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Thursday, December 31, 2015
Wednesday, December 30, 2015
Sunday, December 27, 2015
डॉ बाबासाहब अंबेडकर
डॉ बाबासाहब अंबेडकर 9 भाषाएँ जानते थे।
1) मराठी (मातृभाषा)
2) हिन्दी
3) संस्कृत
4) गुजराती
5) अंग्रेज़ी
6) पारसी
7) जर्मन
8) फ्रेंच
9) पाली
1) मराठी (मातृभाषा)
2) हिन्दी
3) संस्कृत
4) गुजराती
5) अंग्रेज़ी
6) पारसी
7) जर्मन
8) फ्रेंच
9) पाली
उन्होंने पाली व्याकरण और शब्दकोष (डिक्शनरी) भी लिखी थी, जो महाराष्ट्र सरकार ने "Dr.Babasaheb Ambedkar Writing and
Speeches Vol.16 "में प्रकाशित की हैं।
Speeches Vol.16 "में प्रकाशित की हैं।
🔹 बाबासाहब अंबेडकर जी ने संसद में पेश किए हुए विधेयक
1) महार वेतन बिल
2) हिन्दू कोड बिल
3) जनप्रतिनिधि बिल
4) खोती बिल
5) मंत्रीओं का वेतन बिल
6) मजदूरों के लिए वेतन (सैलरी) बिल
7) रोजगार विनिमय सेवा
8) पेंशन बिल
9) भविष्य निर्वाह निधी (पी.एफ्.)
2) हिन्दू कोड बिल
3) जनप्रतिनिधि बिल
4) खोती बिल
5) मंत्रीओं का वेतन बिल
6) मजदूरों के लिए वेतन (सैलरी) बिल
7) रोजगार विनिमय सेवा
8) पेंशन बिल
9) भविष्य निर्वाह निधी (पी.एफ्.)
🔹 बाबासाहब के सत्याग्रह (आंदोलन)
1) महाड आंदोलन 20/3/1927
2) मोहाली (धुले) आंदोलन 12/2/1939
3) अंबादेवी मंदिर आंदोलन 26/7/1927
4) पुणे कौन्सिल आंदोलन 4/6/1946
5) पर्वती आंदोलन 22/9/1929
6) नागपूर आंदोलन 3/9/1946
7) कालाराम मंदिर आंदोलन 2/3/1930
8) लखनौ आंदोलन 2/3/1947
9) मुखेड का आंदोलन 23/9/1931
2) मोहाली (धुले) आंदोलन 12/2/1939
3) अंबादेवी मंदिर आंदोलन 26/7/1927
4) पुणे कौन्सिल आंदोलन 4/6/1946
5) पर्वती आंदोलन 22/9/1929
6) नागपूर आंदोलन 3/9/1946
7) कालाराम मंदिर आंदोलन 2/3/1930
8) लखनौ आंदोलन 2/3/1947
9) मुखेड का आंदोलन 23/9/1931
🔹बाबासाहब अंबेडकर द्वारा स्थापित सामाजिक संघटन
1) बहिष्कृत हितकारिणी सभा - 20 जुलै 1924
2) समता सैनिक दल - 3 मार्च 1927
2) समता सैनिक दल - 3 मार्च 1927
🔹राजनीतिक संघटन
1) स्वतंत्र मजदूर पार्टी - 16 अगस्त 1936
2) शेड्युल्ड कास्ट फेडरेशन- 19 जुलै 1942
3) रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया- 3 अक्तूबर 1957
1) स्वतंत्र मजदूर पार्टी - 16 अगस्त 1936
2) शेड्युल्ड कास्ट फेडरेशन- 19 जुलै 1942
3) रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया- 3 अक्तूबर 1957
🔹धार्मिक संघटन
1) भारतीय बौद्ध महासभा -
4 मई 1955
1) भारतीय बौद्ध महासभा -
4 मई 1955
🔹शैक्षणिक संघटन
1) डिप्रेस क्लास एज्युकेशन सोसायटी- 14 जून 1928
2) पीपल्स एज्युकेशन सोसायटी- 8 जुलै 1945
3) सिद्धार्थ काॅलेज, मुंबई- 20 जून 1946
4) मिलींद काॅलेज, औरंगाबाद- 1 जून 1950
1) डिप्रेस क्लास एज्युकेशन सोसायटी- 14 जून 1928
2) पीपल्स एज्युकेशन सोसायटी- 8 जुलै 1945
3) सिद्धार्थ काॅलेज, मुंबई- 20 जून 1946
4) मिलींद काॅलेज, औरंगाबाद- 1 जून 1950
🔹अखबार, पत्रिकाएँ
1) मूकनायक- 31 जनवरी 1920
2) बहिष्कृत भारत- 3 अप्रैल 1927
3) समता- 29 जून 1928
4) जनता- 24 नवंबर 1930
5) प्रबुद्ध भारत- 4 फरवरी 1956
1) मूकनायक- 31 जनवरी 1920
2) बहिष्कृत भारत- 3 अप्रैल 1927
3) समता- 29 जून 1928
4) जनता- 24 नवंबर 1930
5) प्रबुद्ध भारत- 4 फरवरी 1956
