Thoughts

आप चाहे कितने भी पवित्र शब्दों को पढ़ या बोल लें, लेकिन जब तक उनपर अमल नहीं करते उसका कोई फायदा नहीं है | -गौतम बुद्ध

विद्येविना मती गेली , मती विना नीती गेली ।
नितीविना गती गेली, गतीविना  वित्त गेले ।

अन वित्तविना  शुद्र खचले
इतके अनर्थ एका अविद्येने केले ।


भारताचा इतिहास , समस्या आणि उपाय फक्त तीन ओळीत मांडणारा महान साहित्यिक , राष्ट्रपिता जोतीराव फुले यांच्या जयंतीस विनम्र अभिवादन 


आभाळाने नाकारलेल्या पंखांना उड्डाणाचे सामर्य्थे देणाऱ्या हे महामानवा.....! तुझे विचार आमचे आचार होवोत!

15 GREAT THOUGHTS BY CHANAKYA


1) "Learn from the mistakes of
others... you can't live long
enough to make them all
yourselves!!"


2)"A person should not be too
honest. Straight trees are cut first
and Honest people are screwed
first."
...


3)"Even if a snake is not
poisonous, it should pretend to be
venomous."


4)"There is some self-interest
behind every friendship. There is
no friendship without self-
interests. This is a bitter truth."


5)" Before you start some work,
always ask yourself three
questions - Why am I doing it,
What the results might be and Will
I be successful. Only when you
think deeply and find satisfactory
answers to these questions, go
ahead."


6)"As soon as the fear approaches
near, attack and destroy it."


7)"The world's biggest power is
the youth and beauty of a
woman."


8)"Once you start a working on
something, don't be afraid of
failure and don't abandon it.
People who work sincerely are the
happiest."


9)"The fragrance of flowers
spreads only in the direction of
the wind. But the goodness of a
person spreads in all direction."


10)"God is not present in idols.
Your feelings are your god. The
soul is your temple."


11) "A man is great by deeds, not
by birth."


12) "Never make friends with
people who are above or below
you in status. Such friendships
will never give you any
happiness."


13) "Treat your kid like a darling
for the first five years. For the
next five years, scold them. By the
time they turn sixteen, treat them
like a friend. Your grown up
children are your best friends."


14) "Books are as useful to a
stupid person as a mirror is useful
to a blind person."


15) "Education is the Best Friend.
An Educated Person is Respected
Everywhere. Education beats the
Beauty and the Youth."


If you ''Like'' it Share with your
Friends.

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डॉ. बी. आर.  अम्बेडकर  के अनमोल विचार 

