Sunday, January 3, 2016

भारतीय संविधान की शुरवात कैसे की जाय

..जोरदार जानकारी... " स्वतंत्र भारत के पहीले ही मतदान मे पत्थर व मिट्टी के
"भगवान" की हार और "मानवता" की जीत" व 100% सही
'भारतिय संविधान' की जीत अवश्य पढीये !
!!भारतिय संविधान के शिल्पकार
विश्वरत्न डॉ.बाबासाहाब आबेडकर !!
देश स्वतंत्र होने के बाद भारत का संविधान कोन बनायेंगा
इसकी खोज शुरू हुयी !
गांधी व पंडीत नेहरू ब्रिटीशो के पास गये और ब्रिटीशो से
कहा हमे भारत का संविधान बनाना है !
ब्रिटीशो ने कहा हम आपके देश का संविधान कैसे बना
सकते है इस देश मे अनेक जातीया है अनेक धर्म है
यदि कोई भारत का संविधान बना सकता है तो तुम्हारे देश
मे एक ही हिरा है और वो हिरा है
डॉ. बी.आर.आंबेडकर !
इसलिये कांग्रेस व गांधी को मजबुरन
डॉ. बाबासाहाब आंबेडकर को संविधान समिती पर लेना
पडा !
इस कार्य के लिये सात सदस्य की समिती गठीत कि गयी !
1. सदस्य बिमार पड गया !
2. सदस्य विदेश चला गया !
3. सदस्य अपने खाजगी काम मे व्यस्त रहा !
4. सदस्य राजनिती मे व्यस्त रहा !
5. सदस्य की मृत्यृ हो गयी !
6. सदस्य को बाबासाहाब का असपृश्य होना गवारा नही
था !
7. अंत मे डॉ.बाबासाहाब आंबेडकर ने 21-21 घंटे अभ्यास
करके भारतीय संविधान का मसौदा तैयार किया !
आगे संविधान सभा मे प्रश्न चर्चासत्र के लिये आया !
भारतीय संविधान की शुरवात कैसे की जाय !
1. मौलाना हजरत मोहली उठ खडे हुये और बोले
भारतीय संविधान की शुरवात
" अल्लाह" के नाम से की जाय !
२.पंडीत मदन मोहन मालविय खडे हुये और बोले
"ओम नमो शिवाय " के नाम से की जाय !
3. एच.पी.कामत उठ खडे हुये और बोले
" ईश्वर" के नाम से की जाय !
4. डॉ.बाबासाहाब आंबेडकर उठ खडे हुये और बोले
भारतीय संविधान की शुरवात
"लोगो" के नाम से की जाय !
इस मुद्दे पर संसद मे मतदान हुआ
"68 मत लोगो" के नाम के लिये मिले !
और "41 मत भगवान (देवताओ) के नाम के लिये मिले !
और संविधान की शुरवात
" We the people of India "
" हम भारत के लोग "
ऐसे शुरू हुयी !
भारत के पहीले ही मतदान मे "पत्थर" के "भगवान" हार गये
और मानव
( लोग) जित गये !
डॉ बाबासाहाब आंबेडकर जित गये
आगे बाबासाहाब को ये समझ आया की आगे चलकर इस देश
का नाम
"हिन्दुस्थान" करेंगे इसलिये बाबासाहाब ने भारतीय
संविधान की कलम
"395 मे "A" के अनुसार अनुवाद किया
" India that is the "BHARAT"
" INDIA"
याने "भारत" ऐसे पुष्टी कर दी