🔹बाबासाहब अंबेडकर जी ने अपने जिवन में विभिन्न विषयों पर 527 से ज्यादा भाषण दिए।
🔹बाबासाहब अंबेडकर को प्राप्त सम्मान
1) भारतरत्न
2) The Greatest Man in the World (Columbia University)
3) The Universe Maker (Oxford University)
4) The Greatest Indian (CNN IBN & History Tv
2) The Greatest Man in the World (Columbia University)
3) The Universe Maker (Oxford University)
4) The Greatest Indian (CNN IBN & History Tv
🔹बाबासाहब अंबेडकर जी इनकी
निजी किताबें (उनके पास थी)
1) अंग्रेजी साहित्य- 1300 किताबें
2) राजनिती- 3,000 किताबें
3) युद्धशास्त्र- 300 किताबें
4) अर्थशास्त्र- 1100 किताबें
5) इतिहास- 2,600 किताबें
6) धर्म- 2000 किताबें
7) कानून- 5,000 किताबें
8) संस्कृत- 200 किताबें
9) मराठी- 800 किताबें
10) हिन्दी- 500 किताबें
11) तत्वज्ञान (फिलाॅसाफी)- 600 किताबें
12) रिपोर्ट- 1,000
13) संदर्भ साहित्य (रेफरेंस बुक्स)- 400 किताबें
14) पत्र और भाषण- 600
15) जिवनीयाँ (बायोग्राफी)- 1200
16) एनसाक्लोपिडिया ऑफ ब्रिटेनिका- 1 से 29 खंड
17) एनसाक्लोपिडिया ऑफ सोशल सायंस- 1 से 15 खंड
18) कैथाॅलिक एनसाक्लोपिडिया- 1 से 12 खंड
19) एनसाक्लोपिडिया ऑफ एज्युकेशन
20) हिस्टोरियन्स् हिस्ट्री ऑफ दि वर्ल्ड- 1 से 25 खंड
21) दिल्ली में रखी गई किताबें-
बुद्ध धम्म,
पालि साहित्य,
मराठी साहित्य- 2000 किताबें
22) बाकी विषयों की 2305 किताबें
निजी किताबें (उनके पास थी)
1) अंग्रेजी साहित्य- 1300 किताबें
2) राजनिती- 3,000 किताबें
3) युद्धशास्त्र- 300 किताबें
4) अर्थशास्त्र- 1100 किताबें
5) इतिहास- 2,600 किताबें
6) धर्म- 2000 किताबें
7) कानून- 5,000 किताबें
8) संस्कृत- 200 किताबें
9) मराठी- 800 किताबें
10) हिन्दी- 500 किताबें
11) तत्वज्ञान (फिलाॅसाफी)- 600 किताबें
12) रिपोर्ट- 1,000
13) संदर्भ साहित्य (रेफरेंस बुक्स)- 400 किताबें
14) पत्र और भाषण- 600
15) जिवनीयाँ (बायोग्राफी)- 1200
16) एनसाक्लोपिडिया ऑफ ब्रिटेनिका- 1 से 29 खंड
17) एनसाक्लोपिडिया ऑफ सोशल सायंस- 1 से 15 खंड
18) कैथाॅलिक एनसाक्लोपिडिया- 1 से 12 खंड
19) एनसाक्लोपिडिया ऑफ एज्युकेशन
20) हिस्टोरियन्स् हिस्ट्री ऑफ दि वर्ल्ड- 1 से 25 खंड
21) दिल्ली में रखी गई किताबें-
बुद्ध धम्म,
पालि साहित्य,
मराठी साहित्य- 2000 किताबें
22) बाकी विषयों की 2305 किताबें
🔹बाबासाहब जब अमेरिका से भारत लौट आए तब एक बोट दुर्घटना में उनकी सैंकडो किताबें समंदर मे डूबी।
🔹बाबासाहब अंबेडकर जी
1) महान समाजशास्त्री
2) महान अर्थशास्त्री
3) संविधान शिल्पी
4) आधुनिक भारत के मसिहा
5) इतिहास के ज्ञाता और रचियाता
6) मानवंशशास्त्र के ज्ञाता
7) तत्वज्ञानी (फिलाॅसाॅफर)
8) दलितों के और महिला अधिकारों के मसिहा
9) कानून के ज्ञाता (कानून के विशेषज्ञ)
10) मानवाधिकार के संरक्षक
11) महान लेखक
12) पत्रकार
13) संशोधक
14) पाली साहित्य के महान अभ्यासक (अध्ययनकर्ता)
15) बौध्द साहित्य के अध्ययनकर्ता
16) भारत के पहले कानून मंत्री
17) मजदूरों के मसिहा
18) महान राजनितीज्ञ
19) विज्ञानवादी सोच के समर्थक
20) संस्कृत और हिन्दू साहित्य के गहन अध्ययनकर्ता थे।
1) महान समाजशास्त्री
2) महान अर्थशास्त्री
3) संविधान शिल्पी
4) आधुनिक भारत के मसिहा
5) इतिहास के ज्ञाता और रचियाता
6) मानवंशशास्त्र के ज्ञाता