Quote 1: A great man is different from an eminent one in In that he is ready to be the servant of the society.
In Hindi: एक  महान  आदमी  एक  प्रतिष्ठित  आदमी  से  इस  तरह  से  अलग  होता  है  कि  वह  समाज  का  नौकर  बनने  को  तैयार  रहता  है .
B. R. Ambedkar  बी. आर.  अम्बेडकर
Quote 2: People and their religion must be judged by social standards based on social ethics. No other standard would have any meaning if religion is held to be necessary good for the well-being of the people.
In Hindi: लोग  और  उनके  धर्म  सामाजिक मानकों  द्वारा;  सामजिक  नैतिकता  के  आधार  पर  परखे  जाने  चाहिए . अगर  धर्म  को  लोगो  के  भले  के  लिए  आवशयक  मान  लिया  जायेगा तो  और    किसी  मानक  का  मतलब  नहीं  होगा .
B. R. Ambedkar  बी. आर.  अम्बेडकर
Quote 3: Cultivation of mind should be the ultimate aim of human existence.
In Hindi: बुद्धि  का   विकास  मानव  के  अस्तित्व  का  अंतिम  लक्ष्य   होना  चाहिए .
B. R. Ambedkar  बी. आर.  अम्बेडकर
Quote 4: Every man who repeats the dogma of Mill that one country is no fit to rule another country must admit that one class is not fit to rule another class.
In Hindi: हर  व्यक्ति  जो  मिल  के  सिद्धांत  कि  एक  देश  दूसरे  देश  पर  शाशन  नहीं  कर  सकता  को  दोहराता  है  उसे  ये  भी स्वीकार  करना  चाहिए  कि  एक  वर्ग  दूसरे  वर्ग  पर  शाशन  नहीं  कर  सकता .
B. R. Ambedkar  बी. आर.  अम्बेडकर
Quote 5: For a successful revolution it is not enough that there is discontent. What is required is a profound and thorough conviction of the justice, necessity and importance of political and social rights.
In Hindi: एक  सफल  क्रांति  के लिए  सिर्फ  असंतोष  का  होना  पर्याप्त  नहीं  है .जिसकी  आवश्यकता   है  वो  है  न्याय  एवं   राजनीतिक  और  सामाजिक  अधिकारों  में  गहरी  आस्था.
B. R. Ambedkar  बी. आर.  अम्बेडकर
Quote 6: History shows that where ethics and economics come in conflict, victory is always with economics. Vested interests have never been known to have willingly divested themselves unless there was sufficient force to compel them.
In Hindi: इतिहास  बताता  है  कि  जहाँ  नैतिकता  और  अर्थशाश्त्र   के  बीच  संघर्ष  होता  है  वहां  जीत  हमेशा  अर्थशाश्त्र   की  होती  है . निहित  स्वार्थों   को  तब  तक  स्वेच्छा  से  नहीं  छोड़ा   गया  है  जब  तक  कि  मजबूर  करने  के  लिए  पर्याप्त  बल  ना  लगाया  गया  हो .
B. R. Ambedkar  बी. आर.  अम्बेडकर
Quote 7: I like the religion that teaches liberty, equality and fraternity.
In Hindi: मैं  ऐसे  धर्म  को  मानता  हूँ  जो  स्वतंत्रता , समानता , और  भाई -चारा  सीखाये .
B. R. Ambedkar  बी. आर.  अम्बेडकर
Quote 8: I measure the progress of a community by the degree of progress which women have achieved.
In Hindi: मैं  किसी  समुदाय  की  प्रगति  महिलाओं  ने  जो  प्रगति  हांसिल  की  है  उससे  मापता  हूँ .
B. R. Ambedkar  बी. आर.  अम्बेडकर
Quote 9: In Hinduism, conscience, reason and independent thinking have no scope for development.
In Hindi: हिंदू धर्म में, विवेक, कारण, और स्वतंत्र सोच के विकास के लिए कोई गुंजाइश नहीं है.
B. R. Ambedkar  बी. आर.  अम्बेडकर
Quote 10: Indians today are governed by two different ideologies. Their political ideal set in the preamble of the Constitution affirms a life of liberty, equality and fraternity. Their social ideal embodied in their religion denies them.
In Hindi: आज  भारतीय  दो  अलग -अलग  विचारधाराओं  द्वारा  शाशित  हो  रहे  हैं . उनके  राजनीतिक  आदर्श  जो  संविधान  के  प्रस्तावना  में  इंगित  हैं  वो  स्वतंत्रता  , समानता , और  भाई -चारे  ko स्थापित  करते  हैं . और  उनके  धर्म  में  समाहित  सामाजिक  आदर्श  इससे  इनकार  करते  हैं .
B. R. Ambedkar  बी. आर.  अम्बेडकर
Quote 11: Law and order are the medicine of the body politic and when the body politic gets sick, medicine must be administered.
In Hindi: क़ानून  और  व्यवस्था  राजनीतिक  शरीर  की  दवा  है  और  जब  राजनीतिक  शरीर  बीमार  पड़े  तो  दवा  ज़रूर  दी  जानी  चाहिए .
B. R. Ambedkar  बी. आर.  अम्बेडकर
Quote 12: Life should be great rather than long.
In Hindi: जीवन  लम्बा  होने  की  बजाये  महान  होना  चाहिए .
B. R. Ambedkar  बी. आर.  अम्बेडकर
Quote 13: Men are mortal. So are ideas. An idea needs propagation as much as a plant needs watering. Otherwise both will wither and die.
In Hindi: मनुष्य  नश्वर  है . उसी  तरह  विचार  भी  नश्वर  हैं . एक  विचार  को  प्रचार -प्रसार  की   ज़रुरत  होती  है , जैसे  कि  एक  पौधे  को  पानी  की . नहीं  तो  दोनों  मुरझा  कर  मर  जाते हैं .
B. R. Ambedkar  बी. आर.  अम्बेडकर
Quote 14: Political tyranny is nothing compared to the social tyranny and a reformer who defies society is a more courageous man than a politician who defies Government.
In Hindi: राजनीतिक  अत्याचार  सामाजिक  अत्याचार  की  तुलना  में  कुछ  भी  नहीं  है  और  एक  सुधारक  जो  समाज  को  खारिज  कर  देता  है  वो   सरकार  को  ख़ारिज  कर  देने  वाले   राजनीतिज्ञ  से  कहीं अधिक  साहसी  हैं .
B. R. Ambedkar  बी. आर.  अम्बेडकर
Quote 15: So long as you do not achieve social liberty, whatever freedom is provided by the law is of no avail to you.
In Hindi: जब  तक  आप  सामाजिक  स्वतंत्रता  नहीं  हांसिल  कर  लेते  , क़ानून  आपको  जो भी  स्वतंत्रता  देता  है  वो  आपके  किसी  काम  की  नहीं .
B. R. Ambedkar  बी. आर.  अम्बेडकर
Quote 16: The relationship between husband and wife should be one of closest friends.
In Hindi: पति- पत्नी  के  बीच  का  सम्बन्ध   घनिष्ट  मित्रों  के  सम्बन्ध   के  सामान  होना  चाहिए .
B. R. Ambedkar  बी. आर.  अम्बेडकर
Quote 17: The sovereignty of scriptures of all religions must come to an end if we want to have a united integrated modern India.
In Hindi: यदि  हम  एक   संयुक्त  एकीकृत  आधुनिक  भारत  चाहते  हैं  तो  सभी  धर्मों  के  शाश्त्रों  की  संप्रभुता  का  अंत  होना  चाहिए .
B. R. Ambedkar  बी. आर.  अम्बेडकर
Quote 18: Unlike a drop of water which loses its identity when it joins the ocean, man does not lose his being in the society in which he lives. Man’s life is independent. He is born not for the development of the society alone, but for the development of his self.
In Hindi: सागर  में  मिलकर  अपनी  पहचान  खो  देने  वाली  पानी  की  एक  बूँद  के  विपरीत , इंसान  जिस  समाज  में  रहता  है  वहां  अपनी  पहचान  नहीं  खोता . इंसान  का  जीवन  स्वतंत्र  है . वो  सिर्फ  समाज  के  विकास  के  लिए  नहीं  पैदा  हुआ   है , बल्कि  स्वयं  के  विकास  के  लिए  पैदा  हुआ   है  .
B. R. Ambedkar  बी. आर.  अम्बेडकर
Quote 19: We are Indians, firstly and lastly.
In Hindi: हम  भारतीय  हैं , पहले  और   अंत  में .
B. R. Ambedkar  बी. आर.  अम्बेडकर
Quote 20: What are we having this liberty for? We are having this liberty in order to reform our social system, which is full of inequality, discrimination and other things, which conflict with our fundamental rights.
In Hindi: हमारे  पास  यह  स्वतंत्रता  किस  लिए  है ? हमारे  पास  ये  स्वत्नत्रता  इसलिए  है  ताकि  हम  अपने  सामाजिक  व्यवस्था , जो  असमानता , भेद-भाव  और  अन्य   चीजों  से  भरी  है , जो  हमारे  मौलिक  अधिकारों  से  टकराव  में  है  को  सुधार  सकें.