Thursday, December 31, 2015

Need to Purchase

Congressne Ani Gandhijinni Akhand Bharat Ka Nakarala

I need to Purchase this as soon as possible : Sheshrao More 

Sunday, December 27, 2015

डॉ बाबासाहब अंबेडकर

डॉ बाबासाहब अंबेडकर 9 भाषाएँ जानते थे।
1) मराठी (मातृभाषा)
2) हिन्दी
3) संस्कृत
4) गुजराती
5) अंग्रेज़ी
6) पारसी
7) जर्मन
8) फ्रेंच
9) पाली
उन्होंने पाली व्याकरण और शब्दकोष (डिक्शनरी) भी लिखी थी, जो महाराष्ट्र सरकार ने "Dr.Babasaheb Ambedkar Writing and
Speeches Vol.16 "में प्रकाशित की हैं।
🔹 बाबासाहब अंबेडकर जी ने संसद में पेश किए हुए विधेयक
1) महार वेतन बिल
2) हिन्दू कोड बिल
3) जनप्रतिनिधि बिल
4) खोती बिल
5) मंत्रीओं का वेतन बिल
6) मजदूरों के लिए वेतन (सैलरी) बिल
7) रोजगार विनिमय सेवा
8) पेंशन बिल
9) भविष्य निर्वाह निधी (पी.एफ्.)
🔹 बाबासाहब के सत्याग्रह (आंदोलन)
1) महाड आंदोलन 20/3/1927
2) मोहाली (धुले) आंदोलन 12/2/1939
3) अंबादेवी मंदिर आंदोलन 26/7/1927
4) पुणे कौन्सिल आंदोलन 4/6/1946
5) पर्वती आंदोलन 22/9/1929
6) नागपूर आंदोलन 3/9/1946
7) कालाराम मंदिर आंदोलन 2/3/1930
8) लखनौ आंदोलन 2/3/1947
9) मुखेड का आंदोलन 23/9/1931
🔹बाबासाहब अंबेडकर द्वारा स्थापित सामाजिक संघटन
1) बहिष्कृत हितकारिणी सभा - 20 जुलै 1924
2) समता सैनिक दल - 3 मार्च 1927
🔹राजनीतिक संघटन
1) स्वतंत्र मजदूर पार्टी - 16 अगस्त 1936
2) शेड्युल्ड कास्ट फेडरेशन- 19 जुलै 1942
3) रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया- 3 अक्तूबर 1957
🔹धार्मिक संघटन
1) भारतीय बौद्ध महासभा -
4 मई 1955
🔹शैक्षणिक संघटन
1) डिप्रेस क्लास एज्युकेशन सोसायटी- 14 जून 1928
2) पीपल्स एज्युकेशन सोसायटी- 8 जुलै 1945
3) सिद्धार्थ काॅलेज, मुंबई- 20 जून 1946
4) मिलींद काॅलेज, औरंगाबाद- 1 जून 1950
🔹अखबार, पत्रिकाएँ
1) मूकनायक- 31 जनवरी 1920
2) बहिष्कृत भारत- 3 अप्रैल 1927
3) समता- 29 जून 1928
4) जनता- 24 नवंबर 1930
5) प्रबुद्ध भारत- 4 फरवरी 1956
🔹बाबासाहब अंबेडकर जी ने अपने जिवन में विभिन्न विषयों पर 527 से ज्यादा भाषण दिए।
🔹बाबासाहब अंबेडकर को प्राप्त सम्मान
1) भारतरत्न
2) The Greatest Man in the World (Columbia University)
3) The Universe Maker (Oxford University)
4) The Greatest Indian (CNN IBN & History Tv
🔹बाबासाहब अंबेडकर जी इनकी
निजी किताबें (उनके पास थी)
1) अंग्रेजी साहित्य- 1300 किताबें
2) राजनिती- 3,000 किताबें
3) युद्धशास्त्र- 300 किताबें
4) अर्थशास्त्र- 1100 किताबें
5) इतिहास- 2,600 किताबें
6) धर्म- 2000 किताबें
7) कानून- 5,000 किताबें
8) संस्कृत- 200 किताबें
9) मराठी- 800 किताबें
10) हिन्दी- 500 किताबें
11) तत्वज्ञान (फिलाॅसाफी)- 600 किताबें
12) रिपोर्ट- 1,000
13) संदर्भ साहित्य (रेफरेंस बुक्स)- 400 किताबें
14) पत्र और भाषण- 600
15) जिवनीयाँ (बायोग्राफी)- 1200
16) एनसाक्लोपिडिया ऑफ ब्रिटेनिका- 1 से 29 खंड
17) एनसाक्लोपिडिया ऑफ सोशल सायंस- 1 से 15 खंड
18) कैथाॅलिक एनसाक्लोपिडिया- 1 से 12 खंड
19) एनसाक्लोपिडिया ऑफ एज्युकेशन
20) हिस्टोरियन्स् हिस्ट्री ऑफ दि वर्ल्ड- 1 से 25 खंड
21) दिल्ली में रखी गई किताबें-
बुद्ध धम्म,
पालि साहित्य,
मराठी साहित्य- 2000 किताबें
22) बाकी विषयों की 2305 किताबें