7) तत्वज्ञानी (फिलाॅसाॅफर)
8) दलितों के और महिला अधिकारों के मसिहा
9) कानून के ज्ञाता (कानून के विशेषज्ञ)
10) मानवाधिकार के संरक्षक
11) महान लेखक
12) पत्रकार
13) संशोधक
14) पाली साहित्य के महान अभ्यासक (अध्ययनकर्ता)
15) बौध्द साहित्य के अध्ययनकर्ता
16) भारत के पहले कानून मंत्री
17) मजदूरों के मसिहा
18) महान राजनितीज्ञ
19) विज्ञानवादी सोच के समर्थक
20) संस्कृत और हिन्दू साहित्य के गहन अध्ययनकर्ता थे।
🔹बाबासाहब अंबेडकर की कुछ विशेषताएँ
1) पाणी के लिए आंदोलन करनेवाले विश्व के पहल महापुरुष
2) लंदन विश्वविद्यालय के पुरे लाईब्ररी के किताबों की छानबीन कर उसकी
जानकारी रखनेवाले एकमात्र महामानव
जानकारी रखनेवाले एकमात्र महामानव
3) लंदन विश्वविद्यालय के 200 छात्रों में नंबर 1 का छात्र होने का सम्मान प्राप्त होनेवाले पहले भारतीय
4) विश्व के छह विद्वानों में से एक
5) विश्व में सबसे अधिक पुतले बाबासाहब अंबेडकर जी के हैं।
6) लंदन विश्वविद्यालय मे डी.एस्.सी.
यह उपाधी पानेवाले पहले और आखिरी भारतीय
यह उपाधी पानेवाले पहले और आखिरी भारतीय
7) लंदन विश्वविद्यालय का 8 साल का पाठ्यक्रम 3 सालों मे पूरा
करनेवाले महामानव
करनेवाले महामानव
🔹बाबासाहब अंबेडकर जी के वजह से ही भारत में "रिजर्व बैंक" की स्थापना हुईं।
बाबासाहब अंबेडकर जी ने अपने डाॅक्टर ऑफ सायंस के लिए ' दि प्राॅब्लेम ऑफ रूपी' यह शोध प्रबंध लिखा था। Indian Money & Finance इसके अभ्यास के लिए
ब्रिटिशों ने जो कमिशन चुना था उनको बाबासाहब 🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹
The Battle of Bhima
Koregaon.
ब्रिटिशों ने जो कमिशन चुना था उनको बाबासाहब 🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹
The Battle of Bhima
Koregaon.
पिछली बार जब डायरेक्टर संजय
जायसवाल ने फ़िल्म शूद्रा द राइजिंग बनाया था तब
Sab ने एक होकर उस फ़िल्म को
सिनेमाहालो मल्टीप्लेक्सों में चलने
नहीं दिया जिसकी
वजह से उनको बहुत ज्यादा आर्थिक
नुकशान उठाना पड़ा था। किन्तु उसी
महान अम्बेडकरवादी ने दुबारा
फ़िल्म 500 बनाने का हिम्मत दिखाया है।
जिसमे 1जनवरी 1818 की
सच्ची घटना को दिखाया गया है
जिसमे मात्र 500 जांबाज महार सैनिको ने
देखते ही देखते पेशवाओ
)की 28 हजार
सैनिको के विशाल सेना का संहार कर डाला और
पूरी दुनिया के सामने अपने साहस
और पराक्रम का अदभुत नायाब नमूना पेश किया
और अपने ऊपर सदियो से हुए अत्याचार का
बदला लिया।
इस प्रकार का पराक्रम पूरी दुनिया में
कभी नहीं देखा गया
था।
अगर इस फ़िल्म को भी
मनुवादी दबाने में सफल होते
है जैसे इस कोरे गांव विजय की
घटना को छुपाने में सफल हो गए थे तो लानत
है हमारी एकजुटता पर।
सभी ग्रुप बंद करके अपने अपने
घरो में आराम करो। और अपने निकम्मेपन का
आनंद लो अन्यथा अगर दम है तो इस
फ़िल्म की इतनी
पब्लिसिटी करो की
इसकी सफलता से ं के
होस उडा दे। उन्हें अपनी
एक जुटता का परिचय दो।
ताकी एक डाइरेक्टर उत्साहित
होके हमारे समाज के मुद्दों पर आगे
भी नायाब फिल्में बना सके।
अन्यथा भजन कीर्तन वाले
मनुवादी फिल्मो की क्या
कमी है मार्केट में देखो और
आनंद लो।
इस पोस्ट को इतना शेयर करो इतना शेयर करो
हमारे sc st obc भाई इस मूवी
को देखने जाएँ और जागरुकता लाए
यही हमारी
मनोकामना है
आप भीम वाले हैँ इतना जरुर
