर्वक जबर दुखापत पोहचवणे
कलम ३२६(ब)- इच्छापुर्वक असीड फेकणे अथवा फेकण्याचा प्रयत्न करणे
कलम ३२८- अपराध करण्याच्या उद्देशाने वीष इ सहायाने दुखापत करणे
कलम ३३०- कबुली जबाब जबरीने घेण्यासाठी , गेलेला माल परत घेण्यासाठी इच्छापुर्वक दुखापत करणे
कलम ३३२- लोक्सेव्काला त्याच्या कर्तव्यापासून धाकाने प्रारुत्त करण्यासाठी इच्छापुर्वक दुखापत करणे
कलम ३३६- इतरांचे जीवीत कींवा व्यक्तीगत सुर्शीतता धोक्यात आणणारी कृती
कलम ३३७- इतरांचे जीवीत कींवा व्यक्तीगत सुर्शीतता धोक्यात आणणार्या कृतीने दुखापत पोचवणे
कलम ३३८- इतरांचे जीवीत कींवा व्यक्तीगत सुर्शीतता धोक्यात आणणार्या कृतीने जबर दुखापत पोचवणे
कलम ३३९- गैर नीरोध / आन्यायाने प्रतीबंध
करणे
कलम ३४०- गैर प्रीरोध/ आन्यायाने कैदेत ठेवणे
कलम ३४१- गैर नीरोधाबद्दल शिक्षा
कलम ३४२- गैर परीरोधाबद्दल शिक्षा
कलम ३४९- बलप्रयोग
कलम ३५०- फौजदारी पात्र बलप्रयोग
कलम ३५१- हल्ला / हाम्ला
कलम ३५२- फौजदारी पात्र बलप्रयोगाबद्दल शिक्षा
कलम ३५३- लोकसेवकाला त्याच्या कर्तव्यापासून धाकाने प्रारुत्त करण्यासाठी फौजदारी पात्र बलप्रयोग करणे
कलम ३५४- स्त्री चा विनयभंग करण्याच्या उद्देशाने तीच्यावर हमला कींवा फौजदारी पात्र बलप्रयोग करणे
कलम ३५४(अ)- लैंगीक छ ळ व च छ लाब्द्द्ल शिक्षा
कलम ३५४(ब)- शीरीला वी वस्र करण्याच्याउद्देशाने तीच्यावर हमला कींवा फौजदारी पात्र बलप्रयोग करणे
कलम ३५४(क)- चोरून अश्लील चित्रण करणे
कलम ३५४(ड)- चोरून पाठलाग करणे
कलम ३५९- अप्ण्य्न /मनुश चोरून नेणे
कलम ३६२- अपहरण /प्ल्वुन नेणे
कलम ३६३- अप्ण्य्नाब्द्दल शिक्षा
कलम ३७०- व्यक्तींचा अप्व्यापार करणे
कलम ३७५- बलात्कार
कलम ३७६- बलात्काराबद्दल
कलम ३७७- अनैसर्गिक शिक्षा सम्भोग
कलम ३७८ चोरी
कलम ३७९- चोरीबद्दल शिक्षा
कलम ३८०- राहते घर वगैरे ठीकाणी चोरी कलम ३८३- ब्लाद्ग्रह्न /जुल्माने घेणे
कलम ३८४ - ब्लाद्ग्रह्नाब्द्दल शिक्षा
कलम ३९०- जबरी चोरी
कलम ३९१- दरोडा
कलम ३९२- जबरी चोरीबद्दल शिक्षा
कलम ३९३- जबरी चोरी करण्याचा प्रयतन करणे
कलम ३९५- दरोड्याबद्दल शिक्षा
कलम ३९९- दरोडा घालण्याचा प्रयतन करणे
कलम ४०५- फौज्दारीपात्र न्यास्भंग / विश्वासघात
कलम ४०६- न्यास्भनगाब्द्दल शिक्षा
कलम ४०९- लोक्सेवाकाने ,सावकार ,ए जंत यांनी आन्यायाने वी सवासघात करणे
कलम ४१०- चोरीची मालमत्ता
कलम ४११- अप्रमानीकपणे चोरीची मालमत्ता स्वीकारणे
कलम ४१५- ठक्वणूक
कलम ४१७- ठक्वणूक करण्याबद्दल शीक शा
कलम ४२०- ठक्वणूक करणे आणी मालमत्ता देण्यास नकार देणे
कलम ४२५- अप्कीर्या
कलम ४२६- अप्किर्य बद्दल शीक शा
कलम ४३५- शंभर रुपये पर्यंतच्या कींवा शेतमालाचा १० रु की मतीच्या नुकसान करण्याच्या उद्देशाने स्पोटक पदार्थ अथवा वीस्तव याद्यारे आगळीक करणे
कलम ४४१- फौजदारी पात्र अतीक्रमण कींवा अन्यायाची आगळीक
कलम ४४२-गृह अतीक्रमण कींवा घरा वीषयी आगळीक
कलम ४४३- चोरटे गृह अतीक्रमण
कलम ४४४- रात्रीच्या वेळी चोरटे गृह अतीक्रमण करणे
कलम ४४५- घरफोडी
कलम ४४७- फौजदारी पात्र अती क्रमनाबद्दल शी कशा
कलम ४४८- घर अती क्रमनाबद्दल शी कशा
कलम ४५२- दुखापत ,हमला ,गैर्नीरोध ,करण्याची प्रुव तयारी करून नंतर गृह अतीक्रमण करणे
कलम ४५४- कारावासाच्या शी क्षेस पात्र असलेला अपराध करण्यासाठी चोरटे गृह अतीक्रमण कींवा घरफोडी करणे
कलम ४५७- कारावासाच्या शी क्षेस पात्र असलेला अपराध करण्यासाठी रात्री
च्या वेळी चोरटे गृह अतीक्रमण कींवा घरफोडी करणे
कलम ४६३- बनावटी करण
कलम ४६५- बनावटी कर नाबद्दल शिक्षा
कलम ४६८- फसवणूक करण्यासाठी बना वटी करण करणे
कलम ४९८(अ)- ए खांद्या सी रीच्या पतीने कींवा नातेवाईकाने तीला क्रूर वागणूक देणे
कलम ५०४- शांतता भंग घडवुन आणण्याच्या उद्देशाने अपमान करणे
कलम ५०६- फौज्दारीपात्र धाक्दप्त्शा बद्दल शी कशा
कलम ५०९- विनयभंग करण्याच्या उद्देशाने हावभाव कींवा शब्दोचार करणे
कलम ५११- आजीवन कारावासाच्या कींवा अन्य कारावासाच्या शी क्षेस पात्र असलेले अपराध करण्याचा प्रयत्न करण्याबद्दल शिक्षा.
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