🔹बाबासाहब जब अमेरिका से भारत लौट आए तब एक बोट दुर्घटना में उनकी सैंकडो किताबें समंदर मे डूबी।
🔹बाबासाहब अंबेडकर जी
1) महान समाजशास्त्री
2) महान अर्थशास्त्री
3) संविधान शिल्पी
4) आधुनिक भारत के मसिहा
5) इतिहास के ज्ञाता और रचियाता
6) मानवंशशास्त्र के ज्ञाता
7) तत्वज्ञानी (फिलाॅसाॅफर)
8) दलितों के और महिला अधिकारों के मसिहा
9) कानून के ज्ञाता (कानून के विशेषज्ञ)
10) मानवाधिकार के संरक्षक
11) महान लेखक
12) पत्रकार
13) संशोधक
14) पाली साहित्य के महान अभ्यासक (अध्ययनकर्ता)
15) बौध्द साहित्य के अध्ययनकर्ता
16) भारत के पहले कानून मंत्री
17) मजदूरों के मसिहा
18) महान राजनितीज्ञ
19) विज्ञानवादी सोच के समर्थक
20) संस्कृत और हिन्दू साहित्य के गहन अध्ययनकर्ता थे।
🔹बाबासाहब अंबेडकर की कुछ विशेषताएँ
1) पाणी के लिए आंदोलन करनेवाले विश्व के पहल महापुरुष
2) लंदन विश्वविद्यालय के पुरे लाईब्ररी के किताबों की छानबीन कर उसकी
जानकारी रखनेवाले एकमात्र महामानव
3) लंदन विश्वविद्यालय के 200 छात्रों में नंबर 1 का छात्र होने का सम्मान प्राप्त होनेवाले पहले भारतीय
4) विश्व के छह विद्वानों में से एक
5) विश्व में सबसे अधिक पुतले बाबासाहब अंबेडकर जी के हैं।
6) लंदन विश्वविद्यालय मे डी.एस्.सी.
यह उपाधी पानेवाले पहले और आखिरी भारतीय
7) लंदन विश्वविद्यालय का 8 साल का पाठ्यक्रम 3 सालों मे पूरा
करनेवाले महामानव
🔹बाबासाहब अंबेडकर जी के वजह से ही भारत में "रिजर्व बैंक" की स्थापना हुईं।
बाबासाहब अंबेडकर जी ने अपने डाॅक्टर ऑफ सायंस के लिए ' दि प्राॅब्लेम ऑफ रूपी' यह शोध प्रबंध लिखा था। Indian Money & Finance इसके अभ्यास के लिए
ब्रिटिशों ने जो कमिशन चुना था उनको बाबासाहब 🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹
The Battle of Bhima
Koregaon.
पिछली बार जब डायरेक्टर संजय
जायसवाल ने फ़िल्म शूद्रा द राइजिंग बनाया था तब
Sab ने एक होकर उस फ़िल्म को
सिनेमाहालो मल्टीप्लेक्सों में चलने
नहीं दिया जिसकी
वजह से उनको बहुत ज्यादा आर्थिक
नुकशान उठाना पड़ा था। किन्तु उसी
महान अम्बेडकरवादी ने दुबारा
फ़िल्म 500 बनाने का हिम्मत दिखाया है।
जिसमे 1जनवरी 1818 की
सच्ची घटना को दिखाया गया है
जिसमे मात्र 500 जांबाज महार सैनिको ने
देखते ही देखते पेशवाओ
)की 28 हजार
सैनिको के विशाल सेना का संहार कर डाला और
पूरी दुनिया के सामने अपने साहस
और पराक्रम का अदभुत नायाब नमूना पेश किया
और अपने ऊपर सदियो से हुए अत्याचार का
बदला लिया।
इस प्रकार का पराक्रम पूरी दुनिया में
कभी नहीं देखा गया
था।
अगर इस फ़िल्म को भी
मनुवादी दबाने में सफल होते
है जैसे इस कोरे गांव विजय की
घटना को छुपाने में सफल हो गए थे तो लानत
है हमारी एकजुटता पर।
सभी ग्रुप बंद करके अपने अपने
घरो में आराम करो। और अपने निकम्मेपन का
आनंद लो अन्यथा अगर दम है तो इस
फ़िल्म की इतनी
पब्लिसिटी करो की
इसकी सफलता से ं के
होस उडा दे। उन्हें अपनी
एक जुटता का परिचय दो।
ताकी एक डाइरेक्टर उत्साहित
होके हमारे समाज के मुद्दों पर आगे
भी नायाब फिल्में बना सके।
अन्यथा भजन कीर्तन वाले
मनुवादी फिल्मो की क्या
कमी है मार्केट में देखो और
आनंद लो।
इस पोस्ट को इतना शेयर करो इतना शेयर करो
हमारे sc st obc भाई इस मूवी
को देखने जाएँ और जागरुकता लाए
यही हमारी
मनोकामना है
आप भीम वाले हैँ इतना जरुर
करना है आपको
हम लोगोँ को हमारे समाज को जागृत
करना यही हमारा
मीशन है 🙏🙏जय 🌀भीम🙏🙏