करना है आपको
हम लोगोँ को हमारे समाज को जागृत
करना यही हमारा
मीशन है 🙏🙏जय 🌀भीम🙏🙏
जायसवाल ने फ़िल्म शूद्रा द राइजिंग बनाया था तब
Sab ने एक होकर उस फ़िल्म को
सिनेमाहालो मल्टीप्लेक्सों में चलने
नहीं दिया जिसकी
वजह से उनको बहुत ज्यादा आर्थिक
नुकशान उठाना पड़ा था। किन्तु उसी
महान अम्बेडकरवादी ने दुबारा
फ़िल्म 500 बनाने का हिम्मत दिखाया है।
जिसमे 1जनवरी 1818 की
सच्ची घटना को दिखाया गया है
जिसमे मात्र 500 जांबाज महार सैनिको ने
देखते ही देखते पेशवाओ
)की 28 हजार
सैनिको के विशाल सेना का संहार कर डाला और
पूरी दुनिया के सामने अपने साहस
और पराक्रम का अदभुत नायाब नमूना पेश किया
और अपने ऊपर सदियो से हुए अत्याचार का
बदला लिया।
इस प्रकार का पराक्रम पूरी दुनिया में
कभी नहीं देखा गया
था।
अगर इस फ़िल्म को भी
मनुवादी दबाने में सफल होते
है जैसे इस कोरे गांव विजय की
घटना को छुपाने में सफल हो गए थे तो लानत
है हमारी एकजुटता पर।
सभी ग्रुप बंद करके अपने अपने
घरो में आराम करो। और अपने निकम्मेपन का
आनंद लो अन्यथा अगर दम है तो इस
फ़िल्म की इतनी
पब्लिसिटी करो की
इसकी सफलता से ं के
होस उडा दे। उन्हें अपनी
एक जुटता का परिचय दो।
ताकी एक डाइरेक्टर उत्साहित
होके हमारे समाज के मुद्दों पर आगे
भी नायाब फिल्में बना सके।
अन्यथा भजन कीर्तन वाले
मनुवादी फिल्मो की क्या
कमी है मार्केट में देखो और
आनंद लो।
इस पोस्ट को इतना शेयर करो इतना शेयर करो
हमारे sc st obc भाई इस मूवी
को देखने जाएँ और जागरुकता लाए
यही हमारी
मनोकामना है
आप भीम वाले हैँ इतना जरुर
करना है आपको
हम लोगोँ को हमारे समाज को जागृत
करना यही हमारा
मीशन है 🙏🙏जय 🌀भीम🙏🙏
भगवान सिर्फ एक अंधविश्वास है
लोग कहते हैं कि कण कण मे भगवान है, अगर कण कण मे भगवान है तो कण कण मे भ्रष्टाचार क्यों है ?
अगर कण मे कण भगवान है तो लोग जगह जगह अपना मल , मूत्र त्याग कर क्या भगवान को अपवित्र नही बना रहे ?
अगर जर्रे जर्रे मे भगवान है तो क्या लोग टट्टी, पेसाब, भगवान की खोपडी पर कर रहे हैं ?
लोग कहते हैं कि बगैर भगवान की मर्जी के पत्ता भी नही हिलता,
तो क्या भगवान चोरी भी करवाता है?
जब सब कुछ भगवान की मर्जी से होता है तो भगवान बलात्कार भी करवाता होगा ?
डकैती भी डलवाता होगा?
अगर यह सब भगवान ही करवाता है तो कितना निर्दयी है भगवान !
लोग कहते हैं कि भगवान गरीबो, मजलूमों, असहायों की रक्षा करता है ।
तो हिन्दुस्तान की आधे से अधिक आबादी गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने के लिए मजबूर क्यों है ?
भगवान क्यों नही इन्हें अमीर बना देता ?
दुनिया मे हर कहीं असहाय, मजलूम ही प्रताडित हो रहा है , भगवान क्यों नही इनकी मदद करता ?
लोग कहते है कि भगवान दुष्ट, चोर,गुण्डो को सजा देता है।
तो फिर जगह जगह चोरी डकैती, गुण्डागर्दी क्यों हो रही है ?
अगर भगवान इनको रोकने मे सक्षम है तो पुलिस ,सेना, कोर्ट कचहरी क्यों है ?
सच यह है कि भगवान कुछ नही कर सकता ।
आज तो भगवान की खुद शामत आ गयी है ।
आंतकवादी मंदिर, मस्जिद, गुरूद्वारा, चर्च देखकर ब्लास्ट कर रहा है, भगवान अपनी बचत नही कर पा रहा है ।
भगवान की अष्टधातु मूर्तियों को चोर चुरा कर अंतर्राष्ट्रीय बाजार मे बेंच कर करोडो कमा रहा है,
भगवान अपनी रक्षा नही कर पा रहा है ।
कितना बेबस है भगवान !
