अज्ञान का असर हैं ,
शिक्षा का ज्ञान नही ।
पत्थरों को पूजता हैं ,
सत्य की पहचान नही ।
मंदीरों में चढावा ,
गरीबों को दान नही ।
कठपुतली बनकर रह गया ,
खुद का ईमान नही ।
डूब गया हैं , दु:ख में ;
सुख में समाधान नही ।
बुद्ध को समझ ले ,
दुसरा कोई वरदान नही ।
वरना -------
जीना भी क्या जीना हैं ,
जब जिने का अरमान नही ।
क्या वजूद हैं तेरा ,
जो इन्सान होकर भी ,
तु इन्सान नही ।
शिक्षा का ज्ञान नही ।
पत्थरों को पूजता हैं ,
सत्य की पहचान नही ।
मंदीरों में चढावा ,
गरीबों को दान नही ।
कठपुतली बनकर रह गया ,
खुद का ईमान नही ।
डूब गया हैं , दु:ख में ;
सुख में समाधान नही ।
बुद्ध को समझ ले ,
दुसरा कोई वरदान नही ।
वरना -------
जीना भी क्या जीना हैं ,
जब जिने का अरमान नही ।
क्या वजूद हैं तेरा ,
जो इन्सान होकर भी ,
तु इन्सान नही ।
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