भगवान सिर्फ एक अंधविश्वास है

लोग कहते हैं कि कण कण मे भगवान है, अगर कण कण मे भगवान है तो कण कण मे भ्रष्टाचार क्यों है ? 
अगर कण मे कण भगवान है तो लोग जगह जगह अपना मल , मूत्र त्याग कर क्या भगवान को अपवित्र नही बना रहे ? 
अगर जर्रे जर्रे मे भगवान है तो क्या लोग टट्टी, पेसाब, भगवान की खोपडी पर कर रहे हैं ? 
लोग कहते हैं कि बगैर भगवान की मर्जी के पत्ता भी नही हिलता, 
तो क्या भगवान चोरी भी करवाता है?
जब सब कुछ भगवान की मर्जी से होता है तो भगवान बलात्कार भी करवाता होगा ?
डकैती भी डलवाता होगा?
अगर यह सब भगवान ही करवाता है तो कितना निर्दयी है भगवान !
लोग कहते हैं कि भगवान गरीबो, मजलूमों, असहायों की रक्षा करता है ।
तो हिन्दुस्तान की आधे से अधिक आबादी गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने के लिए मजबूर क्यों है ?
भगवान क्यों नही इन्हें अमीर बना देता ?
दुनिया मे हर कहीं असहाय, मजलूम ही प्रताडित हो रहा है , भगवान क्यों नही इनकी मदद करता ?
लोग कहते है कि भगवान दुष्ट, चोर,गुण्डो को सजा देता है।
तो फिर जगह जगह चोरी डकैती, गुण्डागर्दी क्यों हो रही है ?
अगर भगवान इनको रोकने मे सक्षम है तो पुलिस ,सेना, कोर्ट कचहरी क्यों है ?
सच यह है कि भगवान कुछ नही कर सकता ।
आज तो भगवान की खुद शामत आ गयी है ।
आंतकवादी मंदिर, मस्जिद, गुरूद्वारा, चर्च देखकर ब्लास्ट कर रहा है, भगवान अपनी बचत नही कर पा रहा है ।
भगवान की अष्टधातु मूर्तियों को चोर चुरा कर अंतर्राष्ट्रीय बाजार मे बेंच कर करोडो कमा रहा है,
भगवान अपनी रक्षा नही कर पा रहा है ।
कितना बेबस है भगवान !
लोग कहते है कि भगवान दूसरो को पवित्र बनाता है, अपने दर्शन से ।
लेकिन यह भगवान दलितों के छूने से ही छुईमुई के पौधे की तरह खुद सिकुड जाता है ।
दलित के छूने से अपवित्र हो जाता है ।
और फिर गाय, भैंस, बकरी की पाखाना, पिसाब से पवित्र हो जाता है ।
कैसा भगवान है ?
भगवान जब सबसे ताकतवर है तो उसकी सिक्युरिटी मे पुलिस ,, कमाण्डों , सेना क्यों लगायी जाती है ?
किसी भी धार्मिक स्थल पर जाइए, वहां गेट पर सबसे ज्यादा लूले,लंगडे,अपाहिज ,कोढी,लाइन लगाये रहते है,
अंधे को आंख देत ,कोढिन को काया वाला भगवान कहां रहता है, क्यों नही इनकी समस्या दूर कर देता है ?
किसी ने कहा है कि _"इंसान को बनाकर भगवान ने सबसे बडी गल्ती की', या भगवान को बनाकर इंसान ने ।"
उत्तर साफ है कि "भगवान को बनाकर इंसान ने सबसे बडी गल्ती की।"
अगर इंसान ने भगवान की कल्पना नही की होती तो इसके नाम पर इतना ज्यादा लुटता, पिटता नही ।
भगवान सिर्फ एक अंधविश्वास है ।

Wednesday, December 23, 2015

हमारे पास...

हमारे पास...
.................
भीड़ है
संगठन नहीं
वोट की शक्ति है
सत्ता नहीं
विचार हैं
साहित्य नहीं
ख़बरें है
अखबार नहीं
सुर्खियां हैं
मिडिया नहीं
साधन है
संसाधन नहीं
श्रम है
व्यापार नहीं
कानून है
न्याय नहीं
संविधान है
अधिकार नहीं
भूख है
भोजन नहीं
कदम हैं
पगडण्डी नहीं
मंजिल है
रास्ते नहीं
क्योंकि...
............
पाखंड है
धम्म नहीं
गांधी है
अम्बेडकर नहीं
एक बनो नेक बनो

Monday, December 21, 2015

एक लडका अपने पिताजी से सवाल करता है


 