लोग कहते है कि भगवान दूसरो को पवित्र बनाता है, अपने दर्शन से ।
लेकिन यह भगवान दलितों के छूने से ही छुईमुई के पौधे की तरह खुद सिकुड जाता है ।
दलित के छूने से अपवित्र हो जाता है ।
और फिर गाय, भैंस, बकरी की पाखाना, पिसाब से पवित्र हो जाता है ।
कैसा भगवान है ?
भगवान जब सबसे ताकतवर है तो उसकी सिक्युरिटी मे पुलिस ,, कमाण्डों , सेना क्यों लगायी जाती है ?
किसी भी धार्मिक स्थल पर जाइए, वहां गेट पर सबसे ज्यादा लूले,लंगडे,अपाहिज ,कोढी,लाइन लगाये रहते है,
अंधे को आंख देत ,कोढिन को काया वाला भगवान कहां रहता है, क्यों नही इनकी समस्या दूर कर देता है ?
किसी ने कहा है कि _"इंसान को बनाकर भगवान ने सबसे बडी गल्ती की', या भगवान को बनाकर इंसान ने ।"
उत्तर साफ है कि "भगवान को बनाकर इंसान ने सबसे बडी गल्ती की।"
अगर इंसान ने भगवान की कल्पना नही की होती तो इसके नाम पर इतना ज्यादा लुटता, पिटता नही ।
भगवान सिर्फ एक अंधविश्वास है ।
अगर कण मे कण भगवान है तो लोग जगह जगह अपना मल , मूत्र त्याग कर क्या भगवान को अपवित्र नही बना रहे ?
अगर जर्रे जर्रे मे भगवान है तो क्या लोग टट्टी, पेसाब, भगवान की खोपडी पर कर रहे हैं ?
लोग कहते हैं कि बगैर भगवान की मर्जी के पत्ता भी नही हिलता,
तो क्या भगवान चोरी भी करवाता है?
जब सब कुछ भगवान की मर्जी से होता है तो भगवान बलात्कार भी करवाता होगा ?
डकैती भी डलवाता होगा?
अगर यह सब भगवान ही करवाता है तो कितना निर्दयी है भगवान !
लोग कहते हैं कि भगवान गरीबो, मजलूमों, असहायों की रक्षा करता है ।
तो हिन्दुस्तान की आधे से अधिक आबादी गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने के लिए मजबूर क्यों है ?
भगवान क्यों नही इन्हें अमीर बना देता ?
दुनिया मे हर कहीं असहाय, मजलूम ही प्रताडित हो रहा है , भगवान क्यों नही इनकी मदद करता ?
लोग कहते है कि भगवान दुष्ट, चोर,गुण्डो को सजा देता है।
तो फिर जगह जगह चोरी डकैती, गुण्डागर्दी क्यों हो रही है ?
अगर भगवान इनको रोकने मे सक्षम है तो पुलिस ,सेना, कोर्ट कचहरी क्यों है ?
सच यह है कि भगवान कुछ नही कर सकता ।
आज तो भगवान की खुद शामत आ गयी है ।
आंतकवादी मंदिर, मस्जिद, गुरूद्वारा, चर्च देखकर ब्लास्ट कर रहा है, भगवान अपनी बचत नही कर पा रहा है ।
भगवान की अष्टधातु मूर्तियों को चोर चुरा कर अंतर्राष्ट्रीय बाजार मे बेंच कर करोडो कमा रहा है,
भगवान अपनी रक्षा नही कर पा रहा है ।
कितना बेबस है भगवान !
लोग कहते है कि भगवान दूसरो को पवित्र बनाता है, अपने दर्शन से ।
लेकिन यह भगवान दलितों के छूने से ही छुईमुई के पौधे की तरह खुद सिकुड जाता है ।
दलित के छूने से अपवित्र हो जाता है ।
और फिर गाय, भैंस, बकरी की पाखाना, पिसाब से पवित्र हो जाता है ।
कैसा भगवान है ?
भगवान जब सबसे ताकतवर है तो उसकी सिक्युरिटी मे पुलिस ,, कमाण्डों , सेना क्यों लगायी जाती है ?
किसी भी धार्मिक स्थल पर जाइए, वहां गेट पर सबसे ज्यादा लूले,लंगडे,अपाहिज ,कोढी,लाइन लगाये रहते है,
अंधे को आंख देत ,कोढिन को काया वाला भगवान कहां रहता है, क्यों नही इनकी समस्या दूर कर देता है ?
किसी ने कहा है कि _"इंसान को बनाकर भगवान ने सबसे बडी गल्ती की', या भगवान को बनाकर इंसान ने ।"
उत्तर साफ है कि "भगवान को बनाकर इंसान ने सबसे बडी गल्ती की।"
अगर इंसान ने भगवान की कल्पना नही की होती तो इसके नाम पर इतना ज्यादा लुटता, पिटता नही ।
भगवान सिर्फ एक अंधविश्वास है ।
Wednesday, December 23, 2015
हमारे पास...