9 comments :

Bahujan Nayak said...

"भविष्याचा धर्म हा विश्वव्यापी धर्म
राहणार आहे.
त्यामुळे माणसाचा वैयक्तिक ईश्वर
मागे पडून आणि धार्मिक कट्टरता
तसेच धर्मशास्र या गोष्टी मागे पडतील.
तो धर्म भौतिकआणि आध्यात्मिक
या दोन्ही विषयांना व्यापेल
आणि तो धार्मिकदृष्टीने भौतिक आणि
आध्यात्मिक बाबीँचे ऐक्य निर्माण
करणारा अर्थपूर्ण असेल.
बौध्द धर्म हा वरील कसोट्यांना
पूर्णपणे उतरतो आणि जर
कोणता धर्म आधूनिक
विज्ञानाच्या कल्पनांशी सूसंगत असेल
तर तो बौध्द धर्मच होय.
बौद्ध धर्मात मानवाला व आधुनिक
विज्ञानाला पडलेल्या सर्व गरजा
भागविण्याचे सामर्थ्य आहे.
माझा जन्म ख्रिश्चन धर्मात
झालेला असला तरी मी धार्मिक
व्यक्ति नाहीय.
परंतू जर मी तसा(धार्मिक) झालो तर
मी बौध्दच होईल !"
--अल्बर्ट आइनस्टाईन..