कुछ जान बची....
एक लडका अपने पिताजी से सवाल करता है....
लडका:- पापा मुझे स्कुल में पढाया की ईन्सान पहेले आदिमानव था. ये सच है क्या ?
पापा:- हां बेटा , ईन्सान पहेले आदिमानव था.
लडका:- फिर तो वो शरीर पर कपडे नही पहनते होगे.?
पापा:- नही बेटा, ईन्सान के जीवन मे धीरे-धीरे प्रगती हुई. ईन्सान थोडा थोडा समझने लगे तब पहेले पेड के पत्तो के कपडे पहनने लगे फिर जेसे जेसे उसे समझ आने लगा वेसे वो सूधरता गया ओर अनेक शोध करता गया. अभी जो कुछ भी हम देख रहे है, उपयोग कर रहे है, वो सब कुछ ईन्सान ने ही निर्माण किया है.
लडका:- पापा तो फिर' भगवान पहले थे कि ईन्सान.?
पापा:- बेटा भगवान पहले थे' भगवान दुनिया बनाई है...
लडका:- फिर पापा एसा केसे. वो भगवान की तस्वीर में तो कपडे, दागीने, त्रिशूल, सोना, भाले, गदा, लड्डू , मोदक, एसे बहुत कुछ-कुछ दिखता है.?
वो समय दागीने बनाने वाला सुनार था क्या ?
कपडे की मील थी क्या?
कपडे की सिलाई के लिये दरजी था क्या ?
भाले, त्रिशूल, गधे, तलवार बनाने वाले कारीगर थे क्या ?
लड्डू मोदक बनाने वाले हलवाई थे क्या ?
पापा:-पागलो जेसे सवाल पूछ मत , चुप बेठ !
अरे बेटा, वो भगवान है. वो कुछ भी कर सकते है...
लडका :- तो भगवान कहाँ है पापा ?
पापा:- अरे भगवान हमारी आजुबाजु ही है.
लडका:- क्या' भगवान हे यहा-?
पापा :- हा बेटा.
लडका:-तो उन्हे कहो ना शेर-हिरन की चामडी के कपडे पहनने से अच्छा प्रगत कपडे पहने....त्रिशूल भाले गदा तलवार से अब कोई नही डरता , उन्हसे कहो रायफल" मशीनगन" ओर आँटोम बोम्ब" पास रखे...
वैसे तो' जिसने दुनिया बनाई है' जिनकी शाप वाणी मे इतनी ताकत है तो उन्हे गदा तलवार की जरूर क्या है पापा ?
वो तो दयालू ओर क्षमाशील है...?
ओर एक पापा, उन्हे कहो अपने देश का भ्रष्टाचार मिटाने ? किसानो की समस्यावो का समाधान करने, उनकी आत्महत्या रोकने को, 2 साल की छोटी लडकी से 60 साल की ओरत पर रोजाना बलात्कार होते है. वो रोकने को कहो ना . मंदिरो में करोडो-अरबो की संपत्ती है वो लोक कल्यान के लिये देने की बुद्धी वो मंदिर प्रशासन वालो को दे वो कहो ना पापा....
पापा:- बेटा मे तेरे हाथ जोड्ता हुं' बस कर तेरे सवाल. मुझे अब तक नही पता. तो मे तुझे क्या जवाब दु..
मझे बच्चपन से जेसा भगवान दिखाया जेसा धर्म शिकाया वेसे ही पूजा ओर पालन करता आया...
मुझे ये सब नही पता बेटा...पर सब पालन करना पडता है बेटा...नही अच्छा लगता है फिर भी चुप बेठना पडना है..
लडका:-यानी आज तक आपने अपनी बुद्धी ओर धैर्या का उपयोग नही किया. पर पापा मे वेसा करूगा नही . सत्य-असत्य जान के ही आगे जाउगा .पर मुझे इतना विश्वास जरूर है. ये सृष्टी का निर्माता जेसे हो वेसे हो , पर सबी धर्म शिखाता है वेसे बिलकुल नही...
ये सुन के पापा का सर नीचे झूक गया ओर लडके से नजर चुराने लगा.
आज कम संख्या मे हो पर , कभी ना कभी आगे की पिढी के लडके ये सवाल जरूर पूछेगे ध्यान रखो. तब सर झुकाने से अच्छा अभी अपनी गलती सुधार ले. सभी करते ईसलिये मत करो, काम के कारन अच्छा लगे तो ही वो चीज करो..
खुद: को सवाल करो...आगे की वैज्ञानिक पिढी तैयार करो...
जय भिम महान..
auto → en
A boy asks his dad