हमारे पास...
.................
.................
भीड़ है
संगठन नहीं
संगठन नहीं
वोट की शक्ति है
सत्ता नहीं
सत्ता नहीं
विचार हैं
साहित्य नहीं
साहित्य नहीं
ख़बरें है
अखबार नहीं
अखबार नहीं
सुर्खियां हैं
मिडिया नहीं
मिडिया नहीं
साधन है
संसाधन नहीं
संसाधन नहीं
श्रम है
व्यापार नहीं
व्यापार नहीं
कानून है
न्याय नहीं
न्याय नहीं
संविधान है
अधिकार नहीं
अधिकार नहीं
भूख है
भोजन नहीं
भोजन नहीं
कदम हैं
पगडण्डी नहीं
पगडण्डी नहीं
मंजिल है
रास्ते नहीं
रास्ते नहीं
क्योंकि...
............
............
पाखंड है
धम्म नहीं
धम्म नहीं
गांधी है
अम्बेडकर नहीं
अम्बेडकर नहीं
☝एक बनो नेक बनो
Monday, December 21, 2015
एक लडका अपने पिताजी से सवाल करता है
कुछ जान बची....
एक लडका अपने पिताजी से सवाल करता है....
एक लडका अपने पिताजी से सवाल करता है....
लडका:- पापा मुझे स्कुल में पढाया की ईन्सान पहेले आदिमानव था. ये सच है क्या ?
पापा:- हां बेटा , ईन्सान पहेले आदिमानव था.
लडका:- फिर तो वो शरीर पर कपडे नही पहनते होगे.?
पापा:- नही बेटा, ईन्सान के जीवन मे धीरे-धीरे प्रगती हुई. ईन्सान थोडा थोडा समझने लगे तब पहेले पेड के पत्तो के कपडे पहनने लगे फिर जेसे जेसे उसे समझ आने लगा वेसे वो सूधरता गया ओर अनेक शोध करता गया. अभी जो कुछ भी हम देख रहे है, उपयोग कर रहे है, वो सब कुछ ईन्सान ने ही निर्माण किया है.
लडका:- पापा तो फिर' भगवान पहले थे कि ईन्सान.?
पापा:- बेटा भगवान पहले थे' भगवान दुनिया बनाई है...
पापा:- हां बेटा , ईन्सान पहेले आदिमानव था.
लडका:- फिर तो वो शरीर पर कपडे नही पहनते होगे.?
पापा:- नही बेटा, ईन्सान के जीवन मे धीरे-धीरे प्रगती हुई. ईन्सान थोडा थोडा समझने लगे तब पहेले पेड के पत्तो के कपडे पहनने लगे फिर जेसे जेसे उसे समझ आने लगा वेसे वो सूधरता गया ओर अनेक शोध करता गया. अभी जो कुछ भी हम देख रहे है, उपयोग कर रहे है, वो सब कुछ ईन्सान ने ही निर्माण किया है.
लडका:- पापा तो फिर' भगवान पहले थे कि ईन्सान.?
पापा:- बेटा भगवान पहले थे' भगवान दुनिया बनाई है...
लडका:- फिर पापा एसा केसे. वो भगवान की तस्वीर में तो कपडे, दागीने, त्रिशूल, सोना, भाले, गदा, लड्डू , मोदक, एसे बहुत कुछ-कुछ दिखता है.?
वो समय दागीने बनाने वाला सुनार था क्या ?
कपडे की मील थी क्या?
कपडे की सिलाई के लिये दरजी था क्या ?
भाले, त्रिशूल, गधे, तलवार बनाने वाले कारीगर थे क्या ?
लड्डू मोदक बनाने वाले हलवाई थे क्या ?
वो समय दागीने बनाने वाला सुनार था क्या ?
कपडे की मील थी क्या?
कपडे की सिलाई के लिये दरजी था क्या ?
भाले, त्रिशूल, गधे, तलवार बनाने वाले कारीगर थे क्या ?
लड्डू मोदक बनाने वाले हलवाई थे क्या ?
पापा:-पागलो जेसे सवाल पूछ मत , चुप बेठ !
अरे बेटा, वो भगवान है. वो कुछ भी कर सकते है...
अरे बेटा, वो भगवान है. वो कुछ भी कर सकते है...
लडका :- तो भगवान कहाँ है पापा ?
पापा:- अरे भगवान हमारी आजुबाजु ही है.
लडका:- क्या' भगवान हे यहा-?
पापा :- हा बेटा.
लडका:-तो उन्हे कहो ना शेर-हिरन की चामडी के कपडे पहनने से अच्छा प्रगत कपडे पहने....त्रिशूल भाले गदा तलवार से अब कोई नही डरता , उन्हसे कहो रायफल" मशीनगन" ओर आँटोम बोम्ब" पास रखे...