Bahujan Nayak said...

एक दिन बुद्ध प्रातः भिक्षुओं की सभा में पधारे. सभा में प्रतीक्षारत उनके शिष्य यह देख चकित हुए कि बुद्ध पहली बार अपने हाथ में कुछ लेकर आये थे. उनके हाथ में एक रूमाल था. बुद्ध के हाथ में रूमाल देखकर सभी समझ गए कि इसका कुछ विशेष प्रयोजन होगा.

बुद्ध अपने आसन पर विराजे. उन्होंने किसी से कुछ न कहा और रूमाल में कुछ दूरी पर पांच गांठें लगा दीं.

सब उपस्थित यह देख मन में सोच रहे थे कि अब बुद्ध क्या करेंगे, क्या कहेंगे. बुद्ध ने उनसे पूछा, “कोई मुझे यह बता सकता है कि क्या यह वही रूमाल है जो गांठें लगने के पहले था?”

शारिपुत्र ने कहा, “इसका उत्तर देना कुछ कठिन है. एक तरह से देखें तो रूमाल वही है क्योंकि इसमें कोई परिवर्तन नहीं हुआ है. दूसरी दृष्टि से देखें तो पहले इसमें पांच गांठें नहीं लगीं थीं अतः यह रूमाल पहले जैसा नहीं रहा. और जहाँ तक इसकी मूल प्रकृति का प्रश्न है, वह अपरिवर्तित है. इस रूमाल का केवल बाह्य रूप ही बदला है, इसका पदार्थ और इसकी मात्रा वही है.”

“तुम सही कहते हो, शारिपुत्र”, बुद्ध ने कहा, “अब मैं इन गांठों को खोल देता हूँ”, यह कहकर बुद्ध रूमाल के दोनों सिरों को एक दूसरे से दूर खींचने लगे. “तुम्हें क्या लगता है, शारिपुत्र, इस प्रकार खींचने पर क्या मैं इन गांठों को खोल पाऊंगा?”

“नहीं, तथागत. इस प्रकार तो आप इन गांठों को और अधिक सघन और सूक्ष्म बना देंगे और ये कभी नहीं खुलेंगीं”, शारिपुत्र ने कहा.

“ठीक है”, बुद्ध बोले, “अब तुम मेरे अंतिम प्रश्न का उत्तर दो कि इन गांठों को खोलने के लिए मुझे क्या करना चाहिए?”

शारिपुत्र ने कहा, “तथागत, इसके लिए मुझे सर्वप्रथम निकटता से यह देखना होगा कि ये गांठें कैसे लगाई गयीं हैं. इसका ज्ञान किये बिना मैं इन्हें खोलने का उपाय नहीं बता सकता”.

“तुम सत्य कहते हो, शारिपुत्र. तुम धन्य हो, क्योंकि यही जानना सबसे आवश्यक है. आधारभूत प्रश्न यही है. जिस समस्या में तुम पड़े हो उससे बाहर निकलने के लिए यह जानना ज़रूरी है कि तुम उससे ग्रस्त क्योंकर हुए. यदि तुम यह बुनियादी व मौलिक परीक्षण नहीं करोगे तो संकट अधिक ही गहराएगा”.

“लेकिन विश्व में सभी ऐसा ही कर रहे हैं. वे पूछते हैं, “हम काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार, परिग्रह, आदि-आदि वृत्तियों से बाहर कैसे निकलें”, लेकिन वे यह नहीं पूछते कि “हम इन वृत्तियों में कैसे पड़े?”

Bahujan Nayak said...

“MR NEHRU, POLITICS IS A GAME FOR YOU, BUT IT IS A MISSION FOR ME - Dr. Ambedkar

Bahujan Nayak said...

https://www.facebook.com/groups/469856393098004/590583854358590/?ref=notif&notif_t=group_activity

Bahujan Nayak said...

