महीने का सन्देश सूत्र: गौतम बुद्ध ने सर्वप्रथम साबित किया था की 'आर्थिक विषमता' या असमान मेहनताना ही दुखों का मूल कारन है,आर्थिक विषमता का मतलब है ऐसी व्यस्था जिसमें व्यक्तियों के काम की कीमत अन्यायपूर्ण तरीके से तय हो जिससे कुछ लोग बहुत ज्यादा अमीर हो जाएँ और बहुसंख्यक लोग लोग बहुत गरीब बन जाएँ | इसका सीधा कारण है कुछ अमीर लोगों का समूह जो सरकार के नियंत्रण, ईश्वर का डर और धर्म की इस्तेमाल से जनता का शोषण करता है| जनता जितना ज्यादा धर्म और ईश्वर को चाहेगी उतनी ही गरीब और दुखी होती जाएगी| अगर दुखों से मुक्ति चाहते हो तो ईश्वर की जगह ज्ञान और धर्म की जगह राजनीती और भक्ति की जगह संगर्ष में लगन लगाओ, ताकि तुम भी सरकारी नीतिओं का नियंत्रण कर सको|
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