पापा:- अरे भगवान हमारी आजुबाजु ही है.
लडका:- क्या' भगवान हे यहा-?
पापा :- हा बेटा.
लडका:-तो उन्हे कहो ना शेर-हिरन की चामडी के कपडे पहनने से अच्छा प्रगत कपडे पहने....त्रिशूल भाले गदा तलवार से अब कोई नही डरता , उन्हसे कहो रायफल" मशीनगन" ओर आँटोम बोम्ब" पास रखे...
वैसे तो' जिसने दुनिया बनाई है' जिनकी शाप वाणी मे इतनी ताकत है तो उन्हे गदा तलवार की जरूर क्या है पापा ?
वो तो दयालू ओर क्षमाशील है...?
ओर एक पापा, उन्हे कहो अपने देश का भ्रष्टाचार मिटाने ? किसानो की समस्यावो का समाधान करने, उनकी आत्महत्या रोकने को, 2 साल की छोटी लडकी से 60 साल की ओरत पर रोजाना बलात्कार होते है. वो रोकने को कहो ना . मंदिरो में करोडो-अरबो की संपत्ती है वो लोक कल्यान के लिये देने की बुद्धी वो मंदिर प्रशासन वालो को दे वो कहो ना पापा....
वो तो दयालू ओर क्षमाशील है...?
ओर एक पापा, उन्हे कहो अपने देश का भ्रष्टाचार मिटाने ? किसानो की समस्यावो का समाधान करने, उनकी आत्महत्या रोकने को, 2 साल की छोटी लडकी से 60 साल की ओरत पर रोजाना बलात्कार होते है. वो रोकने को कहो ना . मंदिरो में करोडो-अरबो की संपत्ती है वो लोक कल्यान के लिये देने की बुद्धी वो मंदिर प्रशासन वालो को दे वो कहो ना पापा....
पापा:- बेटा मे तेरे हाथ जोड्ता हुं' बस कर तेरे सवाल. मुझे अब तक नही पता. तो मे तुझे क्या जवाब दु..
मझे बच्चपन से जेसा भगवान दिखाया जेसा धर्म शिकाया वेसे ही पूजा ओर पालन करता आया...
मुझे ये सब नही पता बेटा...पर सब पालन करना पडता है बेटा...नही अच्छा लगता है फिर भी चुप बेठना पडना है..
मझे बच्चपन से जेसा भगवान दिखाया जेसा धर्म शिकाया वेसे ही पूजा ओर पालन करता आया...
मुझे ये सब नही पता बेटा...पर सब पालन करना पडता है बेटा...नही अच्छा लगता है फिर भी चुप बेठना पडना है..
लडका:-यानी आज तक आपने अपनी बुद्धी ओर धैर्या का उपयोग नही किया. पर पापा मे वेसा करूगा नही . सत्य-असत्य जान के ही आगे जाउगा .पर मुझे इतना विश्वास जरूर है. ये सृष्टी का निर्माता जेसे हो वेसे हो , पर सबी धर्म शिखाता है वेसे बिलकुल नही...
ये सुन के पापा का सर नीचे झूक गया ओर लडके से नजर चुराने लगा.
ये सुन के पापा का सर नीचे झूक गया ओर लडके से नजर चुराने लगा.
आज कम संख्या मे हो पर , कभी ना कभी आगे की पिढी के लडके ये सवाल जरूर पूछेगे ध्यान रखो. तब सर झुकाने से अच्छा अभी अपनी गलती सुधार ले. सभी करते ईसलिये मत करो, काम के कारन अच्छा लगे तो ही वो चीज करो..
खुद: को सवाल करो...आगे की वैज्ञानिक पिढी तैयार करो...
जय भिम महान..
खुद: को सवाल करो...आगे की वैज्ञानिक पिढी तैयार करो...
जय भिम महान..
