Monday, December 21, 2015

एक लडका अपने पिताजी से सवाल करता है


 


कुछ जान बची....
एक लडका अपने पिताजी से सवाल करता है....
लडका:- पापा मुझे स्कुल में पढाया की ईन्सान पहेले आदिमानव था. ये सच है क्या ?
पापा:- हां बेटा , ईन्सान पहेले आदिमानव था.
लडका:- फिर तो वो शरीर पर कपडे नही पहनते होगे.?
पापा:- नही बेटा, ईन्सान के जीवन मे धीरे-धीरे प्रगती हुई. ईन्सान थोडा थोडा समझने लगे तब पहेले पेड के पत्तो के कपडे पहनने लगे फिर जेसे जेसे उसे समझ आने लगा वेसे वो सूधरता गया ओर अनेक शोध करता गया. अभी जो कुछ भी हम देख रहे है, उपयोग कर रहे है, वो सब कुछ ईन्सान ने ही निर्माण किया है.
लडका:- पापा तो फिर' भगवान पहले थे कि ईन्सान.?
पापा:- बेटा भगवान पहले थे' भगवान दुनिया बनाई है...
लडका:- फिर पापा एसा केसे. वो भगवान की तस्वीर में तो कपडे, दागीने, त्रिशूल, सोना, भाले, गदा, लड्डू , मोदक, एसे बहुत कुछ-कुछ दिखता है.?
वो समय दागीने बनाने वाला सुनार था क्या ?
कपडे की मील थी क्या?
कपडे की सिलाई के लिये दरजी था क्या ?
भाले, त्रिशूल, गधे, तलवार बनाने वाले कारीगर थे क्या ?
लड्डू मोदक बनाने वाले हलवाई थे क्या ?
पापा:-पागलो जेसे सवाल पूछ मत , चुप बेठ !
अरे बेटा, वो भगवान है. वो कुछ भी कर सकते है...
लडका :- तो भगवान कहाँ है पापा ?
पापा:- अरे भगवान हमारी आजुबाजु ही है.
लडका:- क्या' भगवान हे यहा-?
पापा :- हा बेटा.
लडका:-तो उन्हे कहो ना शेर-हिरन की चामडी के कपडे पहनने से अच्छा प्रगत कपडे पहने....त्रिशूल भाले गदा तलवार से अब कोई नही डरता , उन्हसे कहो रायफल" मशीनगन" ओर आँटोम बोम्ब" पास रखे...
वैसे तो' जिसने दुनिया बनाई है' जिनकी शाप वाणी मे इतनी ताकत है तो उन्हे गदा तलवार की जरूर क्या है पापा ?
वो तो दयालू ओर क्षमाशील है...?
ओर एक पापा, उन्हे कहो अपने देश का भ्रष्टाचार मिटाने ? किसानो की समस्यावो का समाधान करने, उनकी आत्महत्या रोकने को, 2 साल की छोटी लडकी से 60 साल की ओरत पर रोजाना बलात्कार होते है. वो रोकने को कहो ना . मंदिरो में करोडो-अरबो की संपत्ती है वो लोक कल्यान के लिये देने की बुद्धी वो मंदिर प्रशासन वालो को दे वो कहो ना पापा....
पापा:- बेटा मे तेरे हाथ जोड्ता हुं' बस कर तेरे सवाल. मुझे अब तक नही पता. तो मे तुझे क्या जवाब दु..
मझे बच्चपन से जेसा भगवान दिखाया जेसा धर्म शिकाया वेसे ही पूजा ओर पालन करता आया...
मुझे ये सब नही पता बेटा...पर सब पालन करना पडता है बेटा...नही अच्छा लगता है फिर भी चुप बेठना पडना है..
लडका:-यानी आज तक आपने अपनी बुद्धी ओर धैर्या का उपयोग नही किया. पर पापा मे वेसा करूगा नही . सत्य-असत्य जान के ही आगे जाउगा .पर मुझे इतना विश्वास जरूर है. ये सृष्टी का निर्माता जेसे हो वेसे हो , पर सबी धर्म शिखाता है वेसे बिलकुल नही...
ये सुन के पापा का सर नीचे झूक गया ओर लडके से नजर चुराने लगा.
आज कम संख्या मे हो पर , कभी ना कभी आगे की पिढी के लडके ये सवाल जरूर पूछेगे ध्यान रखो. तब सर झुकाने से अच्छा अभी अपनी गलती सुधार ले. सभी करते ईसलिये मत करो, काम के कारन अच्छा लगे तो ही वो चीज करो..
खुद: को सवाल करो...आगे की वैज्ञानिक पिढी तैयार करो...
जय भिम महान..
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A boy asks his dad

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