“अपनी दुर्दशा के लिए दूसरों को उत्तरदायी ठहराने से यह पता चलता है कि व्यक्ति में सुधार की आवश्यकता है,स्वयं को दोषी ठहराने से यह पता चलता है कि सुधार आरंभ हो गया है,और किसी को भी दोषी नहीं ठहराने का अर्थ यह है कि सुधार पूर्ण हो चुका है|”… महामानव गौतम बुद्ध

Bahujan Nayak said...

गौतम बुद्ध ने धर्म का आधार श्रद्धा और विध्वस नहीं रखा बल्कि तर्क और अनुभव रखा, आओ बुद्ध की नज़र से धर्म को समझें

Bahujan Nayak said...

बुद्धि का विकास ही मानव जीवन का अंतिम लक्ष्य है और याद रहे जब तक आपने अपनी बुद्धि को ज्ञान से विकसित नहीं किया दुनिया की कोई राजनीतिज्ञ,राजा, देव, देवी,ईश्वर, धर्म या महापुरुष और कर्मकांड आपको मुक्ति नहीं दिला सकता| ध्यान रहे पढ़ो और ज्ञान बढ़ाओ, बेहतर जिंदगी का रास्ता बेहतर किताबों से होकर गुज़रता है| अप्प दीपो भव अर्थात अपना मार्गदर्शक स्वेव बनो ….समयबुद्धा

Bahujan Nayak said...

मनुवादी गधो का ढोंग:-
गाय माता कैसे हो सकती है ?
1- गाय के नाक, मुंह और गले में रस्सी बांधते हैं, क्या कोई अपनी माँ के साथ ऐसा करता है ?
2- स्वयं अच्छी सब्जियां खाते हैं और माता को घास खिलाते हैं!
3- माता को सांड के पास ले जाते हैं और खुद सामने खड़े रहते हैं क्या कोई इस तरह अपनी माँ के साथ करता है ?
4- जब तक दूध देती है तो बहुत ख्याल रखते हैं और जब बंद कर देती है तो बे यार व मददगार छोड़ देते हैं।
5.- उसका मूत्र पीते हैं क्या कोई अपनी माँ का पेशाब पीता है ?
6- बूढ़ी होने पर कुछ सिक्कों के बदले क़साई के हवाले कर देते हैं क्या कोई अपनी माँ को बेचता है ?
7- गाय से पैदा हुए बैल से खेत जोतते हैं और उस पर बोझ डालते हैं क्या कोई अपने भाई के साथ ऐसा करता है ? और उसकी बच्ची को भी माता कहते हैं क्या कोई अपनी बहिन को माता कहता है ?
8- उसके चमड़े से चप्पल और जूता बनाते हैं क्या कोई अपनी माँ के साथ ऐसा करता है ?
9- जब उनका खेत खा लेती है तो डंडे से उसको मारते हैं क्या कोई अपनी माँ के साथ ऐसा करता है ?
10- अपने नर्म बिस्तर पर सोते हैं और उसे खम्भे में बांधते हैं क्या कोई अपनी माँ के साथ ऐसा करता है ?
गाय माँ कैसे हो सकती है?

(नोट:-गाय को माँ कहना मतलब इन मनुवादी लोगो के हराम के खाने के चोंचले है। जब तक गाय दूध देती है तब तक ठीक है। जब गाय दूध देना बंद कर देती है तब ये लोग अपनी गाय माँ को सड़को पर फेंक देते है।)

Bahujan Nayak said...

"कोई समुदाय स्वयं को केवल तभी गतिमान रख सकता है जब वह राजसत्ता पर अपना नियंत्रणकारी प्रभाव रख सकने लायक हो। राजसत्ता पर नियंत्रणकारी प्रभाव रख कर मामुली से मामुली जनसंख्या वाला अल्पमत समुदाय भी किस तरह समाज मेँ अपनी सर्वोच्च हैसियत बरकरार रख सकता है, भारत मेँ ब्राह्मणोँ की वर्चस्वपूर्ण स्थिति इस की जीती – जागती मिसाल है। राजसत्ता पर.नियंत्रणकारी प्रभाव निहायत जरुरी है क्योँकि इसके बिना राज्य की नीति को एक दिशा देना संभव नही है, और प्रगती का सारा दारोमदार तो राज्य की नीति पर ही होता है।" — ङाँ. बाबासाहब आंबेङकर