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A boy asks his dad
Thursday, December 17, 2015
भारत के मूल निवासी चूंकि जंगल की रक्षा करते थे इसलिए उन्हें रक्षक या राक्षस कहा गया
आर्यों का मूल स्थान सेन्ट्रल एशिया थाआर्य पशु पालन का काम करते थे
आर्य जब भारतीय उप महाद्वीप में आये तो यहाँ घने जंगल थे
आर्यों को गायों के लिए घास के मैदानों की ज़रूरत थी
मैदान तैयार करने के लिए आर्यों नें जंगलों को आग लगानी शुरू करी
इसे आर्य यज्ञ कहते थे
लेकिन भारतीय मूल निवासी जंगल पर आधारित जीवन जीते थे
इसलिए मूलनिवासी जंगल में लगी हुई आग को बुझा देते थे
इसीलिये आर्य कहते थे कि ये राक्षस हमारे यज्ञ में बाधा डालते हैं
भारत के मूल निवासी चूंकि जंगल की रक्षा करते थे इसलिए उन्हें रक्षक या राक्षस कहा गया
आर्यों के धर्मग्रंथों में राक्षसों का वर्णन ध्यान से पढ़िए
उसमें लिखा गया है कि राक्षस काले रंग के होते थे
राक्षसों के घुंघराले बाल होते थे
राक्षसों के सींग होते थे
राक्षसों का यह वर्णन ठीक आदिवासियों का वर्णन है
भारत के मूल निवासी सांवले रंग के थे
घुंघराले काले बालों वाले थे
आज भी छत्तीसगढ़ के आदिवासी सींग लगा कर नाचते हैं
यज्ञ की अग्नि की रक्षा के लिए राजा का बेटा जंगल में जाता है
राजा का बेटा ताड़का राक्षसनी का वध करता है
ताड़का यानी ताड़ी पीने वाले समुदाय की महिला
ताड़कासुर यानी पेड़ से निकली ताड़ी पीने वाले असुर
यानी आदिवासी
यानी राजा का बेटा भारत के आदिवासियों की हत्या करता है
उसे आर्य ग्रन्थ वीरता की गाथा के रूप में दर्ज करते हैं
और उस राजा के बेटे को अपना राष्ट्रीय आदर्श घोषित करते हैं
और आज भी हर साल ताड़कासुर वध का उत्सव मनाते हैं
मैं आपको यह पुरानी कहानी इसलिए सुना रहा हूँ
ताकि आप यह समझ सकें
कि हमारे शासन द्वारा
आदिवासियों की आज जो हत्याएं करी जा रही हैं
आप उसे क्यों स्वीकार कर लेते हैं ?
असल में आदिवासियों को मार कर उनकी ज़मीनों पर कब्जा कर लेना
हमारी परम्परा है
इस परम्परा को हम अपना धर्म मानते हैं
उदहारण के लिए दो महीने पहले ही
छत्तीसगढ़ के पेद्दा गेलूर गाँव में
हमारे सुरक्षा बलों नें चालीस आदिवासी औरतों पर यौन हमला किया है
तीन महिलाओं नें सोनी सोरी के साथ आकर थाने में बलात्कार की रिपोर्ट लिखवाई है
इनमें एक चौदह साल की बच्ची भी है
लेकिन इस घटना के बाद आज किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया है
लेकिन इस सब का भारत के सभ्य, शिष्ट, और महान संस्कृति के वाहकों के मन में ज़रा सा भी रोष नहीं है
सोनी सोरी के गुप्तांगों में पत्थर भरने पुलिस अधिकारी को भारत के राष्ट्रपति नें वीरता पुरस्कार दिया
उडीसा की आरती मांझी के साथ सुरक्षा बलों नें सामूहिक बलात्कार किया और उसे पांच फर्जी मामलों में फंसा कर जेल में डाल दिया
आरती मांझी पाँचों मामलों में निर्दोष पायी गयी
लेकिन आज तक उसके साथ बलात्कार करने वाले किसी सिपाही के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं करी गयी
पन्द्रह साल की आदिवासी लडकी हिडमे के साथ थाने में बलात्कार कर के उसे सात साल तक जेल में रखा गया और फिर इसी साल उसे निर्दोष घोषित कर के घर भेज दिया
आदिवासी महिला लेधा के साथ पुलिस वालों नें एक महीने तक सामूहिक बलात्कार किया
ऐसा करने वाले पुलिस अधिकारी कल्लूरी को भी
भारत के राष्ट्रपति नें वीरता पुरस्कार दिया
आप कह सकते हैं कि मैं क्यों अतीत का रोना रोने बैठ गया हूँ
बेशक हम अपना वर्तमान बेहतर बना सकते हैं
लेकिन उसकी शुरुआत तो कीजिये
पिछली गलती स्वीकार कर लीजिये
सही रास्ते पर चलने के लिए सहमत हो जाइए
भारत में भी शांति और प्रेम का वातावरण बन सकता है
वरना हमारी नफरत और लालच हमें भयानक हालात में पहुंचा ही देगी
और उसके लिए ज़िम्मेदार कोई और नहीं हम खुद ही होंगे
बेशक हम अपना वर्तमान बेहतर बना सकते हैं
लेकिन उसकी शुरुआत तो कीजिये
पिछली गलती स्वीकार कर लीजिये
सही रास्ते पर चलने के लिए सहमत हो जाइए
भारत में भी शांति और प्रेम का वातावरण बन सकता है
वरना हमारी नफरत और लालच हमें भयानक हालात में पहुंचा ही देगी
और उसके लिए ज़िम्मेदार कोई और नहीं हम खुद ही होंगे
( संदर्भ स्रोत - वोल्गा से गंगा - लेखक राहुल संकृत्यायन, वयं रक्षामः - लेखक आचार्य चतुरसेन, सामाजिक विज्ञान की छठवीं ,सातवीं और आठवीं की इतिहास की एनसीआरटी की पाठ्य पुस्तक )
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Native to India as forest guards or monsters so they were